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विपक्ष में छिड़ी नेतृत्व की लड़ाई, ममता की विपक्षी एकता रैली से राहुल व मायावती रहेंगे दूर

Fri, 18 Jan 2019 06:05 AM IST
रचना शर्मा शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली Published by: रचना शर्मा Updated Fri, 18 Jan 2019 06:05 AM IST
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Fight of leadership in opposition, Rahul and Mayawati will not attend rally of Mamta Banerjee
ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच अभी से ही नेतृत्व की लड़ाई छिड़ गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान पर एक रैली आयोजित कर रही हैं जो उनके अनुसार देश में आज तक आयोजित रैलियों से कहीं ज्यादा बड़ी होगी। इस रैली के जरिए ममता खुद को संयुक्त विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर स्थापित करना चाहती हैं। संभवतया यही वजह है कि विपक्ष के दो ऐसे नेताओं ने रैली से किनारा कर लिया है जो स्वयं को प्रधानमंत्री पद का दावेदार मानते हैं। 

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ममता बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बसपा अध्यक्ष मायावती को रैली को संबोधित करने का आमंत्रित किया था लेकिन उन्होंने खुद कोलकाता जाने के बजाय अपना प्रतिनिधि भेजना तय किया है। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी के प्रतिनिधि होंगे, वहीं मायावती ने अपनी जगह बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को भेजना तय किया है।
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कोलकाता के राजनैतिक प्रेक्षकों का मानना है अभी तक की सबसे बड़ी रैली 90 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री और माकपा नेता ज्योति बसु ने परेड ग्राउंड पर संबोधित की थी। ममता बनर्जी उसका रिकॉर्ड तोड़ना चाहती हैं। उनका अनुमान है कि रैली में सात से आठ लाख लोग आएंगे। तृणमूल कांग्रेस ने आठ लाख लोगों के रैली में आने, खाने और रहने के इंतजाम किए हैं। 
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रैली में भाग लेने के लिये पार्टी कार्यकर्ताओं ने बुधवार से ही कोलकाता में पहुंचना शुरू कर दिया। सूत्रों के अनुसार पार्टी ने बृहस्पतिवार को ही एक लाख लोगों के खाने और ठहरने के प्रवंध किए हैं। इस रैली में देश के गैर एनडीए दलों में से लगभग सभी के शीर्ष नेताओं को आमंत्रित किया गया है। तृणमूल पार्टी के सूत्रों के अनुसार 19 दलों के नेताओं ने भाग लेने की स्वीकृति दे दी है।

ये संबोधित करेंगे रैली को

ममता बनर्जी के अलावा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के नेता अरविंद केजरीवाल, डीएमके अध्यक्ष स्टालिन, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, जेएमएम के हेमंत सोरेन, जेवीएम के बाबूलाल मरांडी, हम के अध्यक्ष जीतनराम मांझी, नेशनल कांफ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला, मोदी सरकार से हाल ही में इस्तीफा दे चुके रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व विदेश और वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, पाटीदार आंदोलन समिति के हार्दिक पटेल, प्रख्यात पत्रकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी भी रैली के संबोधित करेंगे।

ये दल रहेंगे अनुपस्थित

आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल को निमंत्रण नहीं भेजा गया है। जबकि बीजू जनता दल अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी के रैली से अनुपस्थित रहने की संभावना है। टीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को भी न्योता भेजा गया है लेकिन अभी तक उन्होंने स्वीकृति नहीं दी है।

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