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नए डाक्टरों को गांवों में पोस्टिंग के बाद मिले पहला प्रमोशन: उप राष्ट्रपति
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 27 Apr 2018 05:09 AM IST
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Venkaiah Naidu
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डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे देश के गावों और पिछड़े इलाकों के लिए उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने एक नया सॉल्यूशन दिया है। उनका कहना है कि नए एमबीबीएस डॉक्टर को पहला प्रमोशन तभी मिले, जब तक कि वह किसी पिछड़े इलाके में अपनी पोस्टिंग पूरी न कर ले। साथ ही, उप राष्ट्रपति ने फैमिली डॉक्टर की अवधारणा पर भी जोर दिया।
गुरुवार को 15वीं वर्ल्ड रूरल हेल्थ कॉन्फ्रेंस के शुरुआती सत्र को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने कहा कि कम आय वाले देशों में प्रभावशाली हेल्थकेयर सर्विसेज की जरूरत है। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशयंस की तरफ से किया गया। उप राष्ट्रपति ने कहा कि इस समस्या से निजात पाने के लिए हेल्थ सेक्टर में शामिल लोगों को मिल कर प्रयास करना होगा।
उन्होंने कहा, शहरी और ग्रामीण के बीच की खाई को खत्म करने के लिए निजी क्षेत्र, एनजीओ और डॉक्टर्स की संस्थाओं को अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए एक संभावित हल देते हुए कहा कि गावों और पिछड़े इलाकों में नए एमबीबीएस डॉक्टर की नियुक्ति अनिवार्य की जाए और उसके बाद ही उसे पहला प्रमोशन मिले।
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कॉन्फ्रेंस में उन्होंने फैमिली डॉक्टर की अवधारणा पर भी जोर दिया। उप राष्ट्रपति ने कहा कि फैमिली डॉक्टर पूरे परिवार प्राइमरी इलाज के साथ न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक दिक्कतों को सुलझाने में भी मदद करता है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर अन्य हेल्थ सर्विसेज और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भी मदद लेता है।
उन्होंने इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की आधी आबादी गांव-देहात में रहती है, और केवल 38 परसेंट नर्से उनकी देखभाल करती हैं। जबकि इसके एक तिहाई से कम संख्या डॉक्टरों की है। उन्होंने कहा कि यह समस्या विकसित देशों में भी है, जहां दूरदराज वाले इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी है। अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां दूर-दराज वाले इलाकों में 20 फीसदी आबादी पर केवल 9 फीसदी ही रजिस्टर्ड डॉक्टर हैं।
इस दौरान उप राष्ट्रपति ने सरकार के नए हेल्थ इंश्योरेंस कार्यक्रम आयुष्मान भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इससे 10 करोड़ परिवारों को फायदा पहुंचेगा। इस कार्यक्रम के तहत पूरे देश में 1.5 लाख हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोले जाएंगे।
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गुरुवार को 15वीं वर्ल्ड रूरल हेल्थ कॉन्फ्रेंस के शुरुआती सत्र को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने कहा कि कम आय वाले देशों में प्रभावशाली हेल्थकेयर सर्विसेज की जरूरत है। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशयंस की तरफ से किया गया। उप राष्ट्रपति ने कहा कि इस समस्या से निजात पाने के लिए हेल्थ सेक्टर में शामिल लोगों को मिल कर प्रयास करना होगा।
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उन्होंने कहा, शहरी और ग्रामीण के बीच की खाई को खत्म करने के लिए निजी क्षेत्र, एनजीओ और डॉक्टर्स की संस्थाओं को अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए एक संभावित हल देते हुए कहा कि गावों और पिछड़े इलाकों में नए एमबीबीएस डॉक्टर की नियुक्ति अनिवार्य की जाए और उसके बाद ही उसे पहला प्रमोशन मिले।
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कॉन्फ्रेंस में उन्होंने फैमिली डॉक्टर की अवधारणा पर भी जोर दिया। उप राष्ट्रपति ने कहा कि फैमिली डॉक्टर पूरे परिवार प्राइमरी इलाज के साथ न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक दिक्कतों को सुलझाने में भी मदद करता है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर अन्य हेल्थ सर्विसेज और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भी मदद लेता है।
उन्होंने इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की आधी आबादी गांव-देहात में रहती है, और केवल 38 परसेंट नर्से उनकी देखभाल करती हैं। जबकि इसके एक तिहाई से कम संख्या डॉक्टरों की है। उन्होंने कहा कि यह समस्या विकसित देशों में भी है, जहां दूरदराज वाले इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी है। अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां दूर-दराज वाले इलाकों में 20 फीसदी आबादी पर केवल 9 फीसदी ही रजिस्टर्ड डॉक्टर हैं।
इस दौरान उप राष्ट्रपति ने सरकार के नए हेल्थ इंश्योरेंस कार्यक्रम आयुष्मान भारत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इससे 10 करोड़ परिवारों को फायदा पहुंचेगा। इस कार्यक्रम के तहत पूरे देश में 1.5 लाख हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोले जाएंगे।