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IAF: स्वदेशीकरण के जरिए ताकत बढ़ाएगी वायु सेना, तीन लाख करोड़ से अधिक लागत की परियोजनाओं पर चल रहा काम
Mon, 02 Oct 2023 10:49 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 02 Oct 2023 10:49 PM IST
सार
स्वदेशी उपकरणों के जरिए भारतीय वायु सेना अपनी ताकत बढ़ा रही है। जिसमें फाइटर जेट, जासूसी विमान, हेलिकॉप्टर और मिसाइलें शामिल हैं। ये सभी आने वाले समय में भारत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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स्वदेशीकरण की राह पर भारतीय वायुसेना
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय वायु सेना भी अब स्वदेशीकरण को बढ़ावा दे रही है। वायुसेना ने जिसके तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण परियोजनाएं शुरु कर रही है। एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी के नेतृत्व में एक दल 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत कार्य कर रहा है। 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की स्वदेशी परियोजनाओं की मेगा सूची में फाइटर जेट, जासूसी विमान, हेलिकॉप्टर और मिसाइलें शामिल हैं। ये सभी आने वाले समय में वायु सेना की सेवा का एक बड़ा हिस्सा होंगे।
स्वदेशीकरण की राह पर भारतीय वायुसेना
भारत में निर्मित स्वदेशी परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों ने कहा, वायु सेना को 180 एलसीए मार्क 1ए विमान मिल रहे हैं, जिसके लिए 83 विमानों के पहले अनुबंध पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। जबकि शेष 97 विमानों के लिए परियोजना शुरू की गई है। लड़ाकू विमान क्षेत्र में, भारतीय वायु सेना 65,000 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत Su-30MKI लड़ाकू जेट बेड़े को अपग्रेड करने के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम शुरू कर रही है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारतीय वायु सेना की एक संयुक्त टीम द्वारा स्वदेशी रडार, एवियोनिक्स और विमान पर सुसज्जित हथियारों के साथ संचालित की जाएगी। इस परियोजना को रक्षा मंत्रालय में स्थानांतरित किया जा रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पर उच्च स्तर पर चर्चा होगी।
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स्वदेशीकरण की राह पर भारतीय वायुसेना
भारत में निर्मित स्वदेशी परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों ने कहा, वायु सेना को 180 एलसीए मार्क 1ए विमान मिल रहे हैं, जिसके लिए 83 विमानों के पहले अनुबंध पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। जबकि शेष 97 विमानों के लिए परियोजना शुरू की गई है। लड़ाकू विमान क्षेत्र में, भारतीय वायु सेना 65,000 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत Su-30MKI लड़ाकू जेट बेड़े को अपग्रेड करने के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम शुरू कर रही है।
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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारतीय वायु सेना की एक संयुक्त टीम द्वारा स्वदेशी रडार, एवियोनिक्स और विमान पर सुसज्जित हथियारों के साथ संचालित की जाएगी। इस परियोजना को रक्षा मंत्रालय में स्थानांतरित किया जा रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पर उच्च स्तर पर चर्चा होगी।
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भारतीय वायु सेना
- फोटो : ANI
युद्धक्षेत्र में पारदर्शिता और सटीक जागरुकता होगी हासिल
खुफिया, निगरानी, लक्ष्य प्राप्ति विमान भारतीय वायुसेना को युद्धक्षेत्र में पारदर्शिता और सटीक जागरूकता हासिल करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण से लैस होगा। भारतीय वायु सेना को मारक क्षमता के मामले में बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। IAF 156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्राप्त करने वाली प्रमुख एजेंसी है, जिसके लिए सेनाएं लगभग 45,000 करोड़ रुपये खर्च करने पर विचार कर रही हैं।
खुफिया, निगरानी, लक्ष्य प्राप्ति विमान भारतीय वायुसेना को युद्धक्षेत्र में पारदर्शिता और सटीक जागरूकता हासिल करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण से लैस होगा। भारतीय वायु सेना को मारक क्षमता के मामले में बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। IAF 156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्राप्त करने वाली प्रमुख एजेंसी है, जिसके लिए सेनाएं लगभग 45,000 करोड़ रुपये खर्च करने पर विचार कर रही हैं।
भारतीय वायुसेना
- फोटो : ANI
प्रोजेक्ट कुशा के जरिए मजबूत हुई भारतीय वायु सेना
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय वायु सेना के प्रोजेक्ट कुशा को मंजूरी दे दी है। जिसके तहत उसे लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआर-एसएएम) की पांच इकाईयां मिलने जा रही हैं। वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली, जिसके तीन स्क्वाड्रन पहले ही सेवा में शामिल किए जा चुके हैं।
भारतीय वायु सेना भी अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्लोज इन वेपन सिस्टम्स के लिए 7500 रुपये से अधिक की कोर परियोजना के लिए अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है और इसके लिए निजी क्षेत्र के उद्योग द्वारा निर्माण किया जा रहा है।
डीआरडीओ 'प्रलय' बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन पर भी काम कर रहा है जिनका उपयोग भारतीय वायुसेना द्वारा पारंपरिक भूमिकाओं और हथियारों में किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय वायु सेना के प्रोजेक्ट कुशा को मंजूरी दे दी है। जिसके तहत उसे लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एलआर-एसएएम) की पांच इकाईयां मिलने जा रही हैं। वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली, जिसके तीन स्क्वाड्रन पहले ही सेवा में शामिल किए जा चुके हैं।
भारतीय वायु सेना भी अपनी महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्लोज इन वेपन सिस्टम्स के लिए 7500 रुपये से अधिक की कोर परियोजना के लिए अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है और इसके लिए निजी क्षेत्र के उद्योग द्वारा निर्माण किया जा रहा है।
डीआरडीओ 'प्रलय' बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन पर भी काम कर रहा है जिनका उपयोग भारतीय वायुसेना द्वारा पारंपरिक भूमिकाओं और हथियारों में किया जाएगा।