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स्वदेशी हैवीवेट टॉरपीडो वरुणास्त्र नौसेना में शामिल, विशाखापत्तनम में हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

Sun, 22 Nov 2020 01:35 AM IST
देव कश्यप एएनआई, विशाखापत्तनम
एएनआई, विशाखापत्तनम Published by: देव कश्यप Updated Sun, 22 Nov 2020 01:35 AM IST
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First Varunastra, the heavyweight torpedo deliver to the Indian Navy
varunastra - फोटो : DRDO

भारतीय नौसेना का स्वदेशी टॉरपीडो 'वरुणास्त्र' के लिए इंतजार खत्म हो गया है। 'वरुणास्त्र' की पहली खेप नौसेना के लिए रवाना कर दी गई है। इसे चलाए जाने के बाद 40 किलोमीटर के दायरे में किसी भी जहाज या पनडुब्बी की तबाही निश्चित मानी जाती है।

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भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने बताया कि हैवीवेट टॉरपीडो वरुणास्त्र की पहली खेप को भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है। शनिवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. जी सतीश रेड्डी और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आज एक समारोह में इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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जीपीएस से लक्ष्य खोजने वाला वरुणास्त्र 
वरुणास्त्र नामक यह पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो जीपीएस की मदद से अपने लक्ष्य को भेद सकता है। एक टन से अधिक वजनी वरुणास्त्र अपने साथ 250 किलो तक का वॉरहेड ले जा सकता है। उसका गाइडेंस सिस्टम भी उन्नत है। भारत के पास ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल भी हैं।

नौसेना की ताकत बढ़ाएगा पूर्ण स्वदेशी टारपीडो 'वरुणास्त्र'
पूरी तौर पर स्वदेशी टारपीडो 'वरुणास्त्र' 74 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला करता है। इस स्वदेशी टॉरपीडो से भारतीय जंगी जहाजों और सिंधु क्लास सबमरीन को लैस किया जाएगा। इसका वजन लगभग डेढ़ टन है। इसमें 250 किलो के हाई लेबल एक्सप्लोसिव लगे हैं। 'वरुणास्त्र' में लगे ट्रांसड्यूसर्स इसको हमले के ज्यादा बड़ा एरिया प्रदान करते हैं।यही कारण है कि 'वरुणास्त्र' किसी भी सबमरीन पर ऊपर या नीचे दोनों तरफ से हमला कर सकता है। इसमें जीपीएस लोकेटिंग सिस्टम लगा हुआ है, जिसकी वजह से इसका निशाना अचूक हो जाता है।

भारतीय नौसेना ने 1187 करोड़ रुपये में  63 'वरुणास्त्र' का ऑर्डर दिया है। इसमें जहाज और सबमरीन दोनों से फायर होने वाले टॉरपीडो शामिल हैं। 'वरुणास्त्र' को कोलकाता क्लास, राजपूत क्लास और डेल्ही क्लास डिस्ट्रायर्स के अलावा कमोर्ता क्लास कार्वेट्स और तलवार क्लास फ्रिगेट्स में भी लगाए जाने की योजना है। इसे सिंधु सीरिज की सबमरीन में भी लगाया जाएगा।
 

डीआरडीओ का उत्पाद है 'वरुणास्त्र'
'वरुणास्त्र' का निर्माण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के भारतीय नौसेना के विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला ने किया है। इसे बनाने में डीआरडीओ की मदद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियन टेक्नोलॉजी ने भी की है। यह हथियार युद्ध के दौरान पैदा होने वाली कई स्थितियों के अनुकूल है।

'वरुणास्त्र' के जहाज संस्करण को औपचारिक रूप से 26 जून 2016 को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने नौसेना में शामिल किया था। अभी तक भारतीय नौसेना विदेश से खरीदे गए टॉरपीडो का ही इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन अब वरुणास्त्र के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना स्वदेशी विध्वंसक से लैस हो जाएगी।

 

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