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जुकरबर्ग ने माफी मांगी, माना- विश्वासघात हुआ, कहा-भारत में चुनाव के लिए अभेद्य होगा फेसबुक

Fri, 23 Mar 2018 05:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 23 Mar 2018 05:09 AM IST
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Facebook data leak matter: Mark Zuckerburg accepts his mistake and wrote about changes on fB
mark zuckerberg

डाटा लीक मामले पर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने अपनी चुप्पी को तोड़ते हुए गलती को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि यूजर्स का डाटा सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी हमारी है। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं तो हमें आपके लिए काम करने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह विश्वास में सेंध लगाने जैसा है। यूजर्स किसी भी सोशल साइट के साथ जानकारी साझा करते हुए यह विश्वास रखते हैं कि उनकी जानकारी की सुरक्षा हम करेंगे। 

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अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से जुकरबर्ग ने लिखा कि मैं यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि आखिर ऐसा कैसे हुआ। हम यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसा न हो। जकरबर्ग ने यूजर्स के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए जाने की बात भी कही है।  
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अपने टाइमलाइन पर उन्होंने समझाया कि साल 2013 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चर एलेक्जेंडर कोगन ने क्विज एप का निर्माण किया था। इस एप्लीकेशन को करीब  3 लाख लोगों ने इंस्टॉल किया था। इसके जरिए यूजर्स के पर्सनल डाटा का इस्तेमाल गया। यहां न सिर्फ उन 3 लाख लोगों की जानकारियों को शेयर किया गया बल्कि उनकी दोस्तों की जानकारी में भी सेंध लगाई गई। 

क्या है मामला

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स और ब्रिटेन के ऑब्जर्वर की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ है कि ब्रिटेन की कैंब्रिज एनालिटिका नामक कंपनी ने फेसबुक के पांच करोड़ यूजर्स के बारे में जानकारियां का बिना उनके अनुमति के दुरुपयोग किया। यह सब 2016 के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति बनवाने के लिए किया गया। कंपनी ने इन जानकारियों के आधार पर एक ऐप के जरिए वोटरों के व्यवहार की भविष्यवाणी की थी। मीडिया में यह खुलासा कैंब्रिज एनालिटिका के ही एक कर्मचारी क्रिस्टोफर वाइली ने किया है, लेकिन उसके बाद से वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।


किसने बनाया था यह ऐप

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान के प्रोफेसर अलेक्सांद्र कोगन की कंपनी ग्लोबल साइंस रिसर्च ने पर्सनालिटी पर शोध करने के लिए 2014 में ‘दिसइजयोरडिजिटललाइफ’ नाम का एक ऐप बनाया था। फेसबुक के 2.70 लाख यूजर्स ने इस ऐप को डाउनलोड किया, लेकिन कंपनी ने उनके दोस्तों की जानकारियों को भी हासिल कर लिया और इस तरह उसके पास 50 करोड़ यूजर्स का आंकड़ा इकट्ठा हो गया।

उन आंकड़ों का क्या हुआ

ग्लोबल साइंस रिसर्च ने यह सारी जानकारी कैंब्रिज एनालिटिका को दे दी, जिसने इसका इस्तेमाल न सिर्फ अमेरिका के चुनाव में वोटरों को प्रभावित करने के लिए किया बल्कि यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने के जनमत संग्रह पर भी असर डाला। यह आरोप लगने के बाद कंपनी के सीईओ अलेक्सांद्र निक्स को निलंबित कर दिया गया है।
 

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