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वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले-जीएसटी गेमचेंजर, बदल जाएगी देश की तकदीर
amarujala.com-presented by:संदीप भट्ट
Updated Thu, 30 Mar 2017 10:38 AM IST
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी को देश के लिए गेमचेंजर बताते हुए दावा किया कि इसके कानूनी जामा पहनने से देश की अर्थव्यवस्था की तकदीर बदल जाएगी। जीएसटी से जुड़े चार बिलों सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और कॉम्पेनसेशन जीएसटी को एक साथ लोकसभा में पेश करते हुए जेटली ने कहा कि ‘एक देश और एक कर’ वक्त की जरूरत है।
इस बिल के लिए जरूरी कानूनी संशोधन पर बनी सहमति को देश के संघीय ढांचे के बीच खूबसूरत तालमेल का बड़ा उदाहरण करार दिया। उन्होंने चर्चा के बाद इस बिल पर आम सहमति बनने की भी उम्मीद जाहिर की।
चारों बिल को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बिल के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने के बाद राज्यों को कर के मद में होने वाले नुकसान की भरपाई की भी व्यवस्था की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि शुरुआती 5 वर्षों में जिन राज्यों को नुकसान होगा, उसकी भरपाई भी केंद्र सरकार करेगी।
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इस तरह होगा ढांचा
जीएटी प्रावधानों में खाने-पीने की जरूरी चीजों पर किसी तरह का कर लगाने की व्यवस्था नहीं है। इसका पहला स्लैब शून्य होगा, जबकि दूसरा स्लैब 5 फीसदी, तीसरा 12 फीसदी और 18 फीसदी का। लग्जरी कर स्लैब को भी कर और सेस के रूप में दो हिस्सों में बांटा गया है।
लग्जरी सामानों पर टैक्स घटेगा
लग्जरी सामानों पर कर की दर 40 से 65 फीसदी है। जीएसटी में इस मद में 28 फीसदी कर लिया जाएगा। बाकी के हिस्से का एक बफर स्टॉक बनेगा जिससे उन राज्यों की मदद होगी जिन्हें जीएसटी के कारण वित्तीय नुकसान झेलना होगा। उन्होंने कहा कि अगर बफर स्टॉक का फंड बच जाएगा तो इसका बंटवारा क्रेंद और राज्यों के बीच होगा।
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इस बिल के लिए जरूरी कानूनी संशोधन पर बनी सहमति को देश के संघीय ढांचे के बीच खूबसूरत तालमेल का बड़ा उदाहरण करार दिया। उन्होंने चर्चा के बाद इस बिल पर आम सहमति बनने की भी उम्मीद जाहिर की।
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चारों बिल को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बिल के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने के बाद राज्यों को कर के मद में होने वाले नुकसान की भरपाई की भी व्यवस्था की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि शुरुआती 5 वर्षों में जिन राज्यों को नुकसान होगा, उसकी भरपाई भी केंद्र सरकार करेगी।
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इस तरह होगा ढांचा
जीएटी प्रावधानों में खाने-पीने की जरूरी चीजों पर किसी तरह का कर लगाने की व्यवस्था नहीं है। इसका पहला स्लैब शून्य होगा, जबकि दूसरा स्लैब 5 फीसदी, तीसरा 12 फीसदी और 18 फीसदी का। लग्जरी कर स्लैब को भी कर और सेस के रूप में दो हिस्सों में बांटा गया है।
लग्जरी सामानों पर टैक्स घटेगा
लग्जरी सामानों पर कर की दर 40 से 65 फीसदी है। जीएसटी में इस मद में 28 फीसदी कर लिया जाएगा। बाकी के हिस्से का एक बफर स्टॉक बनेगा जिससे उन राज्यों की मदद होगी जिन्हें जीएसटी के कारण वित्तीय नुकसान झेलना होगा। उन्होंने कहा कि अगर बफर स्टॉक का फंड बच जाएगा तो इसका बंटवारा क्रेंद और राज्यों के बीच होगा।