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किशोर चौकर को समूह के बोर्ड में निदेशक बनाने के लिए किर्लोस्कर परिवार में जंग

Tue, 29 Sep 2020 07:43 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 29 Sep 2020 07:43 AM IST
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Fight in Kirloskar family to make Kishore Chaukar director on group board
केबीएल - फोटो : PTI

132 साल पुराने कारोबारी समूह किर्लोस्कर ग्रुप के तीनों मालिकों का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। समूह के बोर्ड में बतौर निदेशक किशोर चौकर की नियुक्ति को लेकर फिर जंग छिड़ गई है। 25 सितंबर को हुई कंपनी की सालाना बैठक में चौकर को जरूरी 75 फीसदी वोट नहीं मिल सके।

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75 फीसदी वोट चाहिए थे शेयरधारकों से नियुक्ति के लिए
किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड (केबीएल) में स्वतंत्र निदेशक पद पर किशोर चौकर की नियुक्ति के लिए शेयरधारकों से 75 फीसदी वोट चाहिए थे। सालाना महासभा में उन्हें सिर्फ 65.66 फीसदी शेयरधारकों ने ही वोट दिए, जबकि 34.34 फीसदी शेयरधारकों ने नियुक्ति का विरोध किया। खास बात यह रही कि विरोध में पड़े अधिकतर वोट प्रवर्तकों और उनसे जुड़े शेयरधारकों के थे। इससे तीनों किर्लोस्कर बंधुओं में छिड़ी जंग एक बार फिर तेज हो गई है।
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अभी केबीएल को संजय किर्लोस्कर चलाते हैं, जबकि अतुल और राहुल किलोस्कर की कंपनी के मालिकाना हक में 23.91 फीसदी हिस्सेदारी है। चौकर 2015 से ही केबीएल में स्वतंत्र निदेशक थे, लेकिन अप्रैल में कार्यकाल खत्म होने के बाद उनकी दोबारा नियुक्ति की जानी थी।
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विरोध में हैं अतुल और राहुल
केबीएल के प्रवक्ता ने बताया कि शेयरधारकों को यह नियुक्ति कंपनी के हित में नहीं लगी, इसलिए उन्होंने विरोध किया। राहुल और अतुल के अलावा उनके परिवार के सभी सदस्यों ने भी नियुक्ति के खिलाफ वोट किया है। उनका मानना है कि चौकर के स्वतंत्र रूप से काम करने पर संदेह है। चौकर के अलावा एमडी-सीईओ पद पर एमएस उन्नीकृष्णन की नियुक्ति के खिलाफ भी शेयरधारकों ने वोट किया है। यहां पक्ष और विरोध में बराबर वोट पड़े जिससे नियुक्ति नहीं हो सकी।


11 साल से विवाद... अब एनसीएलटी पहुंचा मामला
अतुल और राहुल ने नियुक्ति विवाद को लेकर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच में अपील की है। दरअसल, 2009 में तीनों किर्लोस्कर बंधुओं के बीच समझौते के तहत एक डीड बनी थी। इसकी शर्तें पसंद नहीं आने के बाद से ही विवाद जारी है। करार में पहली दरार एक साल बाद 2010 में ही दिख गई जब अतुल, राहुल और उनके एसोसिएट ने केबीएल की 13.5 फीसदी हिस्सेदारी किर्लोस्कर इंडस्ट्रीज को बेच दी। यह दोनों समूह की सूचीबद्ध कंपनियां हैं। बाजार नियामक सेबी कंपनी बेचने के मामले की जांच कर रहा है, क्योंकि इसमें भेदिया कारोबार के आरोप लगे हैं

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