फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Explainer: Why Did Kriti Sanon Approach Court? What Are Personality Rights and Why Are Challenges Rising?

एक्सप्लेनर: कृति सेनन ने क्यों खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, क्या हैं पर्सनैलिटी राइट; कैसे बढ़ीं चुनौतियां?

Sat, 17 Oct 2026 05:45 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sat, 17 Oct 2026 05:45 PM IST
विज्ञापन
सार

कृति सेनन के पर्सनैलिटी राइट से जुड़े मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किसी सेलिब्रिटी की पहचान पर कानूनी अधिकार कितना है। एआई के दौर में नाम, चेहरा और आवाज के अनधिकृत इस्तेमाल के मामले बढ़ रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या मामला है और पर्सनैलिटी राइट आखिर होती क्या है।

loader
Explainer: Why Did Kriti Sanon Approach Court? What Are Personality Rights and Why Are Challenges Rising?
क्या हैं पर्सनैलिटी राइट? - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अभिनेत्री कृति सेनन ने अपने पर्सनैलिटी राइट की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पर्सनैलिटी राइट से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इनके कानूनी दायरे की व्यापक समीक्षा जरूरी है।



ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला? क्या हैं पर्सनैलिटी राइट? क्या है पब्लिसिटी राइट? सेलिब्रिटी अपने व्यावसायिक हितों की सुरक्षा कैसे करते हैं? एआई कैसे बन रहा है पर्सनैलिटी राइट के लिए चुनौती?

क्या है पूरा मामला?

शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कृति सेनन की ओर से पेश अधिवक्ता प्रवीण आनंद से पर्सनैलिटी राइट पर विस्तृत शोध सामग्री और अदालती फैसलों का संकलन पेश करने को कहा। अदालत यह समझना चाहती है कि किसी व्यक्ति की पहचान के किन पहलुओं को कानूनी सुरक्षा मिल सकती है और ऐसे मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट के बौद्धिक संपदा प्रभाग (आईपीडी) के अधिकार क्षेत्र में आती है या नहीं।

कृति सेनन के वकील ने बताया कि पर्सनैलिटी राइट में किसी व्यक्ति का नाम, आवाज, चेहरा, तस्वीरें, छवि और वीडियो शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बिना अनुमति किसी व्यक्ति की पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा भी उठाया। अदालत ने इस विषय पर प्रासंगिक न्यायिक फैसलों और शोधपत्रों के साथ कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी मांगी है। मामले में अगली सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी।

कृति सेनन
कृति सेनन - फोटो : Amar Ujala

क्या हैं पर्सनैलिटी राइट?

'रिथिंकिंग पर्सनैलिटी राइट्स: द इंटरप्ले ऑफ पब्लिक इंटरेस्ट एंड इंडिविजुअल प्रोटेक्शन' नाम के शोधपत्र के अनुसार, भारत में पर्सनैलिटी राइट को किसी एक कानून में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। ये अधिकार सामान्य विधि यानी कॉमन लॉ के माध्यम से विकसित हुए हैं और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 में दिए गए अधिकारों से जुड़े हैं।

आसान भाषा में, पर्सनैलिटी राइट किसी व्यक्ति को अपनी पहचान के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखने का अधिकार देते हैं। इसमें उसका नाम, चेहरा, आवाज, हस्ताक्षर और पहचान से जुड़ी अन्य विशेषताएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य किसी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल और व्यावसायिक शोषण को रोकना है।

पर्सनैलिटी राइट दूसरे संपत्ति अधिकारों से कैसे अलग हैं?

पर्सनैलिटी राइट पारंपरिक संपत्ति अधिकारों से अलग हैं। पेटेंट और कॉपीराइट जैसे अधिकार आमतौर पर किसी व्यक्ति की मेहनत, कौशल या रचनात्मकता से जुड़ी रचनाओं और आविष्कारों को सुरक्षा देते हैं। इसके विपरीत, पर्सनैलिटी राइट किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े होते हैं।

शोधपत्र में दार्शनिक जॉन लॉक के श्रम-आधारित संपत्ति सिद्धांत का भी उल्लेख है। इस सिद्धांत के अनुसार, व्यक्ति को अपनी मेहनत से अर्जित चीजों का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, किसी सेलिब्रिटी की पहचान का व्यावसायिक मूल्य केवल उसकी मेहनत से नहीं, बल्कि उसकी विशिष्टता और लोगों के बीच उसकी लोकप्रियता से भी बनता है।

पर्सनैलिटी राइट
पर्सनैलिटी राइट - फोटो : Amar Ujala

किसी सेलिब्रिटी की पहचान का व्यावसायिक मूल्य कैसे बनता है?

किसी सेलिब्रिटी की लोकप्रियता में उसकी प्रतिभा और मेहनत के साथ जनता की भी अहम भूमिका होती है। लोग उसका काम देखते हैं, उसे पसंद करते हैं, उससे जुड़ी सामग्री देखते हैं और उसके नाम से जुड़े उत्पाद खरीदते हैं। इससे उसकी पहचान का व्यावसायिक मूल्य बढ़ता है।

इस तरह किसी व्यक्ति की पहचान विज्ञापन और कारोबार में इस्तेमाल होने वाली एक व्यावसायिक संपत्ति बन सकती है। शोधपत्र का तर्क है कि सेलिब्रिटी की लोकप्रियता व्यक्ति और समाज, दोनों की भागीदारी से बनती है। इसलिए पर्सनैलिटी राइट की सुरक्षा करते समय जनता की भूमिका को भी ध्यान में रखना चाहिए।

क्या है पब्लिसिटी राइट?

पब्लिसिटी राइट यानी पहचान के व्यावसायिक इस्तेमाल पर नियंत्रण का अधिकार किसी व्यक्ति को अपनी पहचान के व्यावसायिक उपयोग को नियंत्रित करने की सुरक्षा देता है। भारतीय अदालतों ने विभिन्न मामलों में इस अधिकार को मान्यता दी है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी किसी अभिनेता की तस्वीर का इस्तेमाल अपने उत्पाद के विज्ञापन में करना चाहती है, तो अभिनेता अपनी पहचान के इस इस्तेमाल को नियंत्रित करने का अधिकार रख सकता है। इसका संबंध इस बात से है कि उसकी पहचान का इस्तेमाल कब, कहां और किस तरह किया जाए।

पर्सनैलिटी राइट
पर्सनैलिटी राइट - फोटो : Amar Ujala

सेलिब्रिटीज के पर्सनैलिटी राइट से जुड़े प्रमुख मामले

अमिताभ बच्चन (2022): अमिताभ बच्चन ने अपने नाम, आवाज, तस्वीर और अन्य पहचान से जुड़े पहलुओं के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 25 नवंबर 2022 को अदालत ने उनके पक्ष में अंतरिम आदेश देते हुए कुछ पक्षों को उनकी पहचान का इस्तेमाल करके अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रचार करने से रोका। 

अनिल कपूर (2023): अनिल कपूर ने अपने नाम, तस्वीर, आवाज, संवाद बोलने के अंदाज और अन्य व्यक्तित्व संबंधी विशेषताओं के दुरुपयोग के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। 20 सितंबर 2023 को अदालत ने उनके पर्सनैलिटी राइट की रक्षा के लिए अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की। आदेश में एआई, मशीन लर्निंग, डीपफेक और फेस मॉर्फिंग जैसी तकनीकों के जरिए उनकी पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल की भी बात कही गई थी।

जैकी श्रॉफ (2024): जैकी श्रॉफ ने अपने नाम, आवाज, तस्वीर और व्यक्तित्व से जुड़ी विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 15 मई 2024 को अदालत ने कई पक्षों को उनकी पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना करने से रोका। आदेश में एआई चैटबॉट के जरिए उनकी पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल का मामला भी शामिल था। 

अरिजीत सिंह (2024): अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज, गायकी की शैली, नाम, तस्वीर और अन्य व्यक्तित्व संबंधी विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। 26 जुलाई 2024 को अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें एआई से तैयार आवाज, डिजिटल अवतार और डीपफेक सहित तकनीकों के जरिए उनकी पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश शामिल थे।

ऐश्वर्या राय बच्चन (2025): ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान से जुड़े अन्य पहलुओं के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। 9 सितंबर 2025 के आदेश में अदालत ने कहा कि उनकी अनुमति के बिना उनकी पहचान का इस्तेमाल या व्यावसायिक दोहन उनके पर्सनैलिटी राइट का उल्लंघन हो सकता है और इस पर रोक लगाई जा सकती है।

एआई से क्या खतरा?
एआई से क्या खतरा? - फोटो : Amar Ujala

एआई कैसे बन रहा है पर्सनैलिटी राइट के लिए चुनौती?

 'एआई इनोवेशंस एंड देयर इम्पैक्ट ऑन पर्सनैलिटी राइट्स: अ क्रिटिकल रिव्यू ऑफ इंडियाज इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी फ्रेमवर्क' नाम के शोधपत्र के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल ने पर्सनैलिटी राइट की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ा दी हैं। एआई की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और हाव-भाव की नकल कर डिजिटल रूप तैयार किए जा सकते हैं। डीपफेक वीडियो और कृत्रिम आवाज के जरिए किसी व्यक्ति को ऐसी बातें कहते या ऐसे काम करते हुए दिखाया जा सकता है, जो उसने वास्तव में नहीं किए। इससे उसकी पहचान और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। 

भारत में एआई कंटेंट को लेकर सरकार ने क्या बदला?

एआई से तैयार फर्जी ऑडियो, वीडियो और दूसरे सिंथेटिक कंटेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने 6 अक्तूबर को नई गाइडलाइन जारी की। इसमें सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को एआई से बनाए गए भ्रामक और गैरकानूनी कंटेंट को लेकर सतर्क रहने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
नियमों के तहत एआई से बनाए गए कंटेंट के लिए स्पष्ट लेबल और ट्रेस किए जा सकने वाले मेटाडेटा की व्यवस्था की गई है। इसका मकसद यूजर को यह पहचानने में मदद करना है कि कोई कंटेंट एआई या दूसरी सिंथेटिक तकनीक की मदद से तैयार किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed