फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Farmers protest: Farmers adamant on taking back farm bills

Farmers Protest: किसानों की दो टूक, कानून वापसी तक घर वापसी नहीं 

Sat, 09 Jan 2021 12:18 AM IST
Amit Mandal हरि वर्मा 
हरि वर्मा  Published by: Amit Mandal Updated Sat, 09 Jan 2021 12:18 AM IST
सार

  • संयुक्त किसान मोर्चा की 10 जनवरी की बैठक में अगली रणनीति तय होगी
  • 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई वार्ता की प्रगति पर निर्भर 

विज्ञापन
Farmers protest: Farmers adamant on taking back farm bills
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

किसान आंदोलन में ‘फिर वही बात’। सरकार ने कहा, कानून वापस नहीं लेंगे। किसानों ने कहा, कानून वापसी तक घर वापसी नहीं। अगली वार्ता 15 जनवरी को है। आठवें दौर की वार्ता में कितनी प्रगति हुई, यह 11 जनवरी को साफ हो पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में उस दिन सुनवाई प्रस्तावित है। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि यदि सरकार की ओर से बताया जाएगा कि वार्ता प्रगति पर है, तो सुनवाई टाल सकते हैं। ऐसे में वार्ता की प्रगति पर ही 11 जनवरी की सुनवाई निर्भर करेगी। हालांकि गतिरोध अब भी कायम है। यह भी साफ है कि वार्ता में कोई प्रगति नहीं है। फिर ‘डेडलॉक’ की ओर बढ़ रहे ‘डायलॉग’ के ‘प्रोग्रेस’ पर से पर्दा अब 11 जनवरी को उठेगा। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा की 10 जनवरी की बैठक में अगली रणनीति पर मंत्रणा होगी।

विज्ञापन


वार्ता से समाधान का संदेश 
अब सरकार और किसान संगठन यही संदेश देना चाहते कि दोनों वार्ता से हल के पक्षधर हैं। इसलिए दोनों तरफ से एक-दूसरे के पाले में गेंद डाली जा रही है। आंदोलनकारी किसानों को अहसास है कि सरकार कानून रद नहीं करने वाली है। ऐसे में संयुक्त किसान मोर्चा वार्ता से इनकार कर खुद को कटघरे में खड़ा नहीं करना चाहता है। संभवतः इसलिए दोनों तरफ से वार्ता की आखिरी उम्मीद पर तारीख पर तारीख का सिलसिला जारी है। साथ-साथ हठ भी। पहले दौर की बातचीत से आठवें दौर की बातचीत तक वार्ता जहां से शुरू हुई थी, वहीं अटककर रह गई है। प्रगति के नाम पर अब तक गतिरोध ही नतीजे के तौर पर सामने आया है। भाकियू डकौंदा के मंजीत सिंह धनेर कहते हैं कि सरकार रोज बुलाएगी, तब भी जाएंगे। उनकी दलील है कि सरकार बातचीत के लिए हमसे (संयुक्त मोर्चा) ना कहलवा कर आंदोलनकारी किसानों को बदनाम करना चाहती है। 
विज्ञापन


वैकल्पिक फार्मूला  नामंजूर
शुक्रवार की बैठक में भी सरकार ने कानून वापसी के बगैर संशोधन के कई विकल्प सुझाए। पिछले दरवाजे से पहल भी की।  तीनों कानूनों की वापसी के बजाय आंदोलनकारी किसान संगठनों से विकल्पों पर प्रस्ताव की उम्मीद की। पंजाब-हरियाणा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ लिखित गारंटी, राज्यों को अधिकार, कमेटी के गठन के भरोसे का विकल्प। बदले में तीन कानूनों की वापसी की जिद छोड़ कुछ जरूरी संशोधन, जिन पर अब तक आपसी सहमति बन चुकी है। इन वैकल्पिक फॉर्मूले को भी किसान संगठनों ने सिरे से खारिज कर दिया। संयुक्त मोर्चा कानून वापसी की मांग पर कायम है। पंजाब-हरियाणा के भाजपा नेताओं से केंद्रीय नेतृत्व की मुलाकात और अन्य समर्थक किसान संगठनों से सरकार की बातचीत को लेकर आंदोलनकारी किसान आश्वस्त हैं कि इनका असर उनके आंदोलन पर नहीं पड़ने वाला है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


संयुक्त किसान मोर्चा की 10 को बैठक 
संयुक्त किसान मोर्चा रविवार को बैठक कर सरकार से बातचीत पर अगली रणनीति तय करेगा। किसान मोर्चा ने 26 जनवरी तक आंदोलन तय कर रखा है। इसकी तैयारी तेज कर दी गई है। इससे पहले सरकार से हुई बातचीत पर रविवार को आपसी चर्चा होगी। इस बीच लोहड़ी में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने से लेकर पूरे पखवाड़े देश भर में जागरुकता अभियान जारी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई वार्ता की प्रगति पर निर्भर
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से इन कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई है। सरकार ने शुक्रवार की वार्ता के दौरान आंदोलनकारियों से कानूनों को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा। इसे किसान नेताओं ने नकार दिया। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से भले सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई की पहल न की गई, लेकिन इनसे जुड़े आठ किसान संगठन पक्षकार हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई अहम होगी। यदि सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को यह सूचित किया जाएगा कि वार्ता प्रगति पर है, तो 11 जनवरी की सुनवाई आगे खिसक भी सकती है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही बातचीत से मसले के हल के लिए कहा भी है। ऐसे में 11 जनवरी की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर है। 


भाकियू डकौंदा के बूटा सिंह बुर्जगिल का मानना है कि सरकार अगली बातचीत तक 11 जनवरी को होनेवाली सुनवाई में वार्ता की प्रगति का हवाला दे सकती है। बूटा सिंह बताते हैं कि 13 को लोहड़ी के दौरान कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे। 14 को मकर संक्रांति की छुट्टी है। इसलिए वार्ता की अगली तारीख 15 जनवरी तय की गई है। ऐसे में 10 जनवरी को संयुक्त मोर्चा की बैठक, 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 13 जनवरी को लोहड़ी का दिन और 15 जनवरी की वार्ता पर नजर टिकी रहेगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed