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किसान संगठन और सरकार दोनों लंबी लड़ाई के लिए तैयार, जारी है माइंडगेम
Wed, 23 Dec 2020 04:53 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 23 Dec 2020 04:53 AM IST
सार
- वार्ता की पेशकश के साथ जारी रखेगी कानून के समर्थन में अभियान।
- जरूरत पड़ने पर वार्ता समर्थक किसान संगठनों से करेगी बातचीत।
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किसानों का प्रदर्शन
- फोटो : PTI
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विस्तार
कृषि कानूनों पर सरकार और किसान संगठनों के बीच जारी खींचतान का दौर जल्द खत्म होने वाला नहीं है। सरकार की योजना आंदोलनरत किसान संगठनों को वार्ता की पेशकश करते रहने के साथ इन कानूनों के समर्थन में अभियान जारी रखने की है। इस बीच जरूरत पड़ने पर सरकार बातचीत का समर्थन करने वाले किसान संगठनों से वार्ता कर सकती है। हालांकि सरकार की योजना फिलहाल हड़बड़ी दिखाने की नहीं है।
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एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत की संभावना नहीं बन रही है। सरकार न तो कानून वापस लेने के लिए राजी होगी और न न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी देगी। जबकि आंदोलनरत किसान संगठनों की मुख्य मांगें यही हैं। जाहिर तौर पर वार्ता की मेज पर आने के लिए दोनों पक्षों में से एक को अपने रुख में नरमी लानी होगी। फिलहाल दूर-दूर तक इसके आसार नहीं हैं।
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फिलहाल दोनों तरफ से जारी है माइंडगेम
करीब एक महीने से जारी आंदोलन के बीच पांच दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। ऐसे में सरकार और किसान संगठनों के बीच माइंडगेम चल रहा है। दोनों पक्ष एक दूसरे के झुकने का इंतजार कर रहे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह तो बातचीत के लिए तैयार है, मगर किसान संगठन अपनी जिद पर अड़े हैं। सरकार हड़बड़ी के मूड में नहीं है। उसे उम्मीद है कि आंदोलन लंबा खिंचने के बाद किसान संगठन दबाव में आएंगे।
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आंदोलनरत किसान संगठनों को दबाव में लाने के लिए सरकार वार्ता समर्थक किसान संगठनों से अलग से बात कर सकती है। सरकारी रणनीतिकारों को लगता है कि नए कानूनों के समर्थन में चल रहा अभियान और सरकार के अपने रुख पर डटे रहने से किसान संगठन दबाव में आएंगे। इसके बाद कानूनों की वापसी और एमएसपी के इतर अन्य प्रावधानों पर बातचीत होगी।
किसान संगठन भी लंबी लड़ाई के लिए तैयार
सरकार की तरह आंदोलनरत किसान संगठनों ने भी लंबी लड़ाई की तैयारी की है। एक महीने से जारी आंदोलन में सरकार की इच्छा के अनुरूप बड़े मतभेद सामने नहीं आए। किसान संगठन यह मान कर चल रहे हैं कि लड़ाई लंबी खिंचेगी। बड़ी बात यह है कि किसानों में जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले संगठनों में अब तक फूट नहीं पड़ी है। कानूनों के पक्ष में सरकार को समर्थन करने वाले किसान संगठनों का कोई मजबूत जमीनी आधार नहीं है।
एक-दो दिन में हो सकती है बड़ी बैठक
सरकार की ओर से भावी रणनीति तय करने के लिए शीर्ष स्तर पर बुधवार या बृहस्पतिवार को बड़ी बैठक हो सकती है। इस विवाद का हल निकालने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह भी मोर्चे पर लगे हैं। सूत्रों ने बताया, सरकार को मंगलवार को वार्ता के संदर्भ में किसान संगठनों से जवाब की उम्मीद थी। अब जवाब न आने से अगले एक-दो दिनों में शीर्ष स्तर पर बैठक होगी।