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कृषि मंत्रालय 9 जनवरी तक देगा किसानों को राहत का फॉर्मूला
Fri, 04 Jan 2019 12:34 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 04 Jan 2019 12:34 AM IST
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किसान
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लोकसभा चुनावों से किसानों को बंपर तोहफा देने की तैयारी में जुटी केंद्र सरकार ने इसकी जिम्मेदारी कृषि मंत्रालय को सौंप दी है। कृषि मंत्रालय को 9 जनवरी तक किसानों को राहत पहुंचाने का फॉर्मूला पेश करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे अगले सप्ताह संसद का शीत सत्र खत्म होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में इसे पेश किया जा सके। प्रधानमंत्री के हरी झंडी दिखाते ही यह फॉर्मूला सभी के सामने पेश कर दिया जाएगा।
दरअसल सरकार की मंशा लोकसभा चुनाव से पहले महज किसानों के लिए राहत योजना को लागू करने की ही नहीं है, बल्कि सरकार इस योजना का प्रभाव भी मई-जून में प्रस्तावित चुनावों से पहले दिखाई देने के पक्ष में है। सरकार का मानना है कि ऐसा होने पर ही विपक्षी दलों के कर्ज माफी जैसे अस्त्र की काट बनकर यह फॉर्मूला किसान वोट एनडीए के पक्ष में करेगा।
इसी कारण कृषि मंत्रालय की तरफ से पेश होने वाले फॉर्मूले पर व्यवहारिक सुझाव देने और इसे तत्काल लागू करने का रास्ता सुझाने के लिए नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी भी प्रधानमंत्री के साथ होने वाली बैठक में बुलाए गए हैं।
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दरअसल सरकार की मंशा लोकसभा चुनाव से पहले महज किसानों के लिए राहत योजना को लागू करने की ही नहीं है, बल्कि सरकार इस योजना का प्रभाव भी मई-जून में प्रस्तावित चुनावों से पहले दिखाई देने के पक्ष में है। सरकार का मानना है कि ऐसा होने पर ही विपक्षी दलों के कर्ज माफी जैसे अस्त्र की काट बनकर यह फॉर्मूला किसान वोट एनडीए के पक्ष में करेगा।
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इसी कारण कृषि मंत्रालय की तरफ से पेश होने वाले फॉर्मूले पर व्यवहारिक सुझाव देने और इसे तत्काल लागू करने का रास्ता सुझाने के लिए नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी भी प्रधानमंत्री के साथ होने वाली बैठक में बुलाए गए हैं।
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परखे जा रहे राज्यों में लागू योजनाओं के मॉडल
केंद्र सरकार के फॉर्मूले में किसी तरह के लूपहोल से बचने के लिए कैबिनेट सचिव ने मंत्रालय के अधिकारियों को विभिन्न राज्यों की कृषि राहत योजनाओं को भी परखने का आदेश दिया है। कैबिनेट सचिव ने देशभर से आंकड़े एकत्र करने के साथ ही राज्यों की किसान राहत योजनाओं में व्यय और राहत का आकलन करने को कहा है। फिलहाल तेलंगाना का मॉडल सबसे बढ़िया माना गया है, जिसमें किसानों को जमीन के हिसाब से एकमुश्त रकम दी जा रही है। ओडिशा, झारखंड में चल रही किसान कल्याण योजना के साथ यूनिवर्सल बेसिक स्कीम और मध्य प्रदेश की पिछली शिवराज सरकार की भावांतर योजना भी सूची में रखी गई हैं।
पैसा मिलेगा 5 हजार रुपये, आएगा सीधा किसान के खाते में
कृषि मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री बिचौलियों को रोकने के लिए किसानों के खाते में सीधा पैसे भेजने के पक्ष में हैं। अब महज यह तय होना बाकी है कि किसान को किस फसल के लिए, कितनी रकम कब देना मुफीद रहेगा। सूत्रों की मानें तो एक फसली मौसम में औसतन चार से पांच हजार रुपये की राहत किसान को देने की तैयारी है। इस पर लगभग एक लाख 22 हजार करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।
कर्ज माफी से दूर रहेगी सरकार
सूत्रों के मुताबिक, कर्ज माफी का लाभ महज उन किसानों को मिलता है, जिन्होंने बैंक से कर्ज लिया है। देश में किसानों की संख्या का करीब 50 से 55 फीसदी हिस्सा बटाई या ठेके पर जमीन लेकर खेती करता है, जिन्हें बैंक से कर्ज नहीं मिलता। ऐसे में सरकारी कर्ज माफ का लाभ इन तक नहीं पहुंचता। इसी कारण सरकार ने कर्ज माफी से दूर रहकर कोई और योजना लाने का निर्णय लिया है।
पैसा मिलेगा 5 हजार रुपये, आएगा सीधा किसान के खाते में
कृषि मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री बिचौलियों को रोकने के लिए किसानों के खाते में सीधा पैसे भेजने के पक्ष में हैं। अब महज यह तय होना बाकी है कि किसान को किस फसल के लिए, कितनी रकम कब देना मुफीद रहेगा। सूत्रों की मानें तो एक फसली मौसम में औसतन चार से पांच हजार रुपये की राहत किसान को देने की तैयारी है। इस पर लगभग एक लाख 22 हजार करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।
कर्ज माफी से दूर रहेगी सरकार
सूत्रों के मुताबिक, कर्ज माफी का लाभ महज उन किसानों को मिलता है, जिन्होंने बैंक से कर्ज लिया है। देश में किसानों की संख्या का करीब 50 से 55 फीसदी हिस्सा बटाई या ठेके पर जमीन लेकर खेती करता है, जिन्हें बैंक से कर्ज नहीं मिलता। ऐसे में सरकारी कर्ज माफ का लाभ इन तक नहीं पहुंचता। इसी कारण सरकार ने कर्ज माफी से दूर रहकर कोई और योजना लाने का निर्णय लिया है।