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फर्जी बीमा दावे: यूपी बार काउंसिल को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- न्यायिक पेशे की गरिमा बनाएं रखें

Sat, 20 Nov 2021 10:10 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 20 Nov 2021 10:10 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि पांच अक्तूबर को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के खिलाफ उनकी कड़ी टिप्पणियों के बावजूद सुनवाई के दौरान बार की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ।

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Fake insurance claims: Supreme Court reprimanded UP Bar Council, said- Bar Council of Indias duty to restore glory of legal profession
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बीमा दावों के फर्जीवाड़े को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पेश नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को यूपी बार काउंसिल को फटकार लगाई। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वकालात के पेश की गरिमा बनाए रखना और उसकी चमक बहाल करना बार काउंसिल ऑफ इंडिया का दायित्व है। 

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि पांच अक्तूबर को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के खिलाफ उनकी कड़ी टिप्पणियों के बावजूद सुनवाई के दौरान बार की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ।
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पीठ ने कहा कि यूपी बार काउंसिल की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं है। फर्जी दावा याचिका दायर करना बहुत गंभीर मामला है। यह अंतत: पूरी संस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। कानून के पेशे को हमेशा से महान पेशा माना गया है, इसलिए अदालतों में फर्जी दावा याचिका दायर करने की बातें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी स्टेट बार काउंसिल व बार काउंसिल आफ इंडिया की यह जिम्मेदारी है कि वह न्यायिक पेशे की गरिमा बहाल करे। मौजूदा केस में बार काउंसिल आफ यूपी दुर्भाग्य से बिलकुल गंभीर नहीं है और वह बेहद असंवेदनशील नजर आई है। 

पीठ ने 16 नवंबर के आदेश में कहा था कि ऐसे में हमारे पास इसके सिवाए कुछ चारा नहीं है कि हम यूपी बार काउंसिल के अध्यक्ष व सचिव को अगली सुनवाई के दौरान मौजूद रहने व कोर्ट की मदद करने को कहें। 

एसआईटी ने 28 वकीलों को नामजद किया
मामले में शीर्ष कोर्ट ने एसआईटी द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट का भी अवलोकन किया। 7 अक्तूबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार एसआईटी का गठन किया गया था। स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक यूपी के विभिन्न जिलों में 92 आपराधिक केस दायर किए गए हैं। इनमें से 55 मामलों में 28 वकीलों को आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। 32 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है। 


बाकी मामलों में जांच लंबित है। एसआईटी ने यह भी कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एसआईटी को संदिग्ध दावों की जांच के भेजे गए विभिन्न बीमा कंपनियों के 233 संदिग्ध दावों को खारिज कर दिया गया है। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल द्वारा तीन अरब रुपये से ज्यादा के दावे की याचिकाओं को निरस्त कर दिया गया। 

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