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पांच माह मुफ्त राशन: गरीब कल्याण योजना को नवंबर तक बढ़ाने की मंजूरी, 80 करोड़ लोगों को राहत
Wed, 23 Jun 2021 06:13 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 23 Jun 2021 06:13 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने कोरोना के कारण विपत्ति झेल रहे देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने की योजना पांच माह और बढ़ा दी है। इस पर करीब 67 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) को पांच महीने के लिए नवंबर तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी।
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कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गरीब लाभार्थियों को होने वाली आर्थिक कठिनाइयों के मद्देजनर इस साल जून तक दो महीने के लिए पीएमजीकेएवाई को फिर शुरू किया गया था।
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इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि केंद्र के मुफ्त राशन कार्यक्रम पीएमजीकेएवाई को दिवाली तक बढ़ा दिया जाएगा। मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
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एक आधिकारिक बयान में कहा गया, 'केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएमजीकेएवाई (चरण-4) के तहत पांच महीने की एक और अवधि यानी जुलाई से नवंबर 2021 तक के लिए अतिरिक्त खाद्यान्न के आवंटन को मंजूरी दे दी है।' बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत कवर किए गए अधिकतम 81.35 करोड़ लाभार्थियों, जिसमें प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के तहत कवर किए गए लोग भी शामिल हैं, को पांच किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह की दर से मुफ्त अतिरिक्त खाद्यान्न दिया जाएगा।
बयान के मुताबिक इसके लिए 64,031 करोड़ रुपये की अनुमानित खाद्य सब्सिडी की जरूरत होगी, जबकि अतिरिक्त खर्च के रूप में 3,234.85 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस को होल्डिंग कंपनी में विलय को मंजूरी दी
केंद्र सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक क्षेत्र की सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस कंपनी लिमिटेड (सीआरडब्ल्यूसी) की उसकी होल्डिंग कंपनी सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (सीडब्ल्यूसी) में विलय को मंजूरी दे दी। इस निर्णय का मकसद 'न्यूनतम सरकार, कारगर शासन' के दृष्टिकोण को क्रियान्वित करते हुए कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में निजी क्षेत्र की दक्षता लाना है।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सीआरडब्ल्यूसी की सभी संपत्तियों, देनदारियों, अधिकारों और दायित्वों को उसके होल्डिंग उद्यम सीडब्ल्यूसी को स्थानांतरित करने और उसमें विलय को मंजूरी दी। सीआरडब्ल्यूसी कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत 2007 में गठित मिनी रत्न श्रेणी-II के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय सार्वजनिक उद्यम है जबकि सीडब्ल्यूसी मिनी रत्न श्रेणी-1 के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय सार्वजनिक उद्यम है। इस निर्णय से यह अनुमान है कि रेलसाइड वेयरहाउस कॉम्प्लेक्स (आरडब्ल्यूसी) के प्रबंधन व्यय में कॉरपोरेट कार्यालय के किराए, कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों में बचत से कुल व्यय में पांच करोड़ रुपये की कमी आएगी।
आरडब्ल्यूसी के क्षमता उपयोग में भी सुधार होगा क्योंकि सीडब्ल्यूसी के लिए सीमेंट, उर्वरक, चीनी, नमक और सोडा जैसी वर्तमान वस्तुओं के अलावा अन्य वस्तुओं के भंडारण की क्षमता में भी वृद्धि होगी।
बयान के अनुसार, इस विलय से माल-गोदाम स्थलों के पास कम से कम 50 और रेलसाइड गोदाम स्थापित करने की सुविधा मिलेगी।
सीडब्ल्यूसी का गठन 1957 में हुआ। यह केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कृषि उपज और कुछ अन्य वस्तुओं के भंडारण के उद्देश्य व उससे जुड़े मामलों के लिए वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के निगमन और विनियमन के लिए सेवाएं प्रदान करती है।