{"_id":"5fee53e4f3e9b828d417376c","slug":"farmer-protest-against-farmer-bill-2020-withdrawal-of-law-and-msp-will-be-difficult-to-solve","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान आंदोलन: कानून वापसी और एमएसपी पर फंसा पेच सुलझाना होगा मुश्किल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
किसान आंदोलन: कानून वापसी और एमएसपी पर फंसा पेच सुलझाना होगा मुश्किल
Fri, 01 Jan 2021 05:16 AM IST
देव कश्यप
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 01 Jan 2021 05:16 AM IST
सार
- एमएसपी के मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार मांगेगी और समय।
- समिति बनाने के प्रस्ताव पर किसान संगठनों को राजी करने की होगी कोशिश।
विज्ञापन
प्रदर्शन करते किसान (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
किसान आंदोलन के संदर्भ में सरकार ने आधा विवाद सुलझाने का दावा किया है। हालांकि हकीकत यह है कि इस विवाद के मामले में अभी हाथी की पूंछ ही निकली है। जिन दो प्रमुख मुद्दों तीनों कृषि कानून की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी पर पेच फंसा है, उन मामलों में बीच का रास्ता निकालना सरकार के लिए आसान नहीं है। बीच का रास्ता निकालने के लिए सरकार में शुक्रवार से माथापच्ची का दौर शुरू होगा।
विज्ञापन
चार जनवरी को किसान संगठनों से होने वाली सातवें दौर की बातचीत के कुछ मामले में सरकार का रुख अभी से स्पष्ट है। सरकार कानून वापसी की मांग स्वीकार नहीं करेगी। इसके अलावा एमएसपी पर खरीद व्यवस्था को जारी रखने संबंधी कानूनी गारंटी देने के लिए समय दिए जाने की मांग करेगी। इससे पहले सरकार किसान संगठनों को इस विवाद के निपटारे के लिए समिति का गठन संबंधी प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए राजी करेगी।
विज्ञापन
तीनों कानून सरकार के लिए नाक का सवाल
सरकार के सूत्र के मुताबिक बुधवार की बैठक में ही कृषि मंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार कानूनों की वापसी की मांग नहीं मानेगी। कृषि मंत्री ने किसान संगठनों से तीनों कानूनों को रद्द करने के अलावा दूसरे विकल्प मांगे हैं। सरकार चाहती है कि किसान संगठन कानून रद्द करने के बदले कानून के उन प्रावधानों पर चर्चा करे, जिससे उसे समस्या है। सातवें दौर की बैठक में भी सरकार अपने इसी रुख पर कायम रहेगी।
विज्ञापन
एमएसपी व्यवस्था पर मंथन
सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर एमएसपी पर कोई ठोस पहल की जाए तो किसान संगठनों को तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग के प्रति रुख नरम करने के लिए राजी किया जा सकता है। सरकार के स्तर पर इस बात पर मंथन हो रहा है कि ऐसा कौन सा नया भरोसा दिया जाए, जिससे एमएसपी व्यवस्था जारी रहने का ठोस संदेश जाए। सरकार इस आशय का लिखित आश्वासन पहले ही दे चुकी है, जिसे किसान संगठनों ने ठुकरा दिया है। सरकार इस बैठक में किसानों की मांग पर विचार के लिए और समय मांगेगी।
एमएसपी संबंधी मांग पर क्या है उलझन?
दरअसल, एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने की राह में कई उलझने हैं। सबसे पहले इसके वित्तीय प्रभाव पड़ेंगे। सरकार को इससे जुड़े सभी पक्षों से बात करनी होगी। सवाल यह भी है कि सरकार दूसरे पक्ष को एक निश्चित कीमत से कम पर खरीद नहीं करने के लिए कैसे बाध्य कर सकती है। वह भी तब जब कृषि क्षेत्र में निवेश करने के लिए निजी क्षेत्र लालायित नहीं हैं। इसके अलावा एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने के बाद सरप्लस अनाज का क्या होगा। यह सवाल इसलिए कि सरकार भंडारण सहित अन्य कारणों से निश्चित मात्रा में ही अनाज खरीद सकेगी। फिर सरप्लस अनाज का क्या होगा?
माथापच्ची का दौर शुरू
कृषि मंत्रालय में एमएसपी पर नया प्रस्ताव देने पर माथापच्ची का दौर बृहस्पतिवार से शुरू हो गया है। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार या शनिवार को सातवें दौर की वार्ता की रणनीति बनाने के लिए सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर शुरू होगा। इन्हीं बैठकों में किसानों के सामने वार्ता के दौरान दिए जाने वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।