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महंगी हुई शिक्षा, यूपी बोर्ड की फीस पांच गुना बढ़ी

Sat, 07 May 2016 03:37 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरेली Updated Sat, 07 May 2016 03:37 AM IST
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Five time fee hike in UP board
बढ़ गई फीस - फोटो : PTI

 प्रदेश सरकार ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाते हुए सभी तरह की परीक्षा फीस ढाई से  तीन गुना तक बढ़ा दी है। सरकार ने यह फैसला यूपी बोर्ड को आर्थिक संकट से उबारने की दृष्टि से लिया है। जिसको लेकर छात्र और अभिभावकों तथा शिक्षक संघों में नाराजगी है। इनका तर्क है कि एक तरफ प्रदेश सरकार यूपी बोर्ड के स्कूलों में छात्राओं के लिए इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई मुफ्त कर रही है। दूसरी ओर बोर्ड परीक्षा फीस बढ़ाकर सरकारी शिक्षा के व्यवसायीकरण का संकेत दिया है।

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पिछले सात साल से यूपी बोर्ड ने परीक्षा शुल्क में किसी भी तरह की बढ़ोत्तरी नहीं की थी लेकिन इस बार ढाई गुना से लेकर पांच गुना तक बढ़ोत्तरी की गई है। बोर्ड के स्तर से की गई यह बढ़ोत्तरी छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को रास नहीं आ रही है। शिक्षक संघ शर्मा (गुट) ने इस बढ़ोत्तरी के खिलाफ विधान परिषद और उसके बाहर आंदोलन करने की घोषणा की है। संघ की ओर से इस बारे में आंदोलन की रणनीति अगले सप्ताह तक जारी हो जाएगी।

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कितनी बढ़ी फीस

Five time fee hike in UP board

कक्षा नौ और ग्यारह में पंजीकरण राशि 20 के स्थान पर 50 रुपये। इसमें से 10 रुपये कालेज के लिए। 20-20 रुपये राजकीय कोष और बोर्ड को मिलेंगे। पहले 20 रुपये सिर्फ बोर्ड को ही मिला करते थे। हाईस्कूल बोर्ड की संस्थागत परीक्षा शुल्क 80 के स्थान पर 200 रुपये। प्राइवेट के लिए 100 के स्थान पर 300 रूपये। इंटरमीडिएट में संस्थागत के  लिए शुल्क 90 के स्थान पर 220 और प्राइवेट के लिए 150 के स्थान पर 400 रुपये।

इंटरमीडिएट कृषि भाग एक और दो दोनों में 80 के स्थान पर 220 रुपये। इसी में प्राइवेट के लिए 150 के स्थान पर 400 रुपये। डिप्लीकेट मार्कशीट के लिए 20 के स्थान पर 100 रुपये। परीक्षा पास होने के पांच साल के दौरान प्रमाणपत्र के 20 के स्थान पर 200 रुपये।

 ‘बोर्ड परीक्षा शुल्क में बढ़ोत्तरी जरूरी हो गई थी, क्योंकि खर्चे नहीं निकल पा रहे थे। 80 या 90 रुपये तो मूल्यांकन की राशि से काफी कम है। क्योंकि 10 उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर 120 रुपये खर्च होते हैं। अन्य खर्चे अलग रहे।’ संजय मिश्रा शिक्षक विधायक, बरेली-मुरादाबाद खंड।

‘यह बढ़ोत्तरी छात्र और अभिभावक दोनों के लिए कष्टकारी है। इससे सरकार की कथनी और करनी में अंतर दिखा है। क्योंकि एक तरफ इंटर तक निशुल्क शिक्षा की बात कही जा रही है, दूसरी ओर कई गुना शुल्क बढ़ोत्तरी। इसके खिलाफ शिक्षक संघ सदन के अंदर और बाहर आंदोलन करेगा।’ जगवीर किशोर जैन, प्रदेश उपाध्यक्ष, एवं विधायक शिक्षक संघ, शर्मा गुट)

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