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किसान आंदोलन: छठे दौर की बातचीत बुधवार को, उससे पहले भारत बंद कर किसान करेंगे शक्ति प्रदर्शन
Sun, 06 Dec 2020 03:59 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 06 Dec 2020 03:59 AM IST
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किसान आंदोलन
- फोटो : कुमार संजय
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आंदोलनकारी किसानों और सरकार के बीच पांचवे दौर की बातचीत शनिवार देर शाम बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। अगली बातचीत अब 9 दिसंबर को होगी।
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किसान नए कानूनों को खारिज कराने और न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी को कानूनी दर्जा दिलाने की मांग से एक कदम भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। जबकि सरकार इन दोनों बातों पर विचार करने को तैयार है।
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किसान नेताओं के साथ बातचीत में सरकार ने उनसे नए कृषि कानूनों की खामियों के बारे में और उन में प्रस्तावित सुधारों पर बिंदुवार बातचीत करने का प्रयास किया। सरकार की ओर से कृषि मंत्री ने अपने ठोस प्रस्ताव देने के लिए कुछ समय मांगा।
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पहले सरकार सोमवार को ही बात करने को तैयार थी लेकिन फिर उन्होंने बुधवार को बातचीत करने का प्रस्ताव रखा। कब तक सरकार कुछ और ठोस प्रस्ताव पर विचार कर सकती है।
लेकिन किसान नेता तीनों कृषि कानूनों को खारिज किए जाने से कम पर राजी नहीं हैं। फिर भी वे सार्वजनिक रूप से अड़ियल रुख अपनाते हुए दिखना भी नहीं चाहते इसीलिए वे अगले दौर की बातचीत के लिए राजी हो गए हैं।
यस या नो
शनिवार की बातचीत के दौरान किसान नेता एक समय चुप हो गए और अपने सामने कागज पर यस या नो लिख कर बैठ गए। यानी वे बात करने के लिए तैयार नहीं है। वे सरकार से सिर्फ हां या ना में जवाब चाहते हैं।
बैठक के बीच से निकलकर उन्होंने अपने साथियों से सरकार के प्रस्तावों पर विचार-विमर्श भी किया। लेकिन अंतत: वे अपने कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं हुए।
इससे पहले शनिवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ किसानों की समस्याओं को लेकर एक लंबी बातचीत की।
मंत्रियों ने उन्हें किसानों की मांगों और सरकार के प्रस्तावों के बारे में बताया। उन्होंने दिल्ली को किसानों द्वारा चारों ओर से घेरे जाने से उपजी परिस्थिति की भी समीक्षा की।
सरकार डीजल के दाम, मंडी समिति के टैक्स जैसी मांगों को मानने के लिए तैयार है। वहीं किसानों की दूसरी मांगों पर उसने विचार करने के लिए समय मांगा है। लेकिन किसान बिना किसी ठोस हल के वापस नहीं जाना चाहते।
भारत बंद मंगलवार को
इस बीच किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। किसानों के अलावा इस बंद को अन्य वर्गों ने भी समर्थन देने का फैसला किया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन किसानों के समर्थन में आठ दिसंबर के बाद से पूरे देश में अनिश्चितकालीन चक्का जाम करने की घोषणा की है।
आर-पार की लड़ाई
किसान नेताओं का कहना है कि इस बार वे आर या पार फैसला लेने की नीयत से आए हैं। जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी वह दिल्ली की सीमाओं से अपना जाम नहीं उठाएंगे। उनका कहना है हमारे पास 6 महीने की खाद्य सामग्री है।
किसानों ने ठुकराए सरकार के संशोधन प्रस्ताव
नए कृषि कानूनों पर किसानों और सरकार का टकराव जारी है। शनिवार को विज्ञान भवन में हुई बातचीत में किसानों ने सरकार के संशोधन प्रस्ताव फिर ठुकरा दिए। सरकार ने पांच संशोधनों का प्रस्ताव दिया लेकिन किसान 23 बदलाव चाहते थे।
बाद में किसानों ने सरकार के सामने कानून रद्द करने की मांग का ‘हां’ या ‘न’ में जवाब देने की शर्त रख दी। इसके चलते पांचवें दौर की बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई। अब नौ दिसंबर को सुबह 11 बजे फिर बातचीत होगी। इस बीच, किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है।
आंदोलन के दसवें दिन हुई बैठक में भी किसान कानून रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा दिलाने की मांग पर अड़े श्रळै। इससे पहले सरकार ने किसानों की आपत्तियों और उनमें प्रस्तावित सुधारों पर बिंदुवार जवाब दिया।
हालांकि किसानों के अड़ने पर केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ठोस प्रस्ताव के लिए कुछ समय मांगा। पहले सरकार सोमवार को बात करने को तैयार थी लेकिन फिर बुधवार का समय दिया। सूत्रों के मुताबिक सरकार डीजल के दाम, मंडी समिति जैसी मांगें मानने को तैयार है। वहीं, किसानों की दूसरी मांगों पर विचार के लिए समय मांगा है।
हालांकि किसान बिना ठोस हल वापस नहीं जाना चाहते। सरकार की ओर से बैठक में रेलमंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश शामिल थे। वहीं, 40 किसान संगठनों के नेता शामिल हुए।
हां या न पर अड़े किसानों का ‘मौन’
बैठक शुरू होते ही किसानों ने तीनों कानून रद्द करने की मांग क। इस पर कृषिमंत्री तोमर ने कहा, सरकार बदलाव को तैयार है चर्चा होनी चाहिए। इस पर किसानों ने कहा, चर्चा बहुत हो चुकी अब दो-टूक बताइए कानून वापस होंगे या नहीं? इसके बाद किसान नेताओं ने ‘मौन’ धारण कर लिया और हाथों में यस/नो लिखे कागज ले लिए। करीब आधा घंटे तक यह गतिरोध बना रहा।
किसानों ने दी बैठक छोड़ने की धमकी
वार्ता के दौरान एक समय किसानों ने कहा, अगर सरकार कानून रद्द नहीं करती तो बैठक छोड़ देंगे। हालांकि सरकार की ओर से कोशिश के बाद किसान मान गए और बैठक ढाई बजे फिर शुरू हुई। किसानों ने फिर सरकार की ओर से मिला खाना नहीं खाया। वे पानी, चाय और खाना साथ लेकर आए थे। बैठक के बाद किसानों ने कहा, हम आर या पार फैसला लेने की नीयत से आए हैं। जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होंगी हम दिल्ली की सीमा से नहीं हटेंगे। हमारे पास छह महीने की खाद्य सामग्री है।
बैठक से पहले पीएम के निवास पर मंथन
शनिवार को किसान संगठनों से चर्चा से पहले प्रधानमंत्री आवास पर अहम बैठक हुई। बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल मौजूद रहे। मंत्रियों ने पीएम को किसानों की मांगों और सरकार के प्रस्तावों की जानकारी दी। इस दौरान आंदोलन के चलते बनी स्थिति की भी समीक्षा हुई।
संयुक्त राष्ट्र ने भी किया किसानों का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी किसान आंदोलन का समर्थन किया है। गुटेरस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक है और अधिकारियों को उन्हें यह करने देना चाहिए।
उन्होंने कहा, मैं वही कहना चाहता हूं कि जो मैंने इन मुद्दों को उठाने वाले अन्य लोगों से कहा है। लोगों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार है और उन्हें यह करने देना चाहिए। इससे पहले कनाडा के पीएम जस्टिन त्रूदो और 32 ब्रिटिश सांसद किसानों का समर्थन कर चुके हैं। भारत के विदेशी नेताओं की टिप्पणियों को ‘भ्रामक’ और ‘गैर जरूरी’ बताने के बावजूद त्रूदो ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के समर्थन में दोबारा बयान दिया।
10 ट्रेन यूनियनों और पांच वामदलों ने आठ दिसंबर को प्रस्तावित किसानों के भारत बंद आह्वान का किया समर्थन
कृषि कानूनों के खिलाफ आठ दिसंबर को प्रस्तावित किसानों के भारत बंद का पांच वाम दलों ने समर्थन किया है। माकपा, भाकपा, भाकपा (माले), फॉरवर्ड ब्लॉक और आल इंडिया सोशलिस्ट पार्टी ने शनिवार को जारी संयुक्त बयान में कहा, हम किसान आंदोलन के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियाें और दुष्प्रचार की निंदा करते हैं। हम भारत बंद का समर्थन करते हैं और सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि वे भी समर्थन कर्रें।
दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी भारत बंद का समर्थन किया है। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मजदूर सभा, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर, सेल्फ-एम्प्लॉइड वुमेंस एसोसिएशन, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने साझा बयान में कृषि कानूनाें को वापस लेने की मांग की है।
अन्नदाता मुसीबत में, उनका साथ देना हमारा कर्तव्य: राहुल
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को भी किसान आंदोलन का समर्थन किया है। राहुल ने ट्वीट किया, बिना न्यूनत्तम समर्थन मूल्य और मंडी के बिहार के किसान बेहद मुसीबत में हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को इसी कुएं में धकेल दिया है। इस मुसीबत के वक्त देश के अन्नदाता का साथ देना हमारा कर्तव्य है।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता और बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, भाजपा सरकार सिर्फ सड़क पर होने वाले विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन की भाषा समझती है।
उन्होंने ट्वीट किया, हम चाहते थे तीनों कानूनों को संसद की स्थायी समिति में सलाह-मशविरे के लिए भेजा जाए। हम इसमें संशोधन चाहते थे लेकिन हमारे प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। विरोध करने वाले कांग्रेस सांसदों को संसद से निलंबित कर दिया गया। एजेंसी