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MEA: ‘बांग्लादेश में बाढ़ को लेकर सीएनएन की रिपोर्ट गुमराह करने वाली’, विदेश मंत्रालय ने सिरे से किया खारिज

Sat, 31 Aug 2024 03:45 AM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Sat, 31 Aug 2024 03:45 AM IST
सार

बांग्लादेश में आई बाढ़ में भारत की भूमिका बताने वाली सीएनएन की रिपोर्ट विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह रिपोर्ट तथ्यहीन और गुमराह करने वाली है।

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Factually not correct, narrative misleading: MEA on reports on Bangladesh floods
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में हाल ही में आई बाढ़ में भारत की भूमिका होने संबंधी सीएनएन की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट में किए गए दावे गुमराह करने वाले और तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

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दरअसल, सीएनएन की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत-बांग्लादेश सीमा के पास फेनी के लोगों ने नई दिल्ली पर त्रिपुरा राज्य के डंबूर बांध से बिना किसी चेतावनी के पानी छोड़ देने का आरोप लगाया है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमने बांग्लादेश में बाढ़ की स्थिति पर सीएनएन की रिपोर्ट देखी है। रिपोर्ट भ्रामक है और यह भारत को किसी न किसी तरह बाढ़ के लिए जिम्मेदार है। यह रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है और स्थिति को स्पष्ट करने के लिए भारत सरकार की जारी प्रेस विज्ञप्तियों में उल्लिखित तथ्यों की अनदेखी करती है। 
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रिपोर्ट में इस बात को भी नजरअंदाज किया गया है कि जल संसाधन प्रबंधन के लिए मौजूदा संयुक्त तंत्र के माध्यम से दोनों देशों के बीच डाटा और महत्वपूर्ण सूचनाओं का नियमित और समय पर आदान-प्रदान होता है।

पिछले कुछ दिनों में कुछ रिपोर्टों से पता चला है कि बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में बाढ़ भारत में एक बांध के गेट खोलने के कारण हुई, जिसके कारण भारत विरोधी भावनाएं भड़क गईं। जयसवाल ने कहा कि पूर्वी त्रिपुरा और पूर्वी बांग्लादेश में बाढ़ लगातार और अत्यधिक बारिश के कारण हुई। उन्होंने जल बंटवारे, जल संसाधन प्रबंधन और बाढ़ प्रबंधन पर कहा, "भारत और बांग्लादेश के बीच कई वर्षों से स्थापित प्रक्रियाएं हैं।"


जयसवाल ने कहा, "54 नदियाँ हैं जिन्हें हम साझा करते हैं, संस्थागत तंत्र जो हमारे पास है, वह काफी समय से अस्तित्व में है। स्थापना प्रक्रिया के हिस्से के रूप में हम बांग्लादेश के साथ समय पर और नियमित आधार पर डेटा का आदान-प्रदान करते रहे हैं।" 

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