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वायु प्रदूषण से 2016 में देश में पांच लाख की मौत, ताजा हालात उससे भी बदतर : रिपोर्ट

Fri, 15 Nov 2019 02:18 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 15 Nov 2019 02:18 AM IST
सार

  • सबसे ज्यादा 97 हजार लोग शिकार बने थे कोयला प्रदूषण के, अब भी इसका कहर सबसे ज्यादा
  • 11 फीसदी कोयला आधारित ऊर्जा सप्लाई बढ़ी है भारत में साल 2016 से साल 2018 के बीच
  • 5.29 लाख लोगों की 2016 में वायु प्रदूषण में पीएम2.5 के खतरनाक स्तर पर पहुंचने से हुई मौत
  • 97400 लोगों की मौत के लिए कोयले से होने वाले प्रदूषण को जिम्मेदार माना गया था

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Five lakh deaths in 2016 due to air pollution, current situation is even worse
दिल्ली में वायुप्रदूषण - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश में तीन साल पहले वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के कारण पांच लाख से ज्यादा लोगों को असमय मौत का शिकार होना पड़ा था। इसमें भी सबसे ज्यादा कहर कोयले से होने वाले प्रदूषण ने बरपाया था, जिसके चलते 97 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। लेकिन देश में वायु प्रदूषण के ताजा हालात साल 2016 से भी कहीं ज्यादा बदतर हैं। यह दावा बृहस्पतिवार को जारी की गई एक नई रिपोर्ट में किया गया है।

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स्वास्थ्य व जलवायु परिवर्तन पर ‘द लैंसेट काउंटडाउन 2019’ नाम की इस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि देश में कोयला आधारित ऊर्जा का उपयोग बंद नहीं किया गया तो हालात और ज्यादा बदतर हो सकते हैं। इस रिपोर्ट में कोयले के उपयोग को जल्द से जल्द शून्य पर लाने पर जोर दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि पेरिस जलवायु समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए यह सबसे अहम कदम है।
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संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों की हर महाद्वीप में मौजूद शाखाओं और 35 अग्रणी शिक्षण संस्थानों के शोध और सहमति पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में तेल के बाद कोयले का योगदान दूसरे नंबर पर है। वैश्विक विद्युत उत्पादन में सबसे ज्यादा 38 फीसदी हिस्सेदारी कोयले की है, जबकि दूसरे नंबर पर मौजूद गैस से महज 23 फीसदी बिजली बन रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कोयले से होने वाली कुल प्राथमिक ऊर्जा सप्लाई (टीपीईएस) में अधिकतर बढ़ोतरी एशिया, खासतौर पर चीन, भारत व दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में दर्ज की गई है।

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साल के शुरू में भी आई थी ऐसी ही रिपोर्ट

इस साल की शुरुआत में स्विट्जरलैंड की एक संस्था की तरफ से किए गए एक अन्य अध्ययन में भी भारत में कोयले के उपयोग पर सवाल उठाया गया था। उस रिपोर्ट में चीन और अमेरिका को कोयला आधारित ऊर्जा का सबसे बड़ा उत्पादक कहा गया था, लेकिन अपने खराब सिस्टम व पुराने ढांचों के कारण भारतीय कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों से सबसे ज्यादा मौत होने का दावा भी किया गया था। साथ ही ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी में इन संयंत्रों का ज्यादा योगदान होने का दावा किया गया था।

इसलिए खतरनाक है कोयला जलाना

कोयला जलाने से कार्बन डाई ऑक्साइड के अलावा सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, मरक्यूरी और बड़े पैमाने पर पर्टीकुलेट मैटर (सूक्ष्म से भी महीन कण) का हवा में मिश्रण होता है।

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