फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   FATF: Why did BIS raid Amazon's warehouses, online platforms involved in terror funding? CAT questions

FATF: आतंकी फंडिंग में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, बीआईएस की अमेजन के गोदामों पर क्यों हुई छापेमारी? कैट के सवाल

Wed, 09 Jul 2025 06:23 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 09 Jul 2025 06:23 PM IST
सार

पहले भी कई बार कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स कह चुका है कि विदेशी पूंजी से संचालित ई-कॉमर्स कंपनियां भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा अमेजन, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ गैर-अनुपालन वाले उत्पादों की बिक्री पर की गई सख्त कार्रवाई को जायज बताया था।

विज्ञापन
FATF: Why did BIS raid Amazon's warehouses, online platforms involved in terror funding? CAT questions
FATF - फोटो : X

विस्तार

एफएटीएफ की हालिया रिपोर्ट में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और पेमेंट ऐप्स के जरिए आतंकी फंडिंग का खुलासा हुआ है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। यह बेहद चिंताजनक है कि जो डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म सुविधा और नवाचार के लिए बनाए गए थे, आज उन्हें देशविरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने यह बात कही है। खंडेलवाल ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय होनी चाहिए। क्या ये प्लेटफॉर्म्स अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं? यह सवाल उठाना जरूरी है।

विज्ञापन


खंडेलवाल ने चिंता जताते हुए कहा कि हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा अमेजन के गोदामों पर छापेमारी की गई, जिसमें भारी मात्रा में नकली और घटिया सामान बरामद हुआ। इससे प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों की नियामक अनुपालन और उपभोक्ता संरक्षण में लापरवाही उजागर होती है। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि व्यापार और उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर मंडरा रहे एक संगठित खतरे का संकेत हैं। ई-कॉमर्स कंपनियों की बेलगाम और अनैतिक गतिविधियाँ, स्थानीय छोटे व्यापारियों की रोज़ी-रोटी छीन रही हैं और देश की आर्थिक व कानूनी व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं।
विज्ञापन


खंडेलवाल ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सरकार सख्त और त्वरित कदम उठाए। उन्होंने आग्रह किया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उल्लंघनकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई हो। एक व्यापक ई-कॉमर्स नीति तुरंत लागू की जाए, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करे। डिजिटल पेमेंट गेटवे की सख्ती से निगरानी हो, ताकि उनका दुरुपयोग रोका जा सके। एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण की स्थापना हो, जो भारत में ई-कॉमर्स को नियंत्रित और मॉनिटर करे। देश की अर्थव्यवस्था, व्यापारी और उपभोक्ता कुछ गैरजवाबदेह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की मनमानी के कारण बंधक नहीं बन सकते। ऐसे में यह आवश्यक है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे और यह सुनिश्चित करे कि भारत में डिजिटल व्यापार सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक दायरे में रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


बता दें कि इससे पहले भी कई बार कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल कह चुके हैं कि विदेशी पूंजी से संचालित ई-कॉमर्स कंपनियां भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा अमेजन, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ गैर-अनुपालन वाले उत्पादों की बिक्री पर की गई सख्त कार्रवाई को जायज बताया था। ये कंपनियां बार-बार भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने क्विक कॉमर्स कंपनियों पर भी नियमों के उल्लंघन और देशभर के छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था। खंडेलवाल, इनके खिलाफ भी सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed