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आग के शोलों में समा गए जांबाज जवान, ये ना होते तो मच जाती तबाही
सुरेन्द्र मिश्र /अमर उजाला, मुंबई
Updated Wed, 01 Jun 2016 11:14 AM IST
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सेना के जवानों ने एक बार फिर जांबाजी का परिचय दिया है। खुद आग के शोलों में समा गए लेकिन पूरे हथियार (आयुध) डिपो को तबाह होने से बचा लिया। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यार्ड में आग लगने के बाद सेना के अधिकारी और जवान तुरंत सतर्क हो गए थे।
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यह आग शोला न बन जाए इसलिए उस पर काबू पाने के लिए पहले दो अधिकारियों समेत जवानों की पहली टीम ने मोर्चा संभाल लिया था। लेकिन, आग बुझाने के दौरान ही धमाके शुरू हो गए और यह टीम गोला बारूद के धमाकों में समा गई।
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लेफ्टिनेंट कर्नल आरएस पवार और मेजर के मनोज की टीम इसी मुहिम का हिस्सा थी। उनकी कोशिश थी कि आग अन्य बंकर में न फैलने पाए। शायद उन्हें भयानक तबाही का अंदाजा था इसलिए वे अपनी जान जोखिम में डाल कर अंदर दाखिल हुए थे।
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सेना के अफसर और जवान आग को बुझाने का हर संभव प्रयास कर रहे थे लेकिन हथियारों के जखीरे में सुलग रहे गोले फटने लगे। अधिकारी ने बताया कि हथियार डिपो में हजारों बंकर बने हैं जिसमें रॉकेट, लांचर, मोर्टार, तोप के गोले, एक-47 और मिसाइल आदि रखे हुए हैं।
सेना आयुध में लगी आग
- फोटो : पीटीआई
उन्होंने बताया कि आयुध डिपो काफी बड़ा होता है और हजारों एकड़ में फैला होता है। हथियारों के जखीरे और गोला बारूद की सुरक्षा के लिए सेफ्टी सिस्टम लगे होते हैं। लेकिन, शुक्र यह है कि एक ही बंकर में यह धमाके हुए।
अन्य बंकरों में आग फैलने से रोक लिया गया। एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने बताया कि हमारे लिए सभी हथियार डिपो महत्वपूर्ण होते हैं क्या बड़ा क्या छोटा। लेकिन, पुलगांव हथियार डिपो हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है।
हादसे में माल नहीं जान का हुआ नुकसान : परिकर
रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि सेना के जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर आग को अन्य बंकरों में फैलने से रोक लिया। उन्होंने कहा कि अगर आग फैलती तो भयानक तबाही होती। दस हजार एकड़ में फैले हथियार डिपो में एक बंकर से दूसरे बंकर की दूरी सौ से डेढ़ सौ मीटर है। बंकरों के बीच ज्यादा दूरी होने के कारण भारी दुर्घटना टल गई।
अन्य बंकरों में आग फैलने से रोक लिया गया। एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने बताया कि हमारे लिए सभी हथियार डिपो महत्वपूर्ण होते हैं क्या बड़ा क्या छोटा। लेकिन, पुलगांव हथियार डिपो हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है।
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रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि सेना के जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर आग को अन्य बंकरों में फैलने से रोक लिया। उन्होंने कहा कि अगर आग फैलती तो भयानक तबाही होती। दस हजार एकड़ में फैले हथियार डिपो में एक बंकर से दूसरे बंकर की दूरी सौ से डेढ़ सौ मीटर है। बंकरों के बीच ज्यादा दूरी होने के कारण भारी दुर्घटना टल गई।