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भारतीय नेताओं की जासूसी से चीन का इनकार, पर पूरा सच सामने लाएगी यह समिति

Thu, 17 Sep 2020 05:51 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 17 Sep 2020 05:51 AM IST
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External affairs minister S jaishankar says, Government raised the issue of spying of Indian leaders by Chinese company in front of China
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : ANI

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के कारण लगातार तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस तनाव के बीच चीन द्वारा भारत के खिलाफ हर तरह की साजिश रचने की कोशिश की जा रही है। कभी अपनी कंपनियों द्वारा भारत के नेताओं की जासूसी कराना तो कभी सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती करना। जासूसी की जानकारी मिलने के बाद भारत सरकार ने इस मुद्दे को चीन के राजदूत के समक्ष उठाया। हालांकि चीन ने जासूसी करने या कराने की बात से इनकार किया है। 

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यह जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल को एक पत्र लिखकर दी है। इसके साथ ही जासूसी कराए जाने का सच जानने के लिए सरकार ने नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी को-ऑर्डिनेशन के तहत एक विशेषज्ञों की समिति भी गठित कर दी है।
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जयशंकर ने पत्र में कहा है कि इस मामले को चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया गया है। मंत्री ने वेणुगोपाल को बताया, 'इस मामले को विदेश मंत्रालय ने चीन के राजदूत के समक्ष पुरजोर तरीके से उठाया। बीजिंग में हमारे दूतावास ने इसे चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष भी उठाया। इसके जवाब में चीनी पक्ष ने कहा कि शेनजेन जेन्हुआ एक निजी कंपनी है।
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उन्होंने कहा, 'चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संबंधित कंपनी और चीन सरकार के बीच कोई संबंध नहीं है। जयशंकर का यह बयान वेणुगोपाल द्वारा इस मामले को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाने के बाद आया है।

जयशंकर ने पत्र में बताया कि शेनजेन जेन्हुआ के एक प्रतिनिधि ने कहा है कि डेटा मुक्त स्रोत (ओपन सोर्सेज) से लिए गए हैं। मंत्री ने कहा कि कंपनी ने गोपनीय सूत्रों से निजी जानकारियां हासिल किए जाने की बात से इनकार किया है।

विशेषज्ञ समिति का गठन
वहीं, सरकार ने नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी को-ऑर्डिनेशन के तहत विशेषज्ञों की एक समिति का गठन कर दिया है जो चीन की कंपनी शेनजेन जेन्हुआ पर भारत की प्रमुख हस्तियों की जासूसी मामले की जांच करेगी। यह कमेटी जासूसी की इन खबरों के प्रभावों का आकलन करेगी और इस बात का भी पता लगाएगी कि क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार से कानून का उल्लंघन हुआ है। कमेटी को 30 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

कांग्रेस ने चीनी कंपनी की ओर से भारतीयों की जासूसी का मुद्दा उठाया

कांग्रेस ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों में चीनी कंपनी द्वारा 10 हजार प्रमुख भारतीय नागरिकों की जासूसी का मुद्दा उठाया। पार्टी ने सरकार से डिजिटल हमले से निपटने के लिए अभेद्य सुरक्षा की दीवार (फायरवॉल) बनाने की मांग की।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और राजीव सातव के शून्यकाल में इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर चिंता जताने को लेकर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने संसदीय कार्यमंत्री से कहा कि वह इस चिंता को संबंधित मंत्री तक पहुंचा दें। वह इसकी सच्चाई का पता लगाएं और देखें कि इस पर क्या किया जा सकता है।


उधर, लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कोरोना वायरस फैलाने के पीछे चीन का ही हाथ है। साथ ही कहा कि लद्दाख में अतिक्रमण और और डिजिटल दखलंदाजी में भी चीन का ही हाथ है। हम चीन के चंगुल में हैं। क्या सरकार इससे अवगत है? हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा छिन्न-भिन्न हो चुकी है। चौधरी ने आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद से अनुरोध किया कि इस खतरे से निपटने के लिए अभेद्य सुरक्षा की दीवार बनाएं।


 

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