फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Farmers from five states are demanding government intervention to help check dwindling farm income

किसान आंदोलन: खेत छोड़कर डेढ़ साल में कई बार सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं अन्नदाता

Tue, 02 Oct 2018 01:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 02 Oct 2018 01:59 PM IST
विज्ञापन
Farmers from five states are demanding government intervention to help check dwindling farm income
kisan kranti rally - फोटो : pti

पिछले दो सालों में कई बड़ी रैलियां अन्नदाताओं ने की हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु के बाद अब उत्तर प्रदेश के किसान आंदोलित हो गए हैं। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में किसान खेत छोड़कर सड़कों पर उतर आए हैं।

विज्ञापन


भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले हजारों किसान दो अक्टूबर को अपनी कई मांगों के साथ दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी मांग है कि साल 2014 में मोदी सरकार बनने से पहले भाजपा ने अपने घोषणापत्र में किसानों को लेकर जो वादे किए थे वह उन्हें पूरा करे। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ेंक्या हैं स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें, जिसे लागू करवाने को लेकर सड़कों पर उतरे हैं किसान
विज्ञापन
विज्ञापन


23 सितंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार से भारतीय किसान यूनियन ने ‘किसान क्रांति यात्रा’ शुरू की जो आज मंगलवार को दिल्ली बॉर्डर पर पहुंच चुकी है। वैसे तो प्रशासन इन किसानों को दिल्ली  न पहुंचने देने के लिए चाक चौबंद व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के बीच देश के जवान और किसान आमने सामने आ गए हैं। बता दें कि आज देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन है जिन्होंने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। 


पिछले डेढ़ दो वर्षों में नजर डालें तो किसान अपनी कई मांगों के साथ सड़क पर उतर चुके हैं। 

Farmers from five states are demanding government intervention to help check dwindling farm income
मराठा किसान रैली
किसान की बड़ी रैलियां

12 मार्च 2018: महाराष्ट्र किसान रैली 
मार्च में महाराष्ट्र के किसानों ने बड़ा आंदोलन किया था। मार्च 2018 में महाराष्ट्र के 30 हजार किसान मुंबई की विधानसभा का घेराव करने पहुंचे थे। नासिक से छह मार्च को उन्होंने मुंबई यात्रा शुरू की थी 11 मार्च को वो मुंबई पहुंचे थे।

नासिक से मुंबई तक की उनकी यात्रा 180 किलोमीटर की रही।  रास्ते में उनसे और किसान जुड़ते चले गए। किसानों का कहना था कि महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल 34 हजार करोड़ रुपए की सशर्त कृषि माफी की घोषणा की थी लेकिन अब तक लागू नहीं किया गया।  

बता दें कि अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) की अगुवाई में विरोध मार्च कर रहे इन किसानों की मांग थी कि सरकार इनके कर्ज माफ करे। बैंकों से लिया कर्ज किसानों के लिए बोझ बन चुका है। 

राजस्थान में नाराज किसानों की रैलियां
राजस्थान में प्रशासन और सरकार से नाराज किसान 2017 से लेकर 2018 तक लगातार सड़कों पर उतरते रहे। एक सितंबर से 13 सितंबर 2017 तक आंदोलन के बाद फरवरी 2018 में भी किसानों ने सीकर से जयपुर तक बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी दीं।  

Farmers from five states are demanding government intervention to help check dwindling farm income
tamilnadu-kisan-rally

मध्यप्रदेश के मंदसौर में किसान रैली

साल 2017 में मध्यप्रदेश के मंदसौर में भी इसी तरह का एक किसान आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन में भी किसानों की मांगें कर्ज माफी और अपनी फसल का सही दाम हासिल करने की थी। कई दिनों तक यह आंदोलन चला जिसे तेजी से बढ़ता हुआ देखकर प्रशासन से मंदसौर समेत आस-पास के जिलों जैसे उज्जैन और रतलाम में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी थी। स्थिति तब बिगड़ गई जब पुलिस ने किसानों पर फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में 6 किसानों की मौत हो गई थी और बहुत से किसान बुरी तरह घायल हुए थे।

गोलियां चलने के बाद यह पूरा आंदोलन एक हिंसक प्रदर्शन में बदल गया था। फायरिंग से गुस्साए किसानों ने जगह-जगह तोड़फोड़ की और कई गाड़ियां जला डालीं थी। कई दिनों तक जिले में कर्फ्यू के हालात थे। इन सभी मामलों में किसानों को उनकी मांगों के एवज में आश्वासन दिए गए। 

खोपड़ी के साथ तमिलनाडु के किसानों ने किया प्रदर्शन

अप्रैल 2017 में तमिलनाडु के हजारों किसान जंतर-मंतर पर अजीबो-गरीब वेश-भूषा के साथ प्रदर्शन किया। किसान खोपड़ी लेकर पहुंचे थे। किसानों ने 41 दिनों तक यहां प्रदर्शन किया था तब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री खुद किसानों से बात करने दिल्ली पहुंचे थे।

किसान नर खोपड़ियों के साथ प्रदर्शन किया और उन्होंने दावा किया था कि ये खोपड़ियां आत्महत्या करने वाले किसानों की हैं। फिर इन किसानों ने एक दिन अर्द्ध-नग्न होकर भी प्रदर्शन किया। भारी गर्मी में किसानों ने सड़क पर लेट कर अपना विरोध दर्ज कराया। किसानों ने सिर के आधे बाल और आधी मूंछ कटाकर भी प्रदर्शन किया। खोपड़ी के साथ किसानों की तस्वीर इस आंदोलन की पहचान बन चुकी है। 

किसानों की नौ सूत्री मांगे

बता दें कि किसान अपनी नौ सूत्री मांगों को लेकर दिल्ली की ओर बढ़े हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में स्वामिनाथन कमेटी के फॉर्मूले के आधार पर किसानों की आय सी-टू लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ कर दिया जाए साथ ही सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी जाए।
पिछले 10 सालों में आत्महत्या करने वाले लगभग 3 लाख किसानों के परिवार को मुआवजा के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। किसानों को सभी प्रकार के कर्ज से पूरी तरह माफ कर दिया जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए।  

इस योजना में किसानों को लाभ मिलने के बजाए बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली-एनसीआर में दस साल से ज्यादा पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटा दी जाए। किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए। महिला किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना अलग से बनाई जाए। चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपए प्रति किलो किया जाए और 7 से 10 दिन के अंदर गन्ना किसानों का भुगतान सुनश्चित किया जाए। आवारा पशुओं से किसानों के फसल को बचाने का इंतजाम किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed