फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Farmer protest prime minister Narendra Modi kisan andolan Santa Claus speech farmer bill msp apmc

किसानों के सांता क्लॉज नहीं बन पाए प्रधानमंत्री मोदी, एमएसपी पर भूल गए ये बात!

Fri, 25 Dec 2020 08:02 PM IST
दीप्ति मिश्रा अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Fri, 25 Dec 2020 08:02 PM IST
विज्ञापन
Farmer protest prime minister Narendra Modi kisan andolan Santa Claus speech farmer bill msp apmc
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Twitter

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों को लगभग 50 मिनट तक संबोधित किया। इस दौरान मोदी ने कृषि कानूनों से संबंधित किसानों की हर आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को किसानों का कानूनी अधिकार बनाए जाने की मांग पर कुछ भी नहीं कहा। प्रधानमंत्री के इस रवैये से किसान नाराज हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बिंदु पर अपना रुख स्पष्ट कर देना चाहिए था। इससे सरकार और किसानों के बीच वार्ता की एक रूपरेखा बन सकती थी।

विज्ञापन


प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह स्वीकार किया कि किसान आंदोलन की शुरुआत के समय से ही इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा शामिल था। कुछ किसानों को आशंका थी कि सरकार एपीएमसी मंडियों और एमएसपी की व्यवस्था खत्म करने की कोशिश कर रही है। इस आशंका को दूर करते हुए प्रधानमंत्री ने शुक्रवार के अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को बनाए रखेगी।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार, किसानों को उनके लागत का डेढ़ गुना एमएसपी मूल्य देना शुरू कर दिया है, जिससे किसान आज तक वंचित रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन नहीं कही ये बात 
दरअसल, केंद्र सरकार केवल 23 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। इसमें भी ज्यादातर केवल गेहूं और धान की दो ही प्रमुख फसलों की खरीद की जाती है। वर्तमान सरकार ने तिलहन और दलहन की फसलों की खरीद को भी बढ़ावा दिया है। लेकिन किसानों को यह मूल्य अभी भी केवल एपीएमसी मंडियों में ही मिलती है। खुले बाजार में यही फसलें अभी भी बहुत कम कीमतों पर खरीदी और बेची जाती हैं। किसान चाहते हैं कि खुले बाजार में फसलों की खरीद और बिक्री में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य को अनिवार्य किया जाए। किसान एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ भी नहीं कहा।


कितना पड़ेगा बोझ
किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि किसान लगातार एमएसपी को कानूनी अधिकार बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। वे खुले बाजार में भी एमएसपी को अनिवार्य बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार इस मांग को पूरा करने के लिए आगे नहीं बढ़ रही है जबकि इससे उसके ऊपर कोई बोझ भी नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि इस मांग को पूरा करने के बाद केवल 50 हजार रूपये ज्यादा का अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा और इसको भी निजी क्षेत्र के माध्यम से किया जाएगा। इसलिए सरकार को इस मांग को मान लेना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed