कोरोना से जंग: देश में 60 फीसदी स्वास्थ्य सेवा 'निजी' हाथों में, लेकिन महामारी में सरकारी अस्पतालों ने उठाया बोझ
वित्त आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के रिक्त स्थान को भरने में विफल रहा है। कोविड महामारी ने इस तथ्य को और अधिक उजागर किया है कि स्वास्थ्य को एक ऐसी सेवा माना जाए, जिसके लिए सार्वजनिक वित्तपोषण आवश्यक है...
विस्तार
देश में जिस तेजी से कोरोना संक्रमण फैला है, वैसे ही स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के सामने नई चुनौतियां पेश हो रही हैं। देश में 60 फीसदी से ज्यादा स्वास्थ्य सेवा 'निजी' हाथों में है, मगर कोरोनाकाल में 'सरकारी' अस्पतालों ने गैर-आनुपातिक रूप से बड़ा बोझ उठाया है। वित्त आयोग 'कोविड के दौर में' 2021-26 के लिए जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के रिक्त स्थान को भरने में विफल रहा है। कोविड महामारी ने इस तथ्य को और अधिक उजागर किया है कि स्वास्थ्य को एक ऐसी सेवा माना जाए, जिसके लिए सार्वजनिक वित्तपोषण आवश्यक है। यही वजह है कि स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की व्यवस्था को केवल बाजार की व्यवस्था पर नहीं छोड़ा जा सकता।
जरूरी मेडिकल वस्तुओं को मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में देश के अनेक हिस्सों में आईसीयू बेड, दवा और ऑक्सीजन को लेकर मारामारी चल रही है। अनेक राज्यों में लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं। इसी बीच कई लोग 'आपदा में अवसर' को सही मानकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। दवा, आईसीयू बेड और ऑक्सीजन दिलाने के नाम पर लोगों के साथ ठगी हो रही है। जरूरी मेडिकल वस्तुओं को मनमाने दाम पर बेचा जा रहा है। किसी ने ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बुक कराया तो उसके साथ ठगी हो गई। निर्धारित कीमत से दस गुना दाम पर स्वास्थ्य उपकरण बेचे जा रहे हैं।
Delhi Police working overtime to check financial fraud by gangs located thousands of kms away. Over 100 culprits arrested in 113 cases. 3 fraudulent transactions involving Rs 2,28,890/- blocked preventing transfer of money through multiple-agency platform @HMOIndia @PMOIndia— CP Delhi #DilKiPolice (@CPDelhi) May 4, 2021
दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव के ट्वीट के अनुसार, ऐसी कई शिकायतें आ रही हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ दर्जनों एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। यदि कोई एंबुलेंस चालक अतिरिक्त किराया वसूल रहा है तो उसके खिलाफ तुरंत शिकायत दें। दिल्ली पुलिस ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करेगी। ऑक्सीजन सिलेंडर देने के नाम पर ठगी करने वाले 100 से अधिक अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं। इन 113 केसों में तीन ऐसी ट्रांजेक्शन भी हैं, जिनमें 2,28,890 रुपये की ठगी सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने तुरंत मल्टीपल एजेंसी प्लेटफॉर्म की मदद से अकाउंट्स को ब्लॉक कराया है। पीड़ितों से कहा गया था कि वे ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए बैंक में आईएफएससी कोड के जरिए रकम जमा करा दें। इस मामले में दो सौ मोबाइल फोन, 95 बैंक अकाउंट्स, 33 यूटीएस और 17 यूपीआई/वॉलेट को भी ब्लॉक कराया गया है। पुलिस आयुक्त ने कहा, हैरानी की बात नहीं है कि इस तरह के केसों की संख्या काफी बढ़ सकती है। मध्यप्रदेश में कालाबाजारी करने वालों पर 'एनएसए' लगाया गया है। दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई की गई है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती के लिए निवेश जरूरी
वित्त आयोग की रिपोर्ट में लिखा है, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और इसके कवरेज में लगातार जो असमानताएं उत्पन्न हो रही हैं, वह भारत की मानव पूंजी निर्माण और स्वास्थ्य सूचकांकों में प्रगति के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है। बाजार, स्वास्थ्य देखभाल सेवा में व्याप्त व्यापक क्षेत्रीय असमानताओं का समाधान कर पाने में सक्षम नहीं है। कोविड-19 ने यह दर्शाया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता है। अतिरिक्त वित्तपोषण के बिना, स्वास्थ्य प्रणाली न केवल प्रकोपों/आपदाओं से निपटने में विफल होगी, बल्कि अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में भी अप्रभावी रहेगी।
महामारी ने इस तथ्य को उजागर किया है कि इस तरह के संकट का समाधान करने के लिए आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया कमजोर थी। सभी स्तरों पर सीमित प्रयोगशाला क्षमता का अर्थ यह रहा कि परीक्षण, मामले का पता लगाने, निगरानी और प्रकोप प्रबंधन के कार्यों में समझौता किया गया है। इसके अलावा क्रिटिकल केयर व्यवस्था की सुविधाओं में पर्याप्त आईसीयू, आईसोलेशन बेड, ऑक्सीजन की आपूर्ति और वेंटिलेटर का अभाव था। महामारी पर नियंत्रण के लिए जिला एवं उप जिला सेवा केंद्रों को मजबूत करने के लिए काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है। क्रिटिकल केयर अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में निवेश करने की तत्काल आवश्यकता है।
केरल ने खुद को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है...
रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि केरल ने कोरोना आपदा में खुद को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है। इस राज्य में स्थानीय शासन और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मचारी, स्वास्थ्य सेवा प्रभावी रूप से प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केरल मॉडल का अनुकरण अन्य राज्यों में भी किया जाना चाहिए। इसी आधार पर वित्त आयोग ने शहरी स्वास्थ्य आरोग्य केंद्र, भवन रहित उप केंद्र, पीएचसी, सीएचसी, नैदानिक अवसंरचना के लिए सहायता देने, ब्लॉक स्तर की लोक स्वास्थ्य इकाइयों, ग्रामीण उप केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्वास्थ्य आरोग्य केंद्रों में परिवर्तित करने के लिए कुल मिलाकर 70051 करोड़ रुपये का स्वास्थ्य अनुदान देने की अनुशंसा की है।
इनमें शहरी स्वास्थ्य आरोग्य केंद्र के लिए 24028 करोड़, भवन रहित उपकेंद्र, पीएचसी व सीएचसी के लिए 7167 करोड़, ब्लॉक स्तर पर लोक स्वास्थ्य इकाई को 5279 करोड़, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधा के लिए नैदानिक अवसंरचना सहायता पर 18472 करोड़ और ग्रामीण उप केंद्रों और पीएचसी के स्वास्थ्य आरोग्य केंद्र में परिवर्तन के लिए 15105 करोड़ रुपये शामिल हैं। बीस लाख से ज्यादा आबादी वाले जिलों में सौ बेड वाला क्रिटिकल केयर अस्पताल और बीस लाख से कम आबादी वाले जिलों के लिए पचास बेड वाले अस्पताल का निर्माण किया जाएगा। क्रिटिकल केयर अस्पतालों के लिए 15265 करोड़ रुपये की अनुशंसा की गई है। सौ बेड वाला अस्पताल 53 करोड़ रुपये और पचास बेड वाले अस्पताल पर 28 करोड़ रुपये की पूंजी लागत आने का अनुमान है। वित्त आयोग द्वारा स्वास्थ्य श्रमशक्तियों के प्रशिक्षण के लिए 13296 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की सिफारिश की गई है।
वित्त आयोग ने स्वास्थ्य व्यय बजट को बढ़ाने की बात कही है ...
- यह अनुशंसा की गई कि 2022 तक राज्यों द्वारा स्वास्थ्य पर किए जाने वाले व्यय को उनके बजट के आठ फीसदी से अधिक बढ़ाया जाए।
- प्राथमिक स्वास्थ्य व्यय को 2022 तक कुल स्वास्थ्य व्यय के दो तिहाई तक बढ़ाया जाए
- चिकित्सकों की उपलब्धता में अंतर-राज्य असमानता को खत्म करना होगा
- इसके लिए अखिल भारतीय चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा का गठन करना जरुरी है
- राज्यों की सिफारिश पर यूपीएससी द्वारा डॉक्टरों की वार्षिक भर्ती की जाएगी
- एमबीबीएस पाठ्यक्रम का पुनर्गठन किया जाना चाहिए, ताकि इसे सक्षमता आधारित बनाया जा सके।
- विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए जिला अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए 2725 करोड़ रुपये की अनुशंसा की गई है
- चिकित्सक बनने के इच्छुक कई छात्र विदेश में आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में प्रवेश लेने का विकल्प चुनते हैं। ऐसे छात्रों की संख्या 2015 में 3438 से बढ़कर 2019 में 12321 हो गई है।
- स्वास्थ्य के मौजूदा मानव संसाधन की अनुपूर्ति के लिए देश की स्वास्थ्य प्रणाली में इन विदेशी चिकित्सा डिग्री धारकों का उपयोग करने की आवश्यकता है
- उनके ज्ञान को बेहतर बनाने के लिए एक कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजाइन किया जा सकता है
- आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों के असम्मित वितरण को ठीक करने की आवश्यकता है। ये अधिकांश भारत के पश्चिमी और दक्षिणी भागों में स्थित हैं