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कृषि कानूनों का मुद्दा हल : सुप्रीम कोर्ट का पैनल सार्वजनिक कर सकता है रिपोर्ट
Sat, 20 Nov 2021 06:27 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 20 Nov 2021 06:27 AM IST
सार
शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल जे घनवट ने कहा, पैनल की रिपोर्ट किसानों के पक्ष में थी और अगले हफ्ते सोमवार को बैठक कर इसे सार्वजनिक किये जाने पर फैसला किया जाएगा। तीन सदस्यीय इस पैनल ने 19 मार्च को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कृषि कानूनों को लेकर किसानों व सरकारों के बीच चल रहे गतिरोध को शांत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल जल्द ही अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर सकता है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जा चुकी है। पैनल के एक सदस्य ने कहा, सरकार के कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले के साथ ही इस मुद्दे का हल हो गया। अब अगर सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट को जारी नहीं करता तो हम इसे सार्वजनिक मंच पर जारी कर सकते हैं।
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शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल जे घनवट ने कहा, पैनल की रिपोर्ट किसानों के पक्ष में थी और अगले हफ्ते सोमवार को बैठक कर इसे सार्वजनिक किये जाने पर फैसला किया जाएगा। तीन सदस्यीय इस पैनल ने 19 मार्च को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी। घनवट ने एक सितंबर को सीजेआई एनवी रमण को पत्र लिखकर इसे सार्वजनिक करने की मांग की थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
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घनवट ने कहा, अब जब पीएम मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान कर दिया है, इस रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं रह जाता। सुप्रीम कोर्ट को इसे सार्वजनिक कर देना चाहिए अगर ऐसा नहीं किया गया तो मैं इसे सार्वजनिक कर दूंगा। आखिर पैनल ने इसे तैयार करने में तीन महीने लगाए हैं, इसे यूं कूड़े की टोकरी में नहीं डाला जा सकता। वहीं पैनल के दूसरे सदस्य अशोक गुलाटी (कृषि अर्थशास्त्री और कृषि आयोग के पूर्व अध्यक्ष) ने कहा, यह सुप्रीम कोर्ट का विशेषाधिकार है कि वह रिपोर्ट को सार्वजनिक करे या नहीं। कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले के साथ ही इस रिपोर्ट का उद्देश्य भी समाप्त हो गया।
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भाजपा ने चुनावी फायदे के लिए किसानों के हितों की बलि चढ़ा दी : घनवट
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल के सदस्य और शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, पीएम मोदी ने किसानों की बेहतरी के बजाय राजनीति को चुना है। भाजपा ने अपने चुनावी फायदे के लिए किसानों के हितों की बलि चढ़ा दी।
घनवट ने कहा, हमारे पैनल ने सुझाव दिए थे जिससे गतिरोध खत्म हो सकता था, लेकिन पीएम मोदी ने उसके इस्तेमाल के बजाय पीछे हटने का फैसला लिया। वह सिर्फ चुनाव जीतना चाहते हैं और कुछ भी उनकी प्राथमिकता नहीं। इस फैसले के निशाने पर यूपी और पंजाब के विधानसभा चुनाव हैं। सरकार के इस फैसले से कृषि क्षेत्र में सुधारों और किसानों की बेहतरी के सभी रास्ते बंद हो गए।