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किसानों का सवाल - कोरोना में बिहार और अमेरिका में चुनाव हो सकता है तो किसान आंदोलन क्यों नहीं

Thu, 26 Nov 2020 06:54 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 26 Nov 2020 06:54 PM IST
सार

प्रशासन तर्क दे रहा है कि किसान आंदोलन में भारी भीड़ होने से लोगों में कोरोना होने का खतरा बढ़ सकता है। दिल्ली वालों के साथ-साथ किसानों को भी कोरोना की कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसलिए फिलहाल आंदोलन को टाल दिया जाना चाहिए। जहां सरकारों की जरूरत होती है वहां चुनाव करा लिए जाते हैं, रैली करा ली जाती हैं...

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Farmers asked questions to government that when Bihar and America election happened during corona, so why not farmers movement
योगेंद्र यादव और उनके किसान मोर्चा के सदस्य हिरासत में - फोटो : सुदर्शन झा

विस्तार

पूरी दुनिया में इस समय कोरोना संक्रमण का खतरा अपने चरम पर है। लेकिन इसी खतरे के बीच बिहार विधानसभा का चुनाव संपन्न हुआ। नेताओं ने जगह-जगह पर रैलियां की और हर जगह भारी भीड़ जुटी। इसी तरह दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में भी चुनाव हुआ और वहां भी जगह-जगह पर बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित हुए। अगर चुनावों के दौरान कोरोना से कोई खतरा नहीं हो रहा है तो किसान आंदोलन को ही इसके नाम पर रोकने की कोशिश क्यों की जा रही है? ये सवाल वे किसान संगठन कर रहे हैं जो तीन नए कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए दिल्ली कूच कर चुके हैं।

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कुछ अलग संदर्भ में, लेकिन ठीक यही सवाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान उठाया था। कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए बड़े कार्यक्रमों पर रोक लगाने के सुझाव पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि इस तरह के प्रतिबंध केवल सामाजिक-धार्मिक मामलों में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गतिविधियों में भी लगाया जाना चाहिए।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने किसी राजनीतिक दल का नाम तो नहीं लिया, लेकिन इसी दौरान पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी काफी सक्रिय बनी हुई है। उसके नेता रोज रैलियां और प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं। इनमें भाजपा नेता अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे का इशारा इसी ओर था।
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किसान आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहे स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान उन्होंने भी प्रशासन की दोहरी नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने फरीदाबाद में एक किसान रैली आयोजित की। इस दौरान काफी संख्या में लोग जमा हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान कोरोना से जुड़े नियमों का कोई पालन नहीं किया गया, लेकिन इस कार्यक्रम से प्रशासन को कोरोना संक्रमण का कोई खतरा नजर नहीं आया, जबकि किसान आंदोलन रोकने के लिए कोरोना संक्रमण फैलने के बहाने बनाए जा रहे हैं।

स्वराज इंडिया के नेता आशुतोष ने अमर उजाला से कहा कि सरकार किसान आंदोलन को रोकने के लिए हर दमनकारी हथकंडा अपना रही है। जगह-जगह पर किसानों पर आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारें मारी जा रही हैं। रास्तों पर क्रेनों के जरिए भारी-भारी पत्थर रखे जा रहे हैं और बड़े किसान नेताओं की गिरफ्तारी की जा रही है। योगेंद्र यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। सरकार की पूरी कोशिश है कि किसान दिल्ली तक न पहुंच पाएं और उनका आंदोलन खत्म हो जाए।

उन्होंने कहा कि प्रशासन तर्क दे रहा है कि किसान आंदोलन में भारी भीड़ होने से लोगों में कोरोना होने का खतरा बढ़ सकता है। दिल्ली वालों के साथ-साथ किसानों को भी कोरोना की कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसलिए फिलहाल आंदोलन को टाल दिया जाना चाहिए। आशुतोष ने कहा कि आखिर सरकार और प्रशासन जनता को इतना मूर्ख क्यों समझते हैं। जहां सरकारों की जरूरत होती है वहां चुनाव करा लिए जाते हैं, रैली करा ली जाती हैं, तब किसी को कोरोनो नहीं होता। लेकिन जैसे ही उसके खिलाफ कोई आवाज उठाने की कोशिश करने लगता है सरकार को तुरंत कोरोना का खतरा नजर आने लगता है। क्या इससे सरकार की नीयत पर शंका नहीं होती। उन्होंने कहा कि सरकार को अब बहाने बनाने की बजाय किसानों की असली समस्या का समाधान खोजना चाहिए।


हरियाणा किसान नेता हरबिंदर सिंह ने बताया कि उनका जत्था करनाल से आगे निकल चुका है। पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद वे आगे बढ़ रहे हैं और गुरुवार शाम या रात तक दिल्ली में प्रवेश कर जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना के नाम पर किसानों का आंदोलन दबा नहीं सकती है और किसान पूरी तैयारी के साथ दिल्ली आ रहे हैं। सरकार को हर हाल में ये कानून वापस लेने पड़ेंगे।

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