सजा मिलने के बाद से जेल में ऐसे बीत रहे हैं आसाराम के दिन, अब मिल सकता है ये काम
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आसाराम तकरीबन पौने पांच साल से जेल में बंद है। अभी तक वह आश्रम का ही खाना खाता था। लेकिन सजा मिलने के बाद से पहली बार कैदी नंबर 130 आसाराम के लिए आश्रम से खाना नहीं आया। गुरुवार को आसाराम के लिए बाकी कैदियों की तरह ही जेल का खाना आया। जेल मैन्यू के अनुसार उसे लौकी की सब्जी, मोठ दाल और रोटी दी गई लेकिन उसने यह कहकर मना कर दिया कि उसका एकादशी का उपवास है।
जेल के नियमों के मुताबिक सजायाफ्ता कैदी को जेल का ही खाना खाना पड़ता है। केवल विशेष परिस्थितियों में ही कैदी की मांग पर घर से खाना मंगवाया जाता है। वहीं आसाराम के सेवादार शरतचंद्र जो कि कैदी नंबर 129 है को भी जेल का ही खाना दिया गया।
जेल में मिल सकता है ये काम
2 सितंबर 2013 से आसाराम जेल के सबसे सुरक्षित वार्ड संख्या 2 में रह रहा था। वह रोज सुबह पूजा-पाठ करता है जिसके लिए वह तुलसी और रुई का इस्तेमाल करता है। इसके लिए उसने तुलसी और कपास के पौधे भी लगाए हुए हैं। साथ ही आसाराम ने बैरक के तीनों तरफ भी कई प्रकार के पेड़-पौधे लगाए हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि उसे जेल में पेड़-पौधों में पानी डालने का काम दिया जा सकता है।
शिल्पी के लिए हैं ये विकल्प
आसाराम के साथ साजिश में शरतचंद्र के अलावा शिल्पी भी शामिल थी। आमतौर पर महिला कैदियों को जेल में सिलाई, ब्लूटी पार्लर और मेहंदी लगाना सिखाया जाता है। कैदी नंबर 76 शिल्पी के लिए भी मुख्य रूप से यही विकल्प होंगे। वहीं शरतचंद्र के लिए कोई काम नहीं है क्योंकि जेल में उससे पुराने भी कई कैदी हैं, जो काम करने के इच्छुक हैं पर उनके लिए कोई काम उपलब्ध नहीं है।