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बीमा घोटाला: बार काउंसिल ने निलंबित किए यूपी के 28 वकील, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई

Tue, 23 Nov 2021 05:04 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो/ एजेंसी, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/ एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 23 Nov 2021 05:04 AM IST
सार

काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वकीलों का निलंबन किया है। वकीलों के नाम प्रदेश बार काउंसिल को भेजकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ तीन महीने में जांच करने और रिपोर्ट बीसीआई को भेजने के भी निर्देश हैं। सभी मामलों की सुनवाई पूरी होने तक निलंबित रहेंगे।

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Fake motor insurance Claim Bar Council of India suspends 28 lawyers of UP acting on the directions of Supreme Court
बार काउंसिल ऑफ इंडिया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश में वकीलों की सबसे बड़ी संस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने फर्जी मोटर बीमा दावे दायर करने वाले उत्तर प्रदेश के 28 वकीलों को कदाचार के आरोप में निलंबित कर दिया। घोटाले के खुलासे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच सौंपी थी, जिससे बीमा कंपनियों को 300 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगने से बच गई।

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बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वकीलों का निलंबन किया है। वकीलों के नाम प्रदेश बार काउंसिल को भेजकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ तीन महीने में जांच करने और रिपोर्ट बीसीआई को भेजने के भी निर्देश हैं। सभी मामलों की सुनवाई पूरी होने तक निलंबित रहेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट में पांच अक्तूबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने पाया था कि एसआईटी ने यूपी के जिलों में जो 92 मामले दर्ज किए हैं, उनमें से 55 में 28 वकीलों के नाम शामिल हैं। इनमें से 32 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, अदालत में आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। पीठ ने सुनवाई के दौरान वकीलों पर कार्रवाई न होने पर गहरी नाराजगी भी जताई थी।
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1376 फर्जी दावे...जांच महज 250 की

  • एसआईटी गठन के बाद 1376 संदिग्ध दावों की शिकायत आई। अबतक महज ढाई सौ की जांच पूरी हो पाई है।
  • मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण एवं कामगार मुआवजा कानून के तहत बीमा कंपनियों व अलग-अलग अधिकरणों ने कुल 233 दावों को संदिग्ध या फर्जी पाते हुए 300 करोड़ रुपये से अधिक के दावे खारिज किए।


फर्जी मोटर बीमा दावा मामले की एसआईटी छह साल से कर रही जांच
उत्तर प्रदेश में फर्जी मोटर बीमा दावा दायर करने के फर्जीवाड़े की जांच छह साल से एसआईटी कर रही है। 2015 में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने आया था।  विभिन्न बीमा कंपनियों ने अलग-अलग अदालतों में फर्जी बीमा दावे का आरोप लगाते हुए मामले दर्ज किए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सात अक्तूबर 2015 को प्रदेश सरकार से एसआईटी गठित कर जांच करवाने के आदेश दिए थे।

सबसे अधिक मामले सहारनपुर के
फर्जी दावों के सबसे अधिक 12 मामले सहारनपुर में दर्ज हैं। मेरठ में नौ, मुरादाबाद सात, अलीगढ़ छह, गाजियाबाद-हापुड़ पांच-पांच, रायबरेली में तीन, इटावा व लखनऊ में दो-दो, अयोध्या, मैनपुरी, मुजफ्फरनगर व उन्नाव में एक-एक मामले दर्ज हैं।



प्रदेश काउंसिल से सहयोग नहीं
बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यूपी बार काउंसिल की मदद नहीं मिल रही है। पीठ ने एसआईटी को फर्जीवाड़े में शामिल वकीलों के नाम सीधे बीसीआई को भेजने के निर्देश दिए। एसआईटी ने उसी दिन ई-मेल से नाम उपलब्ध करा दिए। 19 नवंबर को बीसीआई ने वकीलों को निलंबित कर दिया।

एफआईआर में हैं ये वकील
सहारनपुर : इंदरसिंह गौतम, देशराजसिंह गौतम, रवि कुमार, सुधीर कुमार, जय सिंह, हेमंत कुमार खनिजो, अहबाब हसन।
अलीगढ़ : महेंद्र पाल सिंह, राकेश कुमार, कमल कुमार।
रायबरेली : संतोष कुमार निगम, सुशील कुमार त्रिपाठी।
मेरठ : चमन लाल, विकास सिंह, अरविंद सिंह भाटी, मोहम्मद रगीब।
मुजफ्फरनगर : निशुकांत शर्मा, मनोज।
इटावा : अजय सिंह, अतुल कुमार दीक्षित, अनिल कुमार गौड़।
गाजियाबाद : बलराम सिंह यादव, मोहन पाल रावत।
लखनऊ : अमित सोनकर, राजेश कुमार।
कानपुर : आशीष गर्ग।
हरिद्वार : श्रवण कुमार।
इसके अलावा, एक राकेश कुमार का नाम है, जिसके पते की पुष्टि अबतक एसआईटी नहीं कर पाई है।

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