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Hindi News ›   India News ›   Explainer: Light tank Zorawar goes through test trial likely to inducted into Army by 2027 Know all about it

Zorawar Tank: चीन से टक्कर लेने के लिए तैयार किया गया लाइट वेट टैंक 'जोरावर'; जानें इसका गलवान से क्या कनेक्शन

Sun, 07 Jul 2024 03:05 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Sun, 07 Jul 2024 03:05 PM IST
सार

साल 2020 में चीन के साथ गलवान में हुई खूनी भिड़ंत के बाद भारतीय सेना को ऊंचे पहाड़ी इलाकों के लिए लाइट टैंक की जरूरत थी। उस समय चीन ने अपने कब्जे वाले तिब्बत से सटे लद्दाख बॉर्डर पर ZTQ टी-15 लाइट टैंक तैनात कर दिए थे। 

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Explainer: Light tank Zorawar goes through test trial likely to inducted into Army by 2027 Know all about it
लाइट वेट टैंक जोरावर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय सेना के पास जल्द ही लाइट वेट (हल्के वजन वाला) टैंक जोरावर (Zorawar) होगा। दरअसल, शनिवार को डीआरडीओ ने गुजरात के हजीरा में अपने हल्के युद्धक टैंक जोरावर एलटी (Zorawar Tank) की झलक दिखाई। डीआरडीओ ने इस टैंक को लार्सन एंड टूब्रो के साथ मिलकर तैयार किया है। इस टैंक को रिकॉर्ड दो सालों में तैयार किया गया है।

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क्यों पड़ी जरूरत?
साल 2020 में चीन के साथ गलवान में हुई खूनी भिड़ंत के बाद भारतीय सेना को ऊंचे पहाड़ी इलाकों के लिए लाइट टैंक की जरूरत थी। उस समय चीन ने अपने कब्जे वाले तिब्बत से सटे लद्दाख बॉर्डर पर ZTQ टी-15 लाइट टैंक तैनात कर दिए थे। इसके बाद भारत को भी ऐसे हल्के टैंक चाहिए थे, लेकिन भारत को टी-72 जैसे भारी टैंक तैनात करने पड़े थे। भारतीय सेना ने करीब 200 टैंकों को हवाई मार्ग से लद्दाख पहुंचाया था।
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अभी हाल में पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी में सासेर ब्रांगसा इलाके में नदी में टैंक अभ्यास के दौरान रूसी टी-72 टैंक रात में नदी पार कर रहा था। श्योक नदी में अचानक जलस्तर बढ़ गया, जिसके कारण टैंक फंस गया, जिसमें जेसीओ समेत पांच जवान शहीद हो गए थे। ऐसे में सेना को जल्द से जल्द हल्के टैंक की जरूरत थी। जोरावर अपने हल्के वजन और एंफीबियस क्षमताओं के चलते यह टैंक भारी वजन वाले टी-72 और टी-90 टैंकों की तुलना में अधिक आसानी से पहाड़ों की खड़ी चढ़ाई, नदियों और नालों को पार कर सकता है।
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जोरावर टैंक के बारे में जानिए
जोरावर हल्के वजन वाला टैंक है, जिसे भारतीय सेना को लद्दाख जैसे हाई एल्टीट्यूड इलाकों में बेहतर क्षमता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन सिर्फ 25 टन है, जो टी-90 जैसे भारी टैंकों के वजन का आधा है, जिससे यह मुश्किल पहाड़ी इलाकों में काम कर सकता है, जहां बड़े टैंक नहीं पहुंच सकते। इसका नाम 19वीं सदी के डोगरा जनरल जोरावर सिंह के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने लद्दाख और पश्चिमी तिब्बत में सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया था। जोरावर को हल्का, चलने में आसान और हवा से परिवहन योग्य बनाया गया है, जबकि इसमें पर्याप्त मारक क्षमता, सुरक्षा, निगरानी और संचार क्षमताएं भी हैं।


जोरावर टैंक की खूबियां

  • जोरावर में 105 मिमी या उससे अधिक कैलिबर की गन लगी है, जिससे एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागीं जा सकती हैं।
  • इसमें मॉड्यूलर एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर और एक एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम लगा है, जो इसे हमलों से सुरक्षित रखता है।
  • बेहतर मोबिलिटी के लिए इसमें कम से कम 30 एचपी/टन का पावर-टू-वेट रखा गया है।
  • इसके अलावा, इसमें ड्रोन लगाए गए हैं, साथ ही बैटल मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाया गया है।

अभी कितने टैंक का ऑर्डर दिया गया?
भारतीय सेना ने शुरुआत में केवल 59 जोरावर टैंकों का ऑर्डर दिया है। बाद में 295 अतिरिक्त टैंक खरीदे जाएंगे। जोरावर चीन के मौजूदा हल्के पहाड़ी टैंकों, जैसे ZTQ टाइप-15 का मुकाबला करेगा।

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