किसान आंदोलन: चिंगारी यूं ही नहीं बनी शोला, दिल्ली में रंग लाएगी क्रांति
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देश भर के नाराज किसान आज दिल्ली में रैली निकाल रहे हैं। ऐसे में यह पहली बार देखा जा रहा है कि करीब दस हजार किसान, मजदूर, कर्मचारी एक साथ अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं। सरकार विरोधी इन रैलियों में किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। संभावना है कि 25 हजार किसान एक साथ आने वाले समय में दिल्ली पहुंचेंगे। बढ़ती महंगाई के साथ-साथ लोकपाल की नियुक्ति और किसानों के लिए पेंशन सहित अपनी अन्य मांगों के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे भी आगामी दो अक्तूबर से भूख हड़ताल पर जायेंगे।
अन्ना ने किसानों को दुर्दशा से उबारने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफरिशों को लागू करने की मांग की है। किसान पिछले कुछ सालों से जबरदस्त आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। अन्ना के आंदोलन से पहले कहा गया है कि बार-बार आग्रह के बावजूद सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अन्ना के एक सहयोगी ने बताया कि उन्होंने देश के प्रत्येक किसान के लिए पांच हजार रूपये प्रति माह पेंशन की मांग की है। रिश्वत के खिलाफ अभियान चला चुके 80 वर्षीय अन्ना महात्मा गांधी जयंती के दिन अपने गांव से इस भूख हड़ताल की शुरुआत करेंगे। अन्ना अपनी मांगों के समर्थन में इस साल मार्च में भी दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे थे जिसे सरकार के आश्वासन के बाद वापस ले लिया था।
बता दें कि पिछले ही साल छत्तीसगढ़ में भी किसानों ने एक बड़ा आंदोलन किया था। इसमें उन्होंने सीएम के विधानसभा क्षेत्र राजनांदगांव में गिरफ्तारी दी थी। यहां सूखा राहत और फलस बीमा की मांग को लेकर जिला मुख्यालय में 2 बड़े आंदोलन किए गए थे। इस दौरान गुस्साए किसानों ने रैली निकालकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। किसानों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात किए गए थे।
उधर, गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं। वो भी राज्य में किसानों के कृषि ऋण माफ किए जाने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि उन्हें अभी तक इस प्रदर्शन में कई बड़े राजनीतिक दल के नेता अपना समर्थन दे चुके हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी हार्दिक पटेल के अनशन का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि किसानों का ऋण माफ किया जाना चाहिए।
वहीं, मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान जून 2017 में हुए मंदसौर गोलीकांड के मुद्दे को भी हवा लग गई है। भाजपा सरकार ने किसानों में बढ़ते असंतोष को दबाने के लिए भावांतर और कृषक प्रोत्साहन जैसी योजनाएं लागू की है। कांग्रेस भी इस मुद्दे को भुनाने में दिख रही है, जिसके चलते राहुल मंदसौर दौर पर भी गए थे।
राजस्थान के सीकर में भी संपूर्ण कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर किसान आंदोलन पर उतरे थे। हजारों किसानों ने यहां मंडी में सभा के बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर गिरफ्तारी दी थी। उस समय सीकर में ऐसा लगा मानों कि किसानों की अगस्त क्रांति की शुरुआत हो गई हो।
वहीं बुधवार हुई किसानों की रैली रामलीला ग्राउंड से शुरू होकर रणजीत सिंह फ्लाईओवर, टॉलस्टॉय मार्ग होते हुए संसद मार्ग पहुंची। इस दौरान किसानों ने कहा कि सरकार की नीतियां गलत हैं। सरकार को किसानों, मजदूरों और गरीबों को लेकर अपनी नीतियों को बदलने की जरूरत है। अगर सरकार अपनी नीतियां नहीं बदलेगी तो हम सरकार बदल देंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो ये आंदोलन और भी व्यापक होगा। उनका कहना है कि अगली बार देशभर से किसान आएंगे और पूरी राजधानी का घेराव करेंगे। रैली में हिस्सा ले रहे किसान संगठन ने बताया कि नवंबर महीने में देश के 200 से ज्यादा किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर दिल्ली का घेराव करेंगे।
किसानों की इस रैली में सीपीआई (एम) सीताराम येचुरी भी शामिल हुए हैं। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता को धोखा दिया है। सरकार के प्रति जनता के अंदर काफी रोष भरा हुआ है और इसीलिए लाखों की संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर जिंदगी को बचाना है तो मोदी सरकार को हटाना है, क्योंकि अच्छे दिन तभी आएंगे जब ये सरकार जाएगी। उन्होंने कहा कि 2019 में किसान विरोधी इस सरकार को हटाने की हम पूरी कोशिश करेंगे, ताकि एक बेहतर भारत बनाया जा सके। इस दौरान उन्होंने देशव्यापी आंदोलन का भी ऐलान किया।
ये है किसानों की मांग?
इस चार्टर में मांग की गई है कि रोज बढ़ रही कीमतों पर लगाम लगाई जाए, खाद्य वितरण प्रणाली की व्यवस्था को ठीक किया जाए, मौजूदा पीढ़ी को उचित रोजगार मिले, सभी मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी भत्ता 18,000 रुपया प्रतिमाह तय किया जाए। इसके अलावा इसमें ये बी कहा गया है कि मजदूरों के लिए बने कानून में मजदूर विरोधी बदलाव न किए जाएं, किसानों के लिए स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें लागू हों, गरीब खेती मजदूर और किसानों का कर्ज माफ हो।