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सरकार ने आधी-अधूरी मानी बात, पूरी मानने तक जारी रहेगा किसान आंदोलन : कादियान
Wed, 30 Dec 2020 11:48 PM IST
देव कश्यप
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 30 Dec 2020 11:48 PM IST
सार
- 04 जनवरी की बातचीत में भी नतीजा निकलने के असार कम, लेकिन जाएंगे बात करने।
- बिजली अधिनियम 2020 और पराली पर किसानों की चिंताओं से सहमत, लेकिन अन्य पर गतिरोध बरकरार।
- आज की बातचीत में सरकार ने रखा सही संदेश बाहर जाने का ध्यान।
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कृषि मंत्री ने किसानों संग खाया खाना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केन्द्र सरकार और 40 संगठनों के किसान नेताओं की बातचीत आज भी किसान आंदोलन को खत्म करने का शुभ संदेश नहीं दे सकी। चार जनवरी को फिर किसान नेता और केन्द्र सरकार के मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पीयुष गोयल बातचीत की मेज पर बैठेंगे। किसान नेता हरमीत सिंह कादियान को अभी चार जनवरी को हल निकलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। हालांकि कादियान का कहना है कि हम सभी ने चार जनवरी को वार्ता में शामिल होने पर सहमति जताई है। इसके लिए दो और तीन जनवरी को किसान नेता आपस में रणनीतिक चर्चा करेंगे।
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आज क्या रहा?
केन्द्र सरकार का आज का रवैया पहले से नरम, बातचीत वाला रहा। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पीयुष गोयल और केन्द्र सरकार के अधिकारियों ने किसान नेताओं को ध्यान से सुना। केन्द्र सरकार ने बाहर बातचीत का सही संदेश जाने को लेकर पूरी संवेदनशीलता बरती। किसान नेताओं मे मनिजिंदर सिंह सिरसा को फोन करके 3.30 बजे लंगर (लंच) लेकर आने को कहा था। सिरसा सही समय पर लंगर लेकर पहुंच गए। इससे पहले भी हर दौर की बातचीत में किसान नेताओं ने लंगर का खाना-पीना लिया था।
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इस बार केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी रणनीति में बदलाव किया और किसानों के साथ लंगर का खाना खाया। बातचीत की मेज पर केन्द्र सरकार ने फिर साफ किया कि कृषि के तीनों कानून को रद्द करने का सवाल अनुचित है। सरकार किसानों को सुनेगी और जो भी उचित मांग होगी, उसके आधार पर कानून में संशोधन किया जाएगा। किसान नेताओं ने इस दौरान केन्द्र सरकार से बिन्दुवार अपना पक्ष रखा। किसान आंदोलन के दौरान शहीद (मत्यु) हुए किसानों के लिए न्याय और मुआवजे की भी मांग की। सरकार ने किसानों की बात मानते हुए कहा कि पराली जलाने के मामले में किसानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। दूसरा मसला विद्युत संशोधन विधेयक-2020 को लेकर भी सरकार ने किसानों की चिंता को मान लिया है।
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तीन मांग अभी माननी बाकी है
हरमीत सिंह कादियान अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहते हैं हमारी तीन मुख्य मांगे हैं। अभी इस पर सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है। इसमें तीनों कानूनों को रद्द करना, एमएसपी पर खरीद को सुनिश्चित करना आदि है। कादियान का कहना है कि जबतक इन मुद्दों का समाधान नहीं हो जाता, तबतक किसान आंदोलन में डटे रहेंगे। कादियान का कहना है कि केन्द्र सरकार को किसान की बात को गंभीरता से लेते हुए अपना हठ छोड़ देना चाहिए।
कृषि मंत्री को उम्मीद, 04 जनवरी को समाप्त हो जाएगा किसानों का प्रदर्शन
कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर किसान आंदोलन के जल्द खत्म को लेकर बहुत आशावान है। उनका मानना है कि चार जनवरी की वार्ता में हल निकल आएगा और किसान आंदोलन समाप्त कर देंगे। नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज भी किसानों से अपील की कि वह बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों को आंदोलन स्थल से घर भेज दें। इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है और उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। किसान नेताओं के प्रतिनिधि बताते हैं कि उन्होंने इसके लिए कृषि मंत्री को धन्यवाद दिया और कहा कि वह बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों का वरीयता के आधार पर ख्याल रख रहे हैं।