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Farmers Protest: मौन साधे बैठे किसान, सरकार को प्रस्ताव के जवाब का है इंतजार, कैसे होगी छठे दौर की बातचीत

Tue, 08 Dec 2020 04:44 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 08 Dec 2020 04:44 PM IST
सार

किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला से कहा, 'किसान आंदोलन को करीब 10 दिन से ज्यादा हो गए। सरकार को हम हमारी मांगें बता चुके हैं लेकिन केंद्र सरकार अब तक कोई फैसला नहीं ले पा रही है। इस सरकार में कोई मानवता नहीं है...

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Farmers Protest: Government is waiting the suggestions on proposal from farmers before 6th round meeting on wednesday at vigyan bhawan
सिंघु बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन - फोटो : जी पाल

विस्तार

नए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के नुमाइंदों के बीच छठे दौर की बैठक बुधवार को होने जा रही है। लेकिन अब तक किसान संगठनों ने केंद्र सरकार को एतराज वाले विवादित बिंदुओं की लिस्ट और अपने कोई ठोस सुझाव नहीं भेजे हैं।

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ऐसे में केंद्र सरकार की मुश्किल ये है कि वह आगे की वार्ता का एजेंडा कैसे तय करे। किसान संगठन के नेताओं का कहना है, 'हम केंद्र सरकार के साथ पांच बार बैठक कर चुके हैं। कानूनों में क्या खराबी है इसे हम पहले ही बता चुके हैं। छठे दौर की बैठक में भी हम मौन ही रहेंगे।'
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विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, छठे दौर की बैठक के लिए कृषि मंत्रालय में अफसरों की बैठकों का दौर लगातार जारी है। सोमवार को भी दिनभर बैठकों का दौर चलता रहा। देर शाम अफसरों की कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ चर्चाएं भी हुईं।
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मंगलवार को भी मंत्रालय में अफसरों की टीम बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा होनी है, उसका प्रस्ताव तैयार करने में जुटी हुई है। देर शाम को इस पर दोनों मंत्री एक बार फिर चर्चा करेंगे। सरकार को अब तक किसान संगठन की तरफ से कोई ठोस सुझाव नहीं मिले हैं।

पांचवे दौर की बैठक में किसान संगठनों के नेता नए कृषि कानूनों को वापस लिये जाने की मांग पर अड़े रहे थे। वहीं इस मुद्दे पर सरकार से हां या नहीं में जवाब की मांग करते हुए मौन व्रत पर चले गए थे। इसके चलते ये वार्ता बेनतीजा ही खत्म हो गई थी। छठे दौर की बैठक के लिए केंद्र सरकार ने किसान नेताओं से प्रमुख बिंदुओं पर ठोस सुझाव मांगे थे। सरकार ने उम्मीद भी जताई थी कि उनके सहयोग से समाधान निकल जाएगा।

सरकार के पास नहीं होता है कोई एजेंडा

किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला से कहा, 'किसान आंदोलन को करीब 10 दिन से ज्यादा हो गए। सरकार को हम हमारी मांगें बता चुके हैं लेकिन केंद्र सरकार अब तक कोई फैसला नहीं ले पा रही है। इस सरकार में कोई मानवता नहीं है आंदोलन में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी ठंड में परेशान हो रहे हैं। ये सरकार जल्द कुछ करने के मूड में नजर नहीं आ रही है। ये लोग जानबूझकर देरी कर रहे हैं।'

वह कहते हैं, 'सरकार के लोग ही एक बात को 50 बार बोल रहे हैं। नौ तारीख को होने वाली बैठक में हम 'यस या नो' में ही जवाब देंगे या फिर मौन ही रहेंगे। हम लोग अपनी पूरी बात विस्तार से सरकार के सामने रख चुके हैं। हर बैठक में मंत्री लोग केवल यही बताते रहते हैं कि काननू बहुत ही अच्छा है। और हमसे पूछते रहते हैं कि बताइए कानून में कहां दिक्क्त है।

इस तरह की चीजों से हम बहुत थक चुके हैं इसलिए हमने केंद्र को साफ कर दिया था कि हम कोई ओर बातें सुनना नहीं चाहते हैं। केवल मांगों पर 'यस या नो' सुनना चाहते हैं। आगे भी बैठक में यही रवैया होगा। सरकार जब भी कोई बैठक बुलाती है तो कोई एजेंडा देती है लेकिन आज तक सरकार ने कोई भी एजेंडा हम लोगों को नहीं दिया। अगर सरकार फिर आगे बैठक आगे बढ़ाती है तो हमारा आंदोलन भी आगे बढ़ता जाएगा।'



गौरतलब है कि केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली की सीमा पर कई दिनों से जमे हुए हैं। अब तक किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। अब नौ दिसंबर को विज्ञान भवन में सुबह 11 बजे छठे दौर की वार्ता होनी है।
 

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