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Supreme Court: देश के मौजूदा 51 मौजूदा-पूर्व सांसदों पर मनी लॉन्ड्रिंग के केस, 71 MLA-MLC पर भी PMLA के मुकदमे

Tue, 15 Nov 2022 04:20 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 15 Nov 2022 04:20 PM IST
सार

अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 71 विधानसभा सदस्य (विधायक) और विधान परिषद के सदस्य (विधान पार्षद) भी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत मामलों के आरोपी हैं।

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fifty one former and sitting MPs face trial under PMLA SC told
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 51 पूर्व और मौजूदा सांसद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के मामलों सामना कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है कि इनमें से कितने वर्तमान और संसद के पूर्व सदस्य (सांसद) हैं। 

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वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया को सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटान के लिए न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया गया है। उन्होंने इस संबंध में शीर्ष अदालत को सूचित किया। 
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71 विधायक और विधान परिषद सदस्य भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी
अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 71 विधानसभा सदस्य (विधायक) और विधान परिषद के सदस्य (विधान पार्षद) भी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत मामलों के आरोपी हैं। स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किए गए 121 मामले पूर्व व मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित हैं। 
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अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर की गई है याचिका
दरअसल, शीर्ष अदालत में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से याचिका दायर की गई थी। इसमें सांसदों के खिलाफ मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत भी समय-समय पर अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सीबीआई और अन्य एजेंसियों को शीघ्र जांच सुनिश्चित करने के निर्देश देती रही है। 

पांच साल से भी ज्यादा समय से लंबित हैं आपराधिक मामले
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने शीर्ष अदालत को बताया था कि निर्देशों को नियमित निगरानी के बावजूद सांसदों और विधायकों के खिलाफ बड़ी संख्या में आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से कई पांच साल से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। 


उच्च न्यायालयों को भी दिया था विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश
शीर्ष अदालत ने पहले सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया था कि वह सांसदों और विधायकों के खिलाफ पांच साल से ज्यादा समय से लंबित आपराधिक मामलों और उनके शीघ्र निपटान के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी प्रस्तुत करे। 


अदालत ने दिया था न्यायिक अधिकारियों को न बदलने का आदेश
उच्चतम न्यायालय ने अपने 10 अगस्त, 2021 के आदेश को भी संशोधित किया था। इसमें कहा गया था कि कानून निर्माताओं के खिलाफ मामलों की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारियों को अदालत की अनुमति के बिना नहीं बदला जाना चाहिए। 

 
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