चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के बारे में जानिए सबकुछ
- एनएसए के नेतृत्व वाली क्रियान्वयन समिति ने सौंपी सरकार को अपनी रिपोर्ट
- सीसीएस जल्द तय करेगी इस पद पर नियुक्त पाने वाले पहले अधिकारी का नाम
- सेना, नौसेना और भारतीय वायुसेना ने अपने सबसे वरिष्ठ कमांडरों के नाम भेजे
- सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का दावा सबसे मजबूत, 31 को होंगे रिटायर
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विस्तार
देश को अपना पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) मिल गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के नेतृत्व वाली उच्च स्तरीय क्रियान्वयन समिति ने इस मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) को सौंपी थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। 31 दिसंबर 2019 को सेवानिवृत्त हो रहे थलसेनाध्यक्ष बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाए गए हैं।
सरकार से सीडीएस के पद पर नियुक्ति के लिए 64 साल की अधिकतम आयु सीमा तय करने की सिफारिश की थी, जिसे बढ़ाकर 65 वर्ष कर दिया गया है। साथ ही यह भी कहा है कि प्रोटोकॉल में सीडीएस के पद को सेना के तीनों अंगों के वर्तमान सर्वोच्च अधिकारियों से एक रैंक ऊपर और कैबिनेट सचिव से एक रैंक नीचे का रखा जाए। इस पद पर तैनात अधिकारी का ओहदा चार सितारा जनरल वाला होगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले पर झंडारोहण के दौरान अहम सैन्य सुधार के तौर पर तीनों सेनाओं के मुखिया के तौर पर सीडीएस की नियुक्ति करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री की घोषणा के कुछ ही दिन के अंदर एनएसए डोभाल के नेतृत्व में क्रियान्वयन समिति गठित कर दी गई थी, जिसे सीडीएस की जिम्मेदारियां और इस पद पर नियुक्ति के दिशा-निर्देश तय करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
क्यों अहम होगा सीडीएस का पद
सेना के तीनों अंगों में समन्वय बनाने और एक आदेश पर तीनों को सक्रिय करने के लिए 1999 के कारगिल युद्ध के बाद एक समिति ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद के सृजन की सिफारिश की थी। प्रधानमंत्री व रक्षा मंत्री को सुरक्षा व सामरिक मुद्दों पर सलाह देने के लिए तीनों सेनाओं के सर्वोच्च अधिकारी के तौर पर अकेले सलाहकार की भूमिका निभाएगा।
हालांकि उस समय सेना व वायु सेना ने इस व्यवस्था के पक्ष में हामी भर दी थी, लेकिन तत्कालीन नौसेना अध्यक्ष की आपत्ति के चलते सीडीएस की नियुक्ति का मामला खटाई में पड़ गया था। 2012 में नरेश चंद्रा टास्क फोर्स ने भी चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) के स्थायी अध्यक्ष के तौर पर सीडीएस की नियुक्ति की सिफारिश की थी।
फिलहाल अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और जापान सहित दुनिया के कई देशों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जैसी व्यवस्था है। इस पद के बनने पर सेना के तीनों अंगों के बीच किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए आपसी संवादहीनता जैसी स्थिति नहीं होगी, जिससे उसकी मारक क्षमता और ज्यादा प्रभावी हो जाएगी।
अभी कैसे होता है समन्वय
कारगिल युद्ध के बाद बनी समिति की सिफारिश पर तत्कालीन नौसेना अध्यक्ष के ऐतराज को देखते हुए चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) गठित की गई थी, जिसका अध्यक्ष तीनों सेनाओं में सबसे वरिष्ठतम कमांडर बनता है। हालांकि यह पद तीनों सेनाओं में समन्वय बनाने के लिए गठित किया गया था, लेकिन इसके पास कोई अतिरिक्त शक्ति नहीं होती है। इसलिए यह महज रस्मी पद ही माना जाता है।