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एक्सप्लेनर: सर्दी की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में बढ़ने लगा एक्यूआई, इस बार सरकार कौन सी बंदिशें लेकर आई?

Thu, 22 Oct 2026 06:08 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 22 Oct 2026 06:08 AM IST
सार

सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ रखने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वाहनों, निर्माण कार्यों और कचरा प्रबंधन से जुड़े कई नियम सख्त किए जा रहे हैं। वहीं, एक्यूआई बिगड़ने के साथ ग्रैप-1 भी लागू हो चुका है। ऐसे में इस बार प्रदूषण रोकने के लिए सरकार क्या-क्या पाबंदियां लगाने जा रही है? आइए जानते हैं।

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Explainer: Delhi-NCR AQI Rises as Winter Approaches: What New Restrictions Has the Government Introduced?
दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एक्शन प्लान बनाया गया है। यह प्लान 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इसी बीच बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप 1 भी लागू हो गया है।

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ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान? इसमें किन नियमों को सख्त किया गया है? किन चीजों पर प्रतिबंध रहेगा? साथ ही ग्रैप क्या होता है? इसमें किन उपायों को अपनाया जाता है?

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बीएस-6 से नीचे के वाहनों पर रोक, 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नीति

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती करने की तैयारी की है। 1 नवंबर से बीएस-6 से नीचे के वाहनों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले वाहनों के लिए नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नीति लागू की जाएगी।

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  • दिल्ली के 500 एएनपीआर कैमरों से लैस पेट्रोल पंपों पर जागरूकता और जांच अभियान चलाया जाएगा।
  • बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन देने के नियम का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंपों पर कार्रवाई की जाएगी।

बीएस-6 वाहन वे गाड़ियां हैं, जिनके इंजन से निकलने वाले धुएं को कम करने के लिए सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं। इन गाड़ियों में प्रदूषण को नियंत्रित करने की बेहतर व्यवस्था होती है। बीएस-6 से पहले बीएस-4 जैसे मानक लागू थे, जिनके तहत गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर अपेक्षाकृत कम सख्ती थी। भारत में 1 अप्रैल 2020 से नए वाहनों के लिए बीएस-6 मानक लागू हुआ।

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सार्वजनिक परिवहन और ईवी को बढ़ावा देने पर जोर

निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार बस और मेट्रो सेवाओं के साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

  • दिल्ली में बसों का बेड़ा बढ़कर 6,840 हो गया है। इनमें 5,088 इलेक्ट्रिक बसें हैं।
  • दिल्ली मेट्रो के सभी 228 स्टेशनों पर लास्ट माइल कनेक्टिविटी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
  • दिल्ली मेट्रो सारथी एप के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान और डाउनलोड कैंप आयोजित करने की योजना बनाई गई है।

निर्माण और ध्वस्तीकरण पर प्रतिबंध

  • निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
  • 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली ध्वस्तीकरण गतिविधियों और खुले में होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी।
  • 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और ध्वस्तीकरण की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
  • निर्माण स्थलों की निगरानी एआई कैमरों से की जाएगी। इन्हें कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा, ताकि नियमों के उल्लंघन की जानकारी तुरंत मिल सके।
  • निर्माण और ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन के लिए मालबा एप पर पंजीकरण को बिल्डिंग प्लान की मंजूरी से जोड़ने का फैसला किया गया है।
  • निर्माण स्थलों पर निरीक्षण बढ़ाया जाएगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे।

Explainer: Delhi-NCR AQI Rises as Winter Approaches: What New Restrictions Has the Government Introduced?
दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

सरकारी और निजी क्षेत्र में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम

सड़कों पर वाहनों का दबाव और जाम कम करने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम लागू करने की योजना है। इसके अलावा कार्यालयों के समय को निर्धारित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि सभी कार्यालयों में एक ही समय पर कर्मचारियों के पहुंचने से सड़कों पर भीड़ न बढ़े। इसके अलावा दिल्ली सरकार की सिंतबर में हुई बैठक में भी कुछ अहम फैसले लिए गए थे, जो 1 नवंबर से लागू होने वाले हैं। 

609 किलोमीटर सड़कों पर होगी मैकेनिकल स्वीपिंग

सड़कों पर जमा धूल हवा में उड़कर प्रदूषण बढ़ाती है। इसे कम करने के लिए सरकार मैकेनिकल स्वीपिंग यानी मशीनों से सड़कों की सफाई का दायरा बढ़ाएगी।

करीब 609 किलोमीटर ऐसी सड़कों को योजना में शामिल किया गया है, जिनकी चौड़ाई 10 मीटर से कम है। इसके लिए 250 वार्डों की 854 सड़कों की पहचान की गई है।

सरकार के अनुसार, 1,193 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास पूरा हो चुका है। बाकी काम 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फुटपाथों को पूरी लंबाई में पक्का करने और पैदल चलने के लिए बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रदूषण और सफाई से जुड़ी शिकायतों का निपटारा 72 घंटे के भीतर करना होगा।

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दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

खुले में कचरा जलाने पर रोक

कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। इसे रोकने के लिए सरकार ने सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है।

  • वार्ड, जिले और उपमंडल स्तर पर निगरानी दल तैनात किए जाएंगे।
  • बाजारों से कचरा उठाने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
  • खुले में कचरा जलाने से रोकने के लिए ‘जीरो बर्निंग’ अभियान चलाया जाएगा।
  • ठोस कचरा प्रबंधन नियमों को लागू करने पर जोर दिया जाएगा।
  • अनधिकृत नियमित की गई कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में विशेष निगरानी की जाएगी।

सरकार के मुताबिक, मटेरियल रिकवरी और सॉर्टिंग से जुड़े एमआरएसएम केंद्रों की संख्या पिछले साल के 76 से बढ़कर 98 हो गई है।

आईआईटी दिल्ली करेगा प्रदूषण के स्रोतों का अध्ययन

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के स्रोतों की लगातार निगरानी और विश्लेषण के लिए आईआईटी दिल्ली के साथ पांच साल के सहयोग को मंजूरी दी है।

इस व्यवस्था के तहत पीएम2.5 और पीएम10 के प्रमुख स्रोतों का अध्ययन किया जाएगा। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल और बायोमास जलाना शामिल हैं। इससे पता लगाया जाएगा कि दिन के अलग-अलग समय में प्रदूषण में किस स्रोत का कितना योगदान है।

71 लाख पौधे लगाने का दावा, हरित क्षेत्रों पर जोर

दिल्ली सरकार ने हरित क्षेत्रों को बढ़ाने और कम हरियाली वाले क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने पर भी जोर दिया है। सरकार के अनुसार, अब तक 71 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। वहीं, चिन्हित 434 एकड़ में से 433 एकड़ क्षेत्र को हरा-भरा किया जा चुका है। अब पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार ने कई कदम तय किए हैं।

  • प्रदूषण निगरानी केंद्रों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए 334 प्रवर्तन दल तैनात किए जाएंगे।
  • एआई आधारित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय किया जाएगा।
  • नागरिकों की शिकायतों के निपटारे और दैनिक वायु गुणवत्ता बुलेटिन की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
  • दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्रोतों और नियंत्रण के उपायों पर संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।

 प्रदूषण हॉटस्पॉट और निर्माण स्थलों का निरीक्षण

11 अक्तूबर को दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग ने दक्षिणी दिल्ली के प्रदूषण हॉटस्पॉट और निर्माण स्थलों का संयुक्त निरीक्षण किया था। इस दौरान प्रदूषण की स्थिति का आकलन किया गया और सर्दियों से पहले विभिन्न सरकारी एजेंसियों की ओर से किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने भी निर्माण स्थलों पर जांच तेज की है। जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया, वहां संबंधित एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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एक्यूआई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-1 क्यों हुआ लागू?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप का चरण एक लागू किया। यह निर्णय क्षेत्र में वायु गुणवत्ता के खराब श्रेणी में आने के कारण लिया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के डाटा के अनुसार, दोपहर 3 बजे तक दिल्ली का एक्यूआई 244 दर्ज किया गया। 

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) क्या है?

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसके स्तर को कम करने के लिए बनाया गया एक आपातकालीन और एहतियाती ढांचा है। इसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत एमसी मेहता बनाम भारत संघ मामले में 2016 में तैयार किया गया था। इसे 2017 में आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर लागू किया गया।

इस योजना को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और संबंधित राज्य सरकारों के समन्वय से लागू करता है।

ग्रैप के तहत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को चार चरणों में बांटा गया है। प्रदूषण बढ़ने के साथ प्रतिबंध और सख्त होते जाते हैं।

चरण 1: खराब (एक्यूआई 201-300)
इस स्तर पर प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों की सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और कचरा जलाने पर रोक जैसे उपाय किए जाते हैं।

  • सड़कों की मशीनों से सफाई बढ़ाई जाती है और पानी का छिड़काव किया जाता है।
  • निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है।
  • खुले में कचरा और अन्य अपशिष्ट जलाने पर रोक लगाई जाती है।
  • सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाता है।
  •  निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।

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ग्रैप के चार चरण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

चरण 2: बहुत खराब (एक्यूआई 301-400)
जब प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है, तो पहले चरण के उपाय जारी रहते हैं। इसके साथ डीजल जनरेटर और निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं।

  • जरूरी सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाता है।
  • निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जाता है।
  • सड़कों पर जाम कम करने के लिए यातायात प्रबंधन मजबूत किया जाता है।
  • लोगों को सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।


चरण 3: गंभीर (एक्यूआई 401-450)
इस स्तर पर निर्माण कार्यों और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाई जाती है। पहले और दूसरे चरण के सभी उपाय भी जारी रहते हैं।

  • आवश्यक परियोजनाओं और गतिविधियों को छोड़कर निर्माण और ध्वस्तीकरण के काम रोक दिए जाते हैं।
  • ईंट भट्ठों, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर जैसी प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद किया जाता है।
  • कुछ श्रेणियों के ट्रकों के दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाता है।


चरण 4: अत्यंत गंभीर (एक्यूआई 450 से अधिक)
जब वायु प्रदूषण अत्यंत गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है, तो आपातकालीन उपाय किए जाते हैं। इस चरण में पहले के तीनों चरणों के प्रतिबंध भी लागू रहते हैं।

  • जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को छोड़कर ट्रकों के प्रवेश पर रोक लगाई जाती है।
  • वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ऑड-ईवन व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाता है।
  • स्कूलों को बंद करने या ऑनलाइन कक्षाएं चलाने जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है।
  • निर्माण गतिविधियों पर रोक और अन्य आपातकालीन उपाय लागू किए जा सकते हैं।
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