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Farmers Protest: प्रधानमंत्री गए आबूधाबी तो कांग्रेस ने रखी यह बड़ी शर्त! क्यों किया 'हस्तिनापुर' का जिक्र?

Tue, 13 Feb 2024 05:15 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 13 Feb 2024 05:15 PM IST
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सार
कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि किसानों को आखिर हर बार सड़क पर क्यों उतरना पड़ता है। किसानों की मांगें पूरी तरीके से जायज हैं और उन्हें केंद्र सरकार पूरा नहीं करना चाहती है। उनकी पार्टी मांग करती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं जाकर किसानों से मिलें और उन्हें न्याय दें...
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Farmers Protest: Congress started putting pressure on government to accept demands of farmers
Farmers Protest: Randeep Singh Surjewala - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

किसानों के शुरू हुए प्रदर्शन को कांग्रेस ने अपना समर्थन दिया है। यही नहीं इस समर्थन के बीच कांग्रेस ने आबूधाबी और कतर के लिए निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक ऐसी शर्त रख दी है जिस पर सियासी हलचल मचनी तय मानी जा रही है। यही नहीं कांग्रेस ने अपने इस प्रदर्शन के दौरान किसानों के 'हस्तिनापुर' से न हटने की बात कहकर अपने सियासी मंसूबों और किसानों के समर्थन में आगे की स्थिति स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन की सभी मांगों को मानने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अबू धाबी और कतर की यात्रा के लिए निकले हैं। इसी दौरान देश में किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया। इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी शासित केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने तो पीएम की विदेश यात्रा के दौरान एक ऐसी शर्त रख दी, जो पूरी होती ही नहीं दिख रही है। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि किसानों को आखिर हर बार सड़क पर क्यों उतरना पड़ता है। किसानों की मांगें पूरी तरीके से जायज हैं और उन्हें केंद्र सरकार पूरा नहीं करना चाहती है। उनकी पार्टी मांग करती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं जाकर किसानों से मिलें और उन्हें न्याय दें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अबू धाबी और कतर के लिए निकल चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस की ओर से पीएम ते आंदोलनकारियों से मिलने की मांग पार्टी के लिए एक सियासी दांव माना जा रहा है।

कांग्रेस ने किसानों के मामले में भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए बड़े स्तर पर समर्थन का आश्वासन दिया है। इसी दौरान कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सुरजेवाला ने किसानों के पक्ष में यह कहते हुए माहौल बनाया कि इस बार उनके किसान सरकार के झूठे झांसे में नहीं आने वाले हैं। किसानों का समर्थन करते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस बार किसान 'हस्तिनापुर' से अपना वाजिब हक लिए बगैर वापस नहीं जाने वाले। किसानों को इस तरह अपना समर्थन देकर कांग्रेस ने आने वाले दौर में सियासी समीकरण साधने के स्पष्ट इशारे कर दिए हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि किसानों की ओर से अगर बार-बार आंदोलन हो रहे हैं तो निश्चित तौर पर सरकार या तो उनको भरोसा नहीं दिला पा रही है या उनके साथ धोखा कर रही है। उनकी पार्टी किसानों के हक और हुकूक की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चल रही है।

किसानों के शुरू हुए आंदोलन पर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों को अनदेखा करती आई है। खरगे कहते हैं कि मोदी सरकार ने बीते 10 वर्षों में देश के अन्नदाताओं से किए गए अपने कई प्रमुख वादे तोड़े हैं। इसमें किसानों की दोगुनी आय से लेकर स्वामीनाथन की रिपोर्ट के लागू होने और एमएसपी को कानूनी दर्जा दिए जाने पर किसानों को धोखा दिया है। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश के 62 करोड़ किसानों की आवाज के साथ उनकी पार्टी का प्रत्येक नेता और कार्यकर्ता कदम से कदम मिला रहा है। इस दौरान कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में किसान न्याय आवाज उठाने की योजना बनाई है।

वहीं किसानों के आंदोलन पर केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि कुछ लोग माहौल को प्रदूषित करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए बाध्य है। कृषि मंत्री कहते हैं कि कुछ मुद्दों पर सहमति बन गई है जबकि कुछ पर समाधान ढूंढे जा रहे हैं। जल्द ही उन मुद्दों पर भी बातचीत सहमति के साथ पूरी हो जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वह केंद्र के साथ बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान हल करें। बातचीत के माध्यम से किसानों और सरकार के बीच होने वाले टकराव से बचने के लिए केंद्र के दो मंत्री किसानों के प्रतिनिधियों से भी मिले थे। इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल के साथ सोमवार को किसानों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की। लेकिन किसानों की मांगों को लेकर हुई यह बैठक बेनतीजा रही। उसके बाद ही मंगलवार से किसानों ने दिल्ली की ओर कूच किया था।

 

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