कृषि कानून पर किसान और केंद्र की बातचीत विफल, बैठक में मौजूद नहीं थे कृषि मंत्री
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानून पर किसानों का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है। बुधवार को कृषि सचिव के साथ बैठक में संगठनों ने कानून पर चर्चा की लेकिन इस चर्चा का कोई समाधान नहीं निकला। 29 किसान संघों के नेता बैठक से वॉक आउट कर गए।
किसानों ने बाहर आकर कृषि कानून बिल की प्रतियां फाड़ीं। उनका कहना है कि इस बैठक में कृषि मंत्री ने शिरकत नहीं की, इस कारण इसका कोई महत्व नहीं रह गया था। किसानों ने बैठक से बाहर निकलकर इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
Delhi: Leaders of 29 farmer unions walk out of meeting with Agriculture Secretary to discuss the recently enacted #FarmLaws; tear copies of the laws outside Krishi Bhawan. pic.twitter.com/H88HPY8fSC— ANI (@ANI) October 14, 2020
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कानून को समझाने की कोशिश की, लेकिन हमारी मांगें नहीं सुनी
बैठक में शामिल किसान संगठनों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर इस बैठक के जरिए धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बैठक का आयोजन सिर्फ एक दिखावा मात्र था और कोई भी हमारी मांगें सुनने के लिए तत्पर नहीं दिखाई दिया।
मंत्रालय में बात करने के बाद किसान संगठन के प्रतिनिधि बाहर आए और उन्होंने बताया कि मंत्रालय के लोगों ने इस कानून को समझाने की कोशिश की लेकिन यह नहीं बताया कि विवादित विषयों को कानून से हटाया जाएगा या नहीं। एक किसान प्रतिनिधि ने बताया कि सचिव ने उनसे कहा कि वो आगे हमारी मांगों पर विचार करेंगे।
बैठक के दौरान हुआ विवाद
बैठक के दौरान कृषि सचिव और किसान नेताओं के बीच विवाद भी हो गया। गुस्साए किसान नेताओं ने कहा कि अब वो इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कभी दिल्ली नहीं आएंगे। उन्होंने कहा, अगर सरकार हमसे मिलना चाहती है तो कृषि मंत्री को पंजाब आना होगा। अब हम किसी भी सूरत में बाबुओं की धमकियां सुनने को दिल्ली नहीं आएंगे।
एक किसान प्रतिनिधि ने कहा कि हम बैठक से बाहर इसलिए निकल गए क्योंकि वहां कोई मंत्री ही नहीं थी, हम चाहते हैं कि यह कानून वापस लिया जाए। केंद्र सरकार की ओर से संजय अग्रवाल ने इस बैठक में हिस्सा लिया और संगठनों की बात सुनी।
इन मुद्दों को लेकर रहा है विवाद
बता दें कि जब से कानून संसद से पास हुआ है, तब से इस पर विवाद चल रहा है। नए कृषि कानूनों में मंडी से बाहर फसल बिक्री की खुली छूट, निजी कृषि को बढ़ावा देने जैसे प्रस्ताव लाए गए हैं। हालांकि, कई कृषि संगठन और राजनैतिक दल कानूनों को किसान विरोधी बता रहे हैं।
इसके अलावा किसानों की ओर से डर जताया गया है कि इस नए कानून से एमएसपी सिस्टम खत्म हो जाएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि यह गलत है, इससे एमएसपी सिस्टम खत्म नहीं होगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद विपक्ष की बातों में ना आने की अपील कई बार कर चुके हैं।