बाघों पर रखी जाएगी ड्रोन और जीपीएस से नजर
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बाघों का ख्याल रखने के लिए अब उनपर ड्रोन्स और जीपीएस से नजर रखी जाएगी। कई दिनों तक बाघों का पता नहीं चलने की वजह से परेशान रहने वाले राजस्थान के सरिसका टाइगर्स रिजर्व में ड्रोन्स और जीपीएस का इस्तेमाल किया जाएगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक टाइगर रिजर्व के डिप्टी फॉरेस्ट ऑफिसर(डीएफओ) बालाजी काइरी ने कहा कि बाघों पर नजर रखने के अलावा हम यह भी देखें पाएंगे कि गार्ड्स तैनात किए गए स्थान पर मौजूद हैं या नहीं। ट्रायल अभी रिजर्व के दो रेंज में चल रहा है।
उन्होंने बताया कि बाघों का अक्सर कई दिन तक कुछ पता नहीं चल पाता। इससे बाघों के स्वास्थ्य की स्थिति चेक करने में मुश्किल होती है। रिजर्व में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां वाहन जाना कठिन है। इसलिए बाघों का पता नहीं चलता कि वे किसी पुलिया के नीचे हैं या किसी मांद में हैं।
ड्रोन छोटे हेलिकॉप्टर की तरह है
काइरी ने कहा,'इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन का वजन एक किलोग्राम है और उसमें कैमरे हैं। यह एक छोटे हेलिकॉप्टर की तरह है जो 200 मीटर ऊंचाई तक उड़ सकता है। मोबाइल ऐप की मदद से अधिकारी बाघों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।'
सरिसका टाइगर्स रिजर्व में बाघों पर निगाह रखने के लिए छह ड्रोन के अलावा 50 एंड्रॉयड फोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि गार्ड्स के पास ये फोन होंगे। वे बाघ की तस्वीरें खींचकर विशेष रूप से तैयार किए गए ऐप पर अपलोड करेंगे।
रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आर एस शेखावत ने कहा,'अगर किसी जानवर को मेडिकल सहायता की जरूरत होगी तो ड्रोन की मदद से हम उस तक पहुंच जाएंगे। इससे हमें रिकॉर्ड रखने में भी मदद मिलेगी।'