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Paramilitary Forces: सरकार के पास नहीं है बहादुरी दिखाने वाले CAPF वीरों के लिए पैसा! नौ सालों में भी नहीं बढ़ी शौर्य राशि

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 30 May 2022 07:41 PM IST
सार

एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के मुताबिक, देश के विभिन्न हिस्सों में रोजाना कहीं न कहीं मुठभेड़ होती रहती है। सीएपीएफ जवानों ने तो ये नहीं कहा कि अब तो कोविड महामारी है, इसलिए वे 'ऑपरेशन' पर नहीं जाएंगे। योद्धाओं का भत्ता करोड़ों में तो था नहीं। मात्र 2,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 4,000 रुपये करने का आग्रह किया गया था...

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Finance Ministry said, honor amount for Police Medal for Gallantry in CAPF will not be increased yet
सीएपीएफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 'सीएपीएफ' के उन योद्धाओं की, जिन्होंने आतंकियों, माओवादियों, उत्तर पूर्व के उग्रवादियों व ऐसे ही दूसरे स्थानों पर विभिन्न ऑपरेशन के दौरान असीम बहादुरी दिखाई थी, शौर्य राशि बढ़ाने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास भेजा था। वित्त मंत्रालय ने जवाब दिया है कि सीएपीएफ में पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री (पीएमजी) हासिल करने वाले बहादुरों की सम्मान राशि अभी नहीं बढ़ाई जाएगी। इसके पीछे, कोविड-19 महामारी के चलते अभूतपूर्व वित्तीय तनाव रहने का तर्क दिया गया है। यही वजह रही कि वित्त मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों के वीरता पुरस्कार से सम्मानित योद्धाओं का भत्ता बढ़ाने का गृह मंत्रालय का प्रस्ताव खारिज कर दिया। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है, ये हैरानी वाली बात है कि 5 ट्रिलियन इकोनॉमी की तरफ बढ़ रहे देश में बहादुरी दिखाने वाले सीएपीएफ योद्धाओं के लिए पैसा नहीं है। 9 साल पहले ‘पीएमजी’ की राशि को 900 रुपये से बढ़ाकर दो हजार रुपये प्रतिमाह किया गया था।

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वित्त मंत्रालय ने हाथ खड़े किए

एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के मुताबिक, देश के विभिन्न हिस्सों में रोजाना कहीं न कहीं मुठभेड़ होती रहती है। सीएपीएफ जवानों ने तो ये नहीं कहा कि अब तो कोविड महामारी है, इसलिए वे 'ऑपरेशन' पर नहीं जाएंगे। योद्धाओं का भत्ता करोड़ों में तो था नहीं। मात्र 2,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 4,000 रुपये करने का आग्रह किया गया था। इसमें भी वित्त मंत्रालय ने हाथ खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन द्वारा इस बाबत वित्त मंत्रालय की घोर भर्त्सना की गई। रणबीर सिंह के मुताबिक, वित्त मंत्रालय के इस निर्णय में 'पीएमजी' को सेना, वायु सेना व नौसेना एवं सैना मैडल फॉर गैलेंट्री से कम आंका गया है। ये बहुत ही चिंतनीय विषय है। बहादुर जवानों द्वारा विशेष ऑपरेशनों में भाग लेने वाले महावीरों के शौर्य को तराजू में तोला जाना ठीक नहीं होगा। यहां केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के उन जवानों के शौर्य का जिक्र हो रहा है, जो आए दिन नक्सल प्रभावित इलाकों, नॉर्थ ईस्ट व कश्मीर घाटी में शहीद हो रहे हैं।

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मंत्रालय कर रहा है टालमटोल

महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, राष्ट्रपति के पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री व प्रधानमंत्री जीवन रक्षा पदकों की सम्मान राशि 2017 में क्रमश: तीन हजार से छह हजार रुपये व 600 से 1200 रुपये प्रतिमाह बढ़ा कर डबल कर दी गई थी। देश में '1923' पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री अवार्ड्स विजेता हैं। इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। 'पीएमजी' पदक से सम्मानित योद्धाओं को मिलने वाली सम्मान राशि को 2008 में 450 रुपये से बढाकर 900 रुपये व बाद में साल 2013 में इसे बढ़ाकर कर दो हजार रुपये कर दिया गया था। अब वित मंत्रालय की ऐसी क्या मजबूरी रही कि जो कोरोना महामारी का बहाना बनाकर व वित्तीय समस्या आड़े आने के नाम पर शौर्य पराक्रम राशि देने में टालमटोल किया जा रहा है। रणबीर सिंह कहते हैं, देश को पांच ट्रिलियन इकोनॉमी को ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रयास हो रहे हैं। दूसरी तरफ वित मंत्रालय अपने शौर्य पदक विजेताओं के पराक्रमी परिवारों को 5 करोड़ रुपये सम्मान राशि देने में आनाकानी व अनभिज्ञता प्रकट कर रहा है।

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