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Feb 2020 Delhi Riots: उमर खालिद ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, खारिज हुई थी जमानत याचिका
Wed, 10 Sep 2025 04:18 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 10 Sep 2025 04:18 PM IST
सार
Feb 2020 Delhi Riots: कार्यकर्ता उमर खालिद ने दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जमानत न मिलने पर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन और आंदोलन के नाम पर की गई हिंसा की अनुमति नहीं दी जा सकती। खालिद सहित नौ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं थी।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
कार्यकर्ता उमर खालिद ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हाईकोर्ट ने फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों की साजिश के मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो सितंबर को उमर खालिद और शरजील इमाम सहित नौ लोगों को जमानत देने से इनकार किया था। कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन या विरोध के नाम पर हिंसा के लिए साजिश रचने की अनुमति नहीं दी जा सकती। खालिद और इमाम के अलावा जिन लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज हुईं, उनमें मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद शामिल हैं। एक और आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका भी दो सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट की दूसरी बेंच ने खारिज कर दी थी।
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शरजील और गुलफिशा ने भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती
पिछले हफ्ते शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा ने भी हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान नागरिकों को प्रदर्शन और आंदोलन करने का अधिकार देता है, लेकिन यह तभी तक मान्य है, जब तक वह शांतिपूर्ण, संयमित और बिना हथियारों के हो। ऐसा कोई भी प्रदर्शन कानून के दायरे में होना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक बैठकों में भाषण देना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत एक मौलिक अधिकार है और इसे पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है। लेकिन यह अधिकार पूरी तरह से मुक्त नहीं है और इस पर उचित सीमाएं लगाई जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर लोगों को बिना किसी सीमा के प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार दे दिया जाए, तो इससे सांविधानिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा और देश की कानून-व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
ये भी पढ़ें: 12 साल से जेल में बंद आरोपी को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत, ट्रायल में देरी पर जताई नाराजगी
सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़के थे दंगे
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य सभी आरोपियों पर यूएपीए और भारतीय दंज संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज है। इन पर आरोप है कि इन्होंने फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश रची थी। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये दंगे सीएए-एनआरसी के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। इन सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। वे साल 2020 से जेल में हैं और निचली कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत की मांग की थी।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दो सितंबर को उमर खालिद और शरजील इमाम सहित नौ लोगों को जमानत देने से इनकार किया था। कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन या विरोध के नाम पर हिंसा के लिए साजिश रचने की अनुमति नहीं दी जा सकती। खालिद और इमाम के अलावा जिन लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज हुईं, उनमें मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद शामिल हैं। एक और आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका भी दो सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट की दूसरी बेंच ने खारिज कर दी थी।
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शरजील और गुलफिशा ने भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती
पिछले हफ्ते शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा ने भी हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान नागरिकों को प्रदर्शन और आंदोलन करने का अधिकार देता है, लेकिन यह तभी तक मान्य है, जब तक वह शांतिपूर्ण, संयमित और बिना हथियारों के हो। ऐसा कोई भी प्रदर्शन कानून के दायरे में होना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक बैठकों में भाषण देना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत एक मौलिक अधिकार है और इसे पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है। लेकिन यह अधिकार पूरी तरह से मुक्त नहीं है और इस पर उचित सीमाएं लगाई जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर लोगों को बिना किसी सीमा के प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार दे दिया जाए, तो इससे सांविधानिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा और देश की कानून-व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
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सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़के थे दंगे
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य सभी आरोपियों पर यूएपीए और भारतीय दंज संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज है। इन पर आरोप है कि इन्होंने फरवरी 2020 में हुए दंगों की साजिश रची थी। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ये दंगे सीएए-एनआरसी के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। इन सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। वे साल 2020 से जेल में हैं और निचली कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत की मांग की थी।
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