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Farmer Protest: क्या दिसंबर के पहले हफ्ते में अपने खेत खलिहानों की तरफ लौट सकते हैं किसान? मनाने की कोशिशें तेज
सार
देर रात तक कानून वापसी पर राष्ट्रपति की मुहर लग सकती है। 4 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन को खत्म करने का संकेत भी मिल सकता है। सरकार के रणनीतिकारों ने मोर्चा संभाल लिया है। अब सवाल यह है कि क्या बिना एमएसपी की गारंटी, शहीद किसानों को मुआवजा या मुकदमा वापसी के बगैर लौट जाएंगे किसान?
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किसान आंदोलन (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिना चर्चा के ही संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन संसद ने किसानों को तोहफा दे दिया। जिस शोर-शराबे के बीच बिना चर्चा के तीनों कृषि कानून पारित हुआ था, उसी तरह से बिना चर्चा के ही सदन ने इसे रद्द करने के विधेयक को मंजूरी दे दी। सोमवार को देर रात ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसे अपनी मंजूरी दे सकते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के रणनीतिकारों को 7 दिसंबर तक किसानों के खेत खलिहानों की तरफ लौट जाने की उम्मीद है।
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सूत्र बताते हैं कि इसके लिए तमाम चैनलों के जरिए किसान नेताओं से चर्चा के प्रयास हो रहे हैं। बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर से भी किसानों को आंदोलन समाप्त करके अपने खेत खलिहान की तरफ लौटने की पहल हो रही है। इसके लिए अकाल तख्त साहिब के संपर्क में हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी कहा कि किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, इसे वापस लेने की मांग कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने 19 नवंबर को घोषणा करके उनकी बात मान ली। 29 नवंबर को संसद के दोनों सदनों ने कानून को वापस लेने के विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। अब केवल किसानों की छोटी मांगे रह गई हैं और कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। बताते हैं पंजाब के कई किसान संगठन अब आंदोलन को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। 4 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा बुलाई गई बैठक में इसका संकेत भी मिल सकता है।
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आंदोलन को जारी रखना चाहते हैं राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत एमएसपी की गारंटी मिलने तक अभी आंदोलन को जारी रखने के मूड में हैं। आंदोलन को खत्म करने के बारे में अभी भारतीय किसान यूनियन के नेता कोई ठोस कार्य योजना नहीं बता पा रहे हैं। धर्मेन्द्र मलिक कहते हैं कि किसानों को आंदोलन जारी रखने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन पहले सरकार हमारी समस्याओं को ईमानदारी से सुनकर उस पर पहल करने की प्रतिबद्धता तो दिखाए। एमएसपी और आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को मुआवजा देने का मसला काफी गंभीर है।
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किसान नेता चौधरी हरपाल सिंह भी कहते हैं कि बिना इस मांग के आखिर किस मुंह से आंदोलन को समाप्त करके क्षेत्र में जाएंगे। हरपाल सिंह कहते हैं कि गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को भी मंत्रिमंडल से हटाया जाना चाहिए। किसान नेता गुरुनाम सिंह चढ़ूनी को भी अभी किसानों की तीन मांगों पर केन्द्र सरकार से गारंटी चाहिए। वहीं भाजपा के नेता आंदोलन को जारी रखने के पीछे राजनीतिक कारण बताते हैं। बिना चर्चा में इन नेताओं का कहना है कि राकेश टिकैत की राजनीतिक मंशा इस आंदोलन को अभी कुछ दिन और खीचने की है। ताकि समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के साथ उनके राजनीतिक हित सध सकें।
क्या टिकैत किसान नेताओं पर भारी पड़ रहे हैं?
वर्तमान किसान आंदोलन ने भाकियू के राकेश टिकैत का कद काफी बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री द्वारा कानून वापस लेने की घोषणा के बाद आंदोलन की सफलता के पीछे टिकैत द्वारा जनवरी महीने में उठाए गए भावुक कदम को काफी अहम माना जा रहा है। किसान आंदोलन के अंदरुनी सूत्र बताते हैं लखीमपुर खीरी की घटना के बाद आंदोलन का रुख थोड़ा दूसरे रास्ते पर जा रहा था, लेकिन अचानक फिर बड़ा यू-टर्न आ गया। प्रधानमंत्री की कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद आंदोलन को जारी रखने के लिए राकेश टिकैत फिर अड़ गए। पूरे आंदोलन में योगेन्द्र यादव की भूमिका भी अहम है। अब स्थिति यह है कि इस पूरे किसान आंदोलन से राकेश टिकैत की अनदेखी करना किसान नेताओं के लिए एक बड़ा रिस्क लेने जैसा है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की मुख्यमंत्री खट्टर से मुलाकात, दिया भरोसा
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट की। इस दौरान कैप्टन ने भरोसा दिया कि किसान आंदोलन के तमाम नेता उनके संपर्क में हैं। बताते हैं उनके बेटे रनिंदर सिंह ने भी केन्द्र सरकार के रणनीतिकारों को इसी तरह का भरोसा दिया है। कैप्टन के इस भरोसे को किसानों के साथ वार्ता में शामिल केन्द्र सरकार के एक मंत्री भी काफी अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा के कई किसान नेताओं को लग रहा है कि कानून वापसी किसानों के लिए सम्मानजनक स्थिति है। इसलिए अब सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर समिति बनाने की प्रतिबद्धता लेकर आंदोलन को समाप्त किया जाना चाहिए। वह कहते हैं कि उन्हें दिसंबर के पहले सप्ताह तक आंदोलन के खत्म होने की उम्मीद है।