इंडिया ग्लोबल वीक 2020 में बोले विदेश मंत्री, भारत-चीनी सेना ने एलएसी पर पीछे हटना शुरू किया
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देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को इंडिया ग्लोबल वीक 2020 बैठक में ऑनलाइन हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद समेत कोरोना जैसे कई मामलों पर अहम जानकारियां साझा की।
चीन और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बात करते हुए उन्होंने कहा, 'हमनें पीछे हटने की जरुरत को महसूस किया और उसपर सहमति बनाई, क्योंकि दोनों देशों की सेना बेहद करीब आ गई थीं। पीछे हटने पर सहमति बनने के बाद इसकी शुरुआत हो गई है और इसपर काम तेजी से चल रहा है।
We have agreed on the need to disengage because troops are deployed very close to each other. Disengagement & de-escalation process has been agreed & it has just commenced. It is very much a work in progress: External Affairs Minister, S Jaishankar on India-China border issue pic.twitter.com/Y0Tipa2AQ2
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 11, 2020
विदेश मंत्री ने कोरोना की स्थिति पर कहा, 'बहुत सारे ट्रेंड जो हमने कोरोना वायरस से पहले देखे थे, उनमें कोविड-19 के बाद दुनियाभर में तेजी आ सकती है। उदाहरण के लिए, छह महीनों में, हमने कई देशों को राष्ट्रवादी व्यवहार करते हुए देखा है। जयशंकर ने कहा, 'मैं एक ऐसी दुनिया देख रहा हूं, जहां बहसें तेज होंगी। मुझे लगता है कि विश्वास के मुद्दे होंगे जो उठाए जाएंगे। लचीले आपूर्ति श्रृंखला पर प्रश्न होंगे। दुनिया अब और कठिन होने जा रही है।
उन्होंने कोविड-19 पर बात करते हुए कहा, 'कोरोना महामारी को देखते हुए हमने देश में बहुत जल्दी ही लॉकडाउन लागू किया। हां,हमारे यहां केस अभी ज़्यादा हैं लेकिन अभी जनसंख्या के अनुपात में इतना ज़्यादा नहीं है। हमारे यहां रिकवरी रेट 61 प्रतिशत है। हम काफी तैयारी कर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने भारत-अमेरिका के संबंधों पर कहा, 'पिछले चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों-डोनाल्ड ट्रंप, बराक ओबामा, जॉर्ज बुश और बिल क्लिंटन के बारे में सोचें तो आप सहमत होंगे कि एक बात जिस पर वे सहमत थे वह है भारत का महत्व और उस रिश्ते को मजबूत करने की आवश्यकता।
जयशंकर ने कहा, 'हो सकता है कि इसमें से कुछ हमारा आकर्षण हो लेकिन मुझे लगता है कि यह भी उनकी सोच है। हमारे पास संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक बहुत मजबूत राजनीतिक, रणनीतिक, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, आर्थिक और रक्षा संबंध हैं।