{"_id":"57241a3b4f1c1b3969a91da4","slug":"fifth-phase-of-voting-in-west-bengal-assembly-election","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बंगाल में पांचवें चरण का मतदान जारी, पार्टी कार्यकर्ता आपस में भिड़े","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
बंगाल में पांचवें चरण का मतदान जारी, पार्टी कार्यकर्ता आपस में भिड़े
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोलकाता
Updated Sat, 30 Apr 2016 11:41 AM IST
विज्ञापन
बंगाल चुनाव में आपस में भिड़े पार्टियों के कार्यकर्ता
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य में विधानसभा चुनाव के पांचवें दौर में शनिवार को महानगर के अलावा दक्षिण 24-परगना और हुगली जिले की 53 सीटों के लिए मतदान शुरू हो गया है। अरमबाग और हुगली में टीएमसी और सीपीआईएम कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई है। सीपीआईएम का आरोप है कि टीएमसी कार्यकर्ता लोगों को वोट न करने की धमकी दे रहे थे। इस झड़प में एक सीपीआईएम कार्यकर्ता घायल हो गया है।
विज्ञापन
इस दौर की प्रमुख सीटों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट शामिल है। वहां ममता का मुकाबला कांग्रेस-वाम गठजोड़ की उम्मीदवार दीपा दासमुंशी और भाजपा के चंद्र कुमार बोस से है। इन तीन जिलों में सुरक्षा बल के 90 हजार जवानों को तैनात किया गया है। सुबह 11 बजे तक के चुनाव में 38.15 फीसदी वोटिंग हो चुकी है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा इस दौर में उनके मंत्रिमंडल के आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों की किस्मत का फैसला भी होना है। इन 53 सीटों में से चार दक्षिण कोलकाता में, 18 हुगली में, 31 सीटें दक्षिण 24-परगना जिले में हैं। 43 महिलाओं समेत कुल 339 उम्मीदवार इस दौर में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसमें शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी, शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम और कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी भी शामिल हैं।
विज्ञापन
इस दौर में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जबकि, माकपा 31 और कांग्रेस 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। लगभग 1.24 करोड़ मतदाता इस दौर के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस दौर के मतदान से पहले कांग्रेस-वाम गठजोड़ की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और सीताराम येचुरी ने चुनाव प्रचार किया। अमित शाह भी भवानीपुर में एक रैली को संबोधित कर चुके हैं। आयोग ने दक्षिण कोलकाता के 1605, दक्षिण 24-परगना के 2,685 और हुगली के 1008 मतदान केंद्रों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है।
कई सवालों का जवाब देगा पांचवें दौर का मतदान
बंगाल में पांचवें चरण का मतदान जारी
- फोटो : ANI
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का पांचवां दौर कई सवालों के जवाब देगा। इस दौर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की साख दांव पर है। इसी दौर में उनके चुनाव क्षेत्र भवानीपुर में भी मतदान होना है। नारदा न्यूज के स्टिंग वीडियो में नजर आने वाले पार्टी के चार नेताओं की किस्मत का फैसला भी यही दौर करेगा। इसके अलावा इसी दौर में हुगली जिले की उस सिंगुर सीट पर भी वोट पड़ेंगे, जहां जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया था। यही नहीं, शनिवार को जिन 53 सीटों पर मतदान होगा, उनमें से पिछले चुनाव में तृणमूल ने 46 सीटें जीती थीं। दीदी की सबसे बड़ी चुनौती उन सीटों पर कब्जा बरकरार रखना है।
इस दौर में हुगली जिले की 18 सीटों पर मतदान होना है। पिछली बार लखटकिया नैनो की लहर पर सवार होकर तृणमूल ने इनमें से 16 सीटें जीती थीं। यह मतदान इस सवाल का भी जवाब देगा कि क्या पांच साल बाद भी जिले के मतदाताओं का दीदी और उनकी पार्टी पर उतना ही भरोसा है। 2011 में वाम मोर्चा को इनमें से महज छह सीटें मिली थीं। तृणमूल कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर मैदान में उतरी कांग्रेस का तब इन सीटों पर खाता तक नहीं खुल सका था।
इसी दौर में इस सवाल का भी जवाब मिलेगा कि क्या सहयोगी बदलने से कांग्रेस की किस्मत चमकेगी। अब की विपक्षी दलों ने शारदा चिटफंड घोटाले के अलावा नारद न्यूज स्टिंग वीडियो को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। इसी दौर से इस सवाल का भी जवाब मिलेगा वोटरों के नजर में यह स्टिंग ऑपरेशन सही था या नहीं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि शहरी वोटरों में नारद स्टिंग का असर तय मान कर ही ममता ने बचाव की रणनीति अपना ली है।
(रीता तिवारी की रिपोर्ट)
इस दौर में हुगली जिले की 18 सीटों पर मतदान होना है। पिछली बार लखटकिया नैनो की लहर पर सवार होकर तृणमूल ने इनमें से 16 सीटें जीती थीं। यह मतदान इस सवाल का भी जवाब देगा कि क्या पांच साल बाद भी जिले के मतदाताओं का दीदी और उनकी पार्टी पर उतना ही भरोसा है। 2011 में वाम मोर्चा को इनमें से महज छह सीटें मिली थीं। तृणमूल कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर मैदान में उतरी कांग्रेस का तब इन सीटों पर खाता तक नहीं खुल सका था।
इसी दौर में इस सवाल का भी जवाब मिलेगा कि क्या सहयोगी बदलने से कांग्रेस की किस्मत चमकेगी। अब की विपक्षी दलों ने शारदा चिटफंड घोटाले के अलावा नारद न्यूज स्टिंग वीडियो को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया है। इसी दौर से इस सवाल का भी जवाब मिलेगा वोटरों के नजर में यह स्टिंग ऑपरेशन सही था या नहीं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि शहरी वोटरों में नारद स्टिंग का असर तय मान कर ही ममता ने बचाव की रणनीति अपना ली है।
(रीता तिवारी की रिपोर्ट)