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West Bengal: केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, सिख व्यक्ति पर चप्पल फेंकने का आरोप

Sun, 15 Jun 2025 10:13 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 15 Jun 2025 10:13 PM IST
सार

West Bengal: कोलकाता के कालीघाट थाने में केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने एक सिख व्यक्ति की पगड़ी पर कथित रूप से चप्पल फेंकी। भाजपा ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि प्रदर्शन में केवल कागज के टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया था। 

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FIR against Union min for 'throwing slipper at Sikh man', BJP says it was paper cutting
बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने रविवार को दावा किया कि केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के खिलाफ कोलकाता के थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सिख समुदाय के एक व्यक्ति पर चप्पल फेंका, जो उसकी पगड़ी पर लगा। वहीं, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन में केवल कागज के टुकड़े का इस्तेमाल किया गया था। 
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कालीघाट थाने में यह प्राथमिकी 13 जून दर्ज की गई। प्राथमिकी में कहा गया है कि 12 जून राज्य भाजपा प्रमुख मजूमदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के पास एक सार्वजनिक स्थान पर (हाजरा रोड और हरीश चटर्जी स्ट्रीट के चौराहे पर) व्यक्ति पर चप्पल फेंका था। 
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टीएमसी ने प्राथमिकी की एक प्रति को अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया है। इसमें शिकायतकर्ता सिख व्यक्ति ने आरोप लगाया कि यह मजूमदार का जानबूझकर और इरादतन किया गया कृत्य था, जिससे धार्मिक विश्वास का अपमान हुआ और धार्मिक भावना को ठेस पहुंची, साथ ही उस व्यक्ति पर हमला भी हुआ। 

प्राथमिकी की प्रति का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं किया है, जो टीएमसी ने अपने एक्स हैंडल पर साझा की है। भारत न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य) और धारा 115 (2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। 

टीएमसी ने दावा किया कि सिख समुदाय ने मजूमदार के खिलाफ उचित आक्रोश जताया है। सत्तारूढ़ पार्टी ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, उन्होंने तत्काल और बिना शर्त माफी की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर उनकी आवाज को अनसुना किया गया तो व्यापक विरोध प्रदर्शन होंगे। 

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भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन में केवल कागज के टुकड़े का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा, 'सिख लोगों का अपमान करने के लिए झूठी कहानी बनाई जा रही है।'  उन्होंने कहा, 'मजूमदार और हमारे जैसे लोगों को गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविंद सिंह के बलिदान के बारे में बचपन से सिखाया गया है। यह भाजपा नेताओं का सिख समुदाय के प्रति सम्मान दर्शाता है।' 12 जून को मजूमदार और अन्य नेताओं को महेशतला की ओर जाने के दौरान पुलिस ने रोका था, जिसके बाद उन्होंने कोलकाता के कालीघाट क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अक्सर चप्पल पहने नजर आती हैं। 

वहीं, मजूमदार ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, कल इसी पश्चिम बंगाल पुलिस को रबीन्द्रनगर में कट्टर जिहादियों के सामने सफेद कपड़े लहराने पड़े थे – बेबस, असहाय और अपमानित महसूस कर रही थी और आज अचानक ये योद्धा बन गए हैं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आदेशों का अंधभक्ति से पालन करते हुए, पूरी तरह गुलामी में डूबे हुए।

उन्होंने आगे कहा, आज जब हम महेशतला की ओर बढ़ रहे थे, ताकि हम पर हमला झेल चुके हिंदुओं के साथ खड़े हो सकें, तो प्रशासन ने धारा 163 का हवाला देकर हमारा रास्ता रोक दिया और जब बाद में हम कालीघाट में मुख्यमंत्री के आवास पर उनकी चुप्पी और तुष्टिकरण की राजनीति पर सवाल उठाने के लिए गए, तो उनकी वफादार कोलकाता पुलिस हम पर इस तरह टूट पड़ी कि जैसे वे उनके निजी गुलाम हों-अपने मालिक की अंधी तरफदारी करते हुए। उन्होंने कहा, दिनदहाड़े हमारे नेताओं और बंगाल भाजपा के कार्यकर्ताओं को बेहयाई से गिरफ्तार किया गया। यह प्रशासनिक अत्याचार का नग्न प्रदर्शन है।






 
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