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Rural India: तेजी से विकास कर रहा ग्रामीण भारत, पांच वर्ष में औसत आय 58 फीसदी बढ़ी; खाद्य व्यय घटकर 47% हुआ
Sun, 13 Oct 2024 06:27 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 13 Oct 2024 06:27 AM IST
सार
सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल पांच वर्षों में औसत ग्रामीण आय में 58 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है जो 2016-17 में 8,059 रुपये थी। 2021-22 में यह बढ़कर 12,698 रुपये हो गई है। यह बढ़ता रुझान समावेशी विकास की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रमाण है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
केंद्र सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण भारत तेजी से विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। बढ़ती आय, बेहतर बचत, बढ़ती वित्तीय साक्षरता और विस्तारित बीमा के साथ ग्रामीण परिवार अधिक सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार हो रहे हैं। सरकार का दावा है कि मात्र 5 सालों में ही औसत ग्रामीण आय में 58 फीसदी की वृद्धि हुई है।
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सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल पांच वर्षों में औसत ग्रामीण आय में 58 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है जो 2016-17 में 8,059 रुपये थी। 2021-22 में यह बढ़कर 12,698 रुपये हो गई है। यह बढ़ता रुझान समावेशी विकास की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रमाण है। साथ ही कहा कि पहली बार गैर खाद्य व्यय 50 फीसदी से अधिक हो गया है। यह 2011-12 में 46 फीसदी से बढ़कर 2022-23 में 54 प्रतिशत हो गया है।
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47% हुआ खाद्य व्यय घटकर
आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में खाद्य व्यय 53 फीसदी से घटकर 47 फीसदी हो गया है। यह अधिक वित्तीय लचीलेपन और जीवनशैली में सुधार को दर्शाता है।
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हर माह साढ़े चार हजार ज्यादा कमा रहे ग्रामीण
सालाना बचत में 45 फीसदी की बढ़ोतरी
सरकार के अनुसार, ग्रामीण भारत में सालाना बचत में 45 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। यह मात्र 5 सालों में 9,104 रुपये से बढ़कर 13,209 रुपये हो गई। यह हमारे गांवों की बढ़ती वित्तीय ताकत को दिखाता है।
बीमा से अपना भविष्य कर रहे सुरक्षित
सरकार का कहना है कि पांच सालों में बीमा कवरेज 25.50 फीसदी से बढ़कर 80.3 फीसदी हो गया है, जोकि बहुत ही प्रभावशाली है। अधिक ग्रामीण परिवार बेहतर वित्तीय फैसलों के साथ अपना भविष्य सुरक्षित कर रहे हैं।
वित्तीय साक्षरता भी बढ़ी
सरकार ने कहा कि शहरों की तरह ही ग्रामीण भारत में भी वित्तीय साक्षरता बढ़ रही है। वित्तीय साक्षरता 2016-17 में 33.9 फीसदी से बढ़कर 2021-22 में 51.3 फीसदी हो गई है। अधिक लोग अब सूचित वित्तीय निर्णय लेने के लिए ज्ञान से लबरेज हैं।