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सर्वे: वित्तीय फर्म की रिपोर्ट ने राहुल गांधी के एकाधिकार दावों को किया खारिज, कहा-फल-फूल रही अर्थव्यवस्था

Sun, 10 Nov 2024 04:51 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 10 Nov 2024 04:51 AM IST
सार

भारत की अर्थव्यवस्था संरचनात्मक सुधारों के कारण फल-फूल रही है। इससे सभी आकार के व्यवसायों के लिए एक जीवंत इकोसिस्टम बन रहा है। रणनीतिक सुधारों से छोटे स्टार्टअप और बड़े कारोबारी समूहों ने रफ्तार पकड़ी है। जिसको लेकर वित्तीय फर्म की रिपोर्ट ने राहुल गांधी के एकाधिकार के दावों को खारिज कर दिया है।  
 

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Financial firm's report refutes Rahul Gandhi's monopoly claims, says economy is flourishing
भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : amarujala

विस्तार

विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कारोबारी समूहों पर लगातार हमलों के बीच वित्तीय फर्म मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट ने उनके दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में रणनीतिक सुधारों के जरिये देश के छोटे स्टार्टअप से लेकर बड़े कारोबारी समूहों ने तेज प्रगति की है। सुधारों से प्रेरित भारत की वित्तीय यात्रा एक शक्तिशाली झलक पेश करती है।
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क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के मुताबिक, 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य सिर्फ एक दृष्टि नहीं है। यह एक ऐसा मार्ग है जिस पर हम पहले से ही चल रहे हैं। सभी आकार के कारोबारों को मजबूत बनाने के साथ भारत के भविष्य को आकार देने पर काम किया जा रहा है। रिपोर्ट में स्टार्टअप से लेकर लार्ज कैप तक सभी क्षेत्रों में समावेशी विकास को बताया गया है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार
भारत की अर्थव्यवस्था संरचनात्मक सुधारों के कारण फल-फूल रही है। इससे सभी आकार के व्यवसायों के लिए एक जीवंत इकोसिस्टम बन रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 तक कई बड़े निवेशकों के बीच प्राथमिक चिंता का एक विषय यह था कि इक्विटी में निवेश के लिए बहुत ही कम मौके उस समय भारत में थे। कम निवेश योग्य क्षेत्र, छोटे आकार की कंपनियां और अच्छी क्वालिटी वाले कम संख्या में लार्ज कैप शेयर थे। इसके साथ ही रिपोर्ट के मुताबिक, छोटी, मध्यम और बड़ी कंपनियों को समान  रूप से फलने-फूलने का अवसर भारत में मिल रहा है। इसके सामने राहुल गांधी की बयानबाजी गलत साबित हो जाती है।
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पांच वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था  में परिवर्तन
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पाँच वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया है। भारत के बाजार पूंजीकरण में तेज वृद्धि, कई क्षेत्रों और छोटी कंपनियों की व्यापक भागीदारी के साथ-साथ सभी क्षेत्रों में नए प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की लहर ने प्रभावी रूप से इनमें से कई चिंताओं को दूर कर दिया है।

देश में आज मेगा आकार की 11 कंपनियां
भारत में अब 11 मेगा आकार की कंपनियां हैं। इनमें से हर एक की बाजार पूंजी पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक है। 2014 में एक भी कंपनी इस आकार की नहीं थी। मिड-और लार्ज-कैप फर्मों में उछाल के साथ इक्विटी बाजार रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार पूंजी के मामले में भारत अब दूसरा सबसे बड़ा उभरता हुआ बाजार है। 2014 में 1.2 लाख करोड़ डॉलर की पूंजी अब बढ़कर पांच लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो गई है। 


वैश्विक हिस्सेदारी में इनमें 4.3% की वृद्धि हुई है  
निफ्टी 500 का फायदा जीडीपी के अनुपात में 15 साल के उच्च स्तर पर...पिछले एक, तीन, पांच और दस वर्षों में निफ्टी50 ने 27 फीसदी, 11 फीसदी,15 फीसदी, और 11 फीसदी चक्रवृद्धि दर से रिटर्न दिया है। इसके अतिरिक्त एनएसई 500 का जीडीपी के अनुपात में 20 फीसदी, 21 फीसदी 16 फीसदी और 11 फीसदी चक्रवृद्धि दर से मुनाफा बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024 में इनका फायदा जीडीपी के अनुपात में 15 साल के उच्च स्तर पर है।
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