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रेलवे ने कसी कमर: देश में कोयले की तरह नहीं होगा उर्वरक का संकट, बढ़ती मांग को देख रेलवे ने बढ़ाई मालगाड़ियां
Wed, 27 Oct 2021 02:11 PM IST
मुकेश कुमार झा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Wed, 27 Oct 2021 02:11 PM IST
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मालगाड़ी
- फोटो : सोशल मीडिया।
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देशभर में इन दिनों उर्वरक की मांग अचानक से बढ़ने लगी है। इसी को देखते हुए भारतीय रेलवे ने उर्वरक की सप्लाई के लिए मालगाड़ियों की रेक बढ़ाने का फैसला लिया है। अब देशभर में उर्वरक की ढुलाई 40 की जगह 60 मालगाड़ियों से होगी। अक्टूबर 2021 में रेलवे ने 39 रेक घरेलू उर्वरक की हर रोज ढुलाई की है। जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 36 रेक था।
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रेलवे ने सोमवार को 1,838 वैगन उर्वरक की ढुलाई की थी। जबकि पिछले साल 25 अक्टूबर को यह आंकड़ा 1,575 वैगन था। रेलवे ही मूल रूप से देशभर में फर्टीलाइजर्स ट्रांसपोर्ट करता है। वो हर महीने के लिए फर्टीलाइजर्स मूवमेंट प्लान बनाता है और राज्यों तक पहुंचाता है। फिर इसे जिला स्तर पर भेजा जाता है।
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देश में इन दिनों आयायित उर्वरक की ढुलाई में कमी देखी जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ दुनियाभर में उर्वरक की कीमतों में बढोत्तरी देखी जा रही है। कई बंदरगाहों में पर शिप का वेटिंग टाइम भी बढ़ गया हैं। इन सभी वजहों को आयात किए जाने वाले उर्वरक की सप्लाई पर असर पड़ा है। भारत 4.2 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक तैयार करता है, जबकि 1.4 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक आयात करता है। भारत घरेलू उर्वरक में सबसे ज़्यादा 3.8 करोड़ टन यूरिया और काम्प्लेक्स फर्टीलाइजर का उत्पादन करता है। इसका उत्पादन नेचुरल गैस की उपलब्धता और आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर निर्भर रहता है।
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इन कारणों से बढ़ी अचानक उर्वरक की मांग
देश में डीएपी और यूरिया के दाम निश्चित होते है। इसलिए किसान अपनी जरुरत को देखते हुए इसे खरीदीते है। उर्वरक का उत्पादन करने वाली कंपनियों के सामने समस्या ये होती है कि वो लाखों टन उर्वरक तैयार कर अपने पास नहीं रख सकतीं। ऐसे में इसे लगातार बाजार तक पहुंचाया जाता है। जब इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है तो समस्या शुरू हो जाती है। किसान पहले से खरीदारी इसलिए नहीं करते कि उन्हें पता है कि इसकी कीमत नहीं बढ़ने वाली। जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष कोरोना लॉकडाउन की वजह से देशभर में उर्वरक की मांग कम थी। इस वर्ष कई राज्यों में अच्छी बारिश की वजह से भी ज्यादा पैदावर की संभावना हैं। जिससे उर्वरक की मांग बढ़ा दी है।
गौरतलब है कि, अक्टूबर में देशभर में तापीय बिजली घरों में कोयले की कमी हो गई थी। जिसके बाद रेलवे ने युद्धस्तर पर राज्यों में कोयले का सप्लाई की। उम्मीद है कि उर्वरक की ढुलाई भी अब इसी तरह शुरू की जाएगी ताकि मांग और आपूर्ति के अंतर को खत्म किया जा सके।