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क्या चक्रवाती तूफान 'क्यार' भारत के पश्चिमी तट से टकराएगा, यहां जानें क्या होगा असर?

Sat, 26 Oct 2019 03:40 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Sat, 26 Oct 2019 03:40 PM IST
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Explained Why Cyclone Kyarr is unlikely to hit Indias west coast
प्रतीकात्मक तस्वीर

चक्रवाती तूफान क्यार के शनिवार शाम तक और ज्यादा गंभीर रूप ले लेने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विज्ञानियों ने इस तूफान को उसकी ताकत के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की दूसरी सर्वोच्च श्रेणी में रखा है।

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बात दें कि महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में कई जगहों पर पिछले कुछ दिनों से बारिश हो रही है, जिसका मुख्य कारण अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान 'क्यार' ही है। जो शनिवार सुबह भारत के दक्षिण में रत्नागिरी के तट तक पहुंच गया था।
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यह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के तट से लगभग 350 किलोमीटर दूर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में 12 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ चल रहा था।

चक्रवाती तूफान क्यार के कारण हवाओं की गति 170-180 किलोमीटर हो जाने की संभावना जताई गई है। ओडिशा के तट पर बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले फानी तूफान के बाद भारतीय भूभाग के पास उभरने वाला यह सबसे शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय तूफान है।
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हालांकि, क्यार के भारतीय तट रेखा से टकराने की उम्मीद कम है। अरब सागर में उभरने वाले अधिकांश चक्रवातों की तरह, इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बहने और ओमान तट की ओर बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।

भारत के मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों में ऐसा होने की संभावना है। हालांकि इस समयावधि के दौरान यह भारतीय तट के पास तो रहेगा, लेकिन इससे यहां के आसपास के इलाके में तेज भारी बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 24 घंटों में कोंकण और गोवा और दक्षिण गुजरात के तटीय जिलों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसकी वजह से पश्चिमी तट पर भी शनिवार और रविवार को 120-130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।


मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक इस क्षेत्र में समुद्र अशांत रह सकता है, ऐसे में महाराष्ट्र-गोवा-कर्नाटक तटों पर मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी जाती है।

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