समुद्र की मार के साथ दूसरे मुल्कों की कैद भी झेलते हैं ये मछुआरे, कभी पकड़ लेता है पाकिस्तान तो कभी श्रीलंका
पिछले छह सालों में करीब 2130 मछुआरों और 383 नौकाओं को श्रीलंका के कब्जे से मुक्त कराया गया है। इस अवधि के दौरान पाकिस्तान की कैद से भी दो हजार से ज्यादा मछुआरों की सुरक्षित रिहाई एवं देश वापसी सुनिश्चित की गई है...
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नीली क्रांति के वाहक यानी मछुआरों का जीवन मुश्किलों से भरा है। जब वे मछली पकड़ने समुद्र में उतरते हैं तो कभी पाकिस्तान उन्हें पकड़ लेता है तो कभी श्रीलंका। दूसरे मुल्कों के सुरक्षा बल जब इन्हें पकड़ते हैं, तो उनके पास एक ही बहाना होता है कि मछुआरों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) को पार किया है।
श्रीलंका की नौसेना द्वारा भारतीय मछुआरों पर हमला करने की रिपोर्ट भी मिलती रही हैं। मुल्कों के अलावा ये मछुआरे समुद्र की मार भी झेलते हैं। यह मार तेज लहरें, सुनामी, समुद्री तूफान और जीव जंतुओं के रूप में सामने आती है। मछुआरों को छुड़ाने के लिए भारत सरकार राजनयिक प्रयास करती है।
पिछले छह सालों में करीब 2130 मछुआरों और 383 नौकाओं को श्रीलंका के कब्जे से मुक्त कराया गया है। इस अवधि के दौरान पाकिस्तान की कैद से भी दो हजार से ज्यादा मछुआरों की सुरक्षित रिहाई एवं देश वापसी सुनिश्चित की गई है।
भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय तटरक्षक दल अब अपने एयरक्रॉफ्ट के द्वारा आईएमबीएल पर निगरानी रखने लगा है। साथ ही यह तटरक्षक बल समुद्र में अपनी उपस्थिति के द्वारा यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय नौकाएं आईएमबीएल से दूर रहें।
मत्स्यपालन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, मछुआरा जब समुद्र में उतरता है, तो उसके चारों तरफ पानी होता है। तूफान और बड़ी लहरें भी उठती हैं। जब इनकी नौका आईएमबीएल के आसपास होती हैं तो वह बरसात या तूफान के चलते एक झटके में सीमा पार कर दूसरे मुल्क में चली जाती हैं।
मछुआरे अगर रोकना भी चाहें तो भी नहीं रोक पाते। वजह, उस वक्त प्राकृतिक बाधाओं का जोर इतना ज्यादा होता है कि उसे संभालना बहुत मुश्किल होता है। कई बार यह भी देखने को मिला है कि वे सीमा रेखा पर होते हैं, लेकिन दूसरे मुल्क की सेना उन्हें पकड़ लेती है।
उनके पास एक ही आरोप होता है कि मछुआरों ने सीमा पार की है। जब तक भारतीय तटरक्षक दल वहां पहुंचता है तो मछुआरे दूसरे मुल्क की कैद में होते हैं। ऐसे भी मौके आए हैं कि श्रीलंका या पाकिस्तान की सेना मछुआरों को पकड़ लेती है और भारतीय तटरक्षकों को सूचित भी नहीं करती।
यह सूचना उन्हें साथी मछुआरों से मिलती है कि फलां मुल्क के सैनिकों ने मछुआरे और उनकी नौकाएं अपने कब्जे में ले ली हैं। इनके परिवार वालों को भी दूसरे मछुआरे सूचना देते हैं। इसके बाद परिजन अपने जनप्रतिनिधि और दूसरे कानूनी उपायों का सहारा लेकर उन्हें रिहा कराने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। कई बार इसमें वर्षों लग जाते हैं।
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री प्रताप चंद्र सारंगी के अनुसार, भारतीय मछुआरों को समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री रेखा पार करने और श्रीलंकाई जल में मछली पकड़ने के लिए श्रीलंकन एजेंसी उन्हें हिरासत में ले लेती है। कुछ ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई हैं, जिसमें वहां की नौसेना ने भारतीय मछुआरों पर हमला भी किया है। ऐसे हमलों को लेकर भारत सरकार ने श्रीलंका सरकार के समक्ष उच्चतम स्तर पर इसे मुद्दे को उठाया है।
प्रधानमंत्री मोदी खुद इस बाबत श्रीलंकाई राष्ट्रपति के साथ बात कर चुके हैं। श्रीलंकाई सरकार से अनुरोध किया गया है कि मुछआरों के मुद्दे को पूरी तरह से मानवीय और आजीविका के पहलू से जोड़कर देखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे मामलों में बल प्रयोग किसी भी सूरत में न हो। सरकार के निरंतर राजनयिक प्रयासों के फलस्वरुप पिछले छह साल के दौरान श्रीलंका ने 2130 मछुआरों को रिहा किया है। उनकी नौकाओं को भी छोड़ दिया गया है।
पााकिस्तान की तरफ से भी समय-समय पर मछुआरों को हिरासत में लेने के मामले सामने आते हैं। इस साल जनवरी में पाकिस्तान ने आंध्र प्रदेश के 20 मछुआरों को रिहा किया था। अप्रैल 2020 तक 270 मछुआरे पाकिस्तान की हिरासत में बताए गए हैं।
पाकिस्तान ने 207 लोगों के अपनी हिरासत में होने की पुष्टि की है। सरकार के प्रयासों के चलते 2014 से लेकर अब तक 21 सौ से अधिक भारतीय मछुआरों की सुरक्षित रिहाई कराई गई है। अब दोनों देशों के साथ लगती समुद्री सीमा पर भारतीय तटरक्षक बल लगातार मछुआरों पर निगरानी रख रहा है।