कोरोना वायरस: युवाओं को टीके के पक्ष में नहीं थे विशेषज्ञ, अप्रैल में बने सात करोड़, लगे 9 करोड़
महामारी की दूसरी लहर के बीच युवाओं का टीकाकरण शुरू करने के लिए टास्क फोर्स सहमत नहीं थी, क्योंकि देश में वैक्सीन का उत्पादन कम और मांग ज्यादा थी।
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बीते अप्रैल का उदाहरण लें तो सात करोड़ खुराकें बनीं, करोड़ लेकिन खर्च 8.91 करोड़ हुई। एक मई से 18-44 वर्ष को वैक्सीन देने से पहले लेकिन टास्क फोर्स, कोविड वर्किंग रही ग्रुप और नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन (एनईजीवीएसी) तक की बैठक में यह मुद्दा उठा था ।
उस दौरान कहा गया कि जिस आयु वर्ग (45 पार) में कोरोना सबसे ज्यादा जानलेवा है, उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इनमें से 60 से 70 फीसदी लोगों को जब तक वैक्सीन नहीं लग जाए तब तक नया चरण शुरू नहीं करना चाहिए।
ऐसा होने से टीकाकरण अधूरा रहेगा और अब तक के प्रयास फेल हो सकते हैं। टास्क फोर्स के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि इसके बावजूद फैसला वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था। सरकार को वैक्सीन की उत्पादन क्षमता और डिमांड दोनों के बारे में ठीक से पता हीं मिल था।
इतना ही भविष्य में मांग कितनी बढ़ सकती है? यह भी पता था। उन्होंने कहा, मुझे ऐसा लगता है कि केंद्र के साथ साथ राज्य सरकारों ने अस्पताल, ऑक्सीजन, दवाओं और बीमारी की रोकथाम से ध्यान हटाकर पूरे देश का फोकस वैक्सीन पर कर दिया है, जोकि किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
2.95 करोड़ को बुकिंग का है इंतजार
24 और 26 अप्रैल की बैठक में कहा गया कि अगर नया चरण शुरू कर देंगे तो मांग इतनी बढ़ जाएगी कि टीकाकरण अधूरा रह जाएगा और दूसरी खुराक नहीं लग पाएगी।
13 मई तक 20.82 करोड़ रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, लेकिन शुक्रवार सुबह तक इनमें से वैक्सीन 17.86 करोड़ को लगा है। यानी बीते 13 दिन से 2.95 करोड़ से ज्यादा लोग रजिस्ट्रेशन करने के बाद बुकिंग के इंतजार में है।
जिन्हें ज्यादा जरूरत, उन्हें नहीं लगी दूसरी खुराक
1 से 13 मई के बीच पहली खुराक सबसे ज्यादा लोगों ने ली है और दूसरी खुराक लेने वालों की संख्या लगातार घट रही है। यह स्थिति तब है दूसरी खुराक वालों का रोजाना 70 फीसदी टीकाकरण होना चाहिए, लेकिन पश्चिम बंगाल, सिक्किम, त्रिपुरा, केरल, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा को छोड़ अन्य कहीं ऐसा नहीं हुआ।
दिल्ली में केवल 20 फीसदी को दूसरी खुराक
वैक्सीन की कमी को लेकर दिल्ली सरकार लगातार केंद्र पर आरोप लगा रही है लेकिन वहां अभी ऐसी स्थिति बन चुकी है कि केवल 20 फीसदी को ही दूसरी खुराक लग रही है जबकि 80 फीसदी को हर दिन पहली खुराक दे रहे हैं। हरियाणा, गोवा, असम, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान में भी यही हालात हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े
- 6.6 करोड़ वैक्सीन पीएमकेयर फंड से खरीदी , सब की खपत हो गई
- एक करोड़ कोविशील्ड गवी कोवैक्स से खरीदी , यह भी खप गई
- 12 करोड़ वैक्सीन मार्च में केंद्र ने खरीदीं , सिर्फ 1.50 लाख बचीं
- 16 करोड़ वैक्सीन अभी खरीदी , जुलाई तक चलेगी आपूर्ति
- 16 करोड़ वैक्सीन राज्य और अस्पतालों ने ऑर्डर दिया , अभी पाइपलाइन में
- इस समय कोविशील्ड और कोवाक्सिन के पास 32 करोड़ का ऑर्डर, क्षमता केवल सात से आठ करोड़
यूपी में 30 % से कम टीकाकरण
- 45 वर्ष से अधिक 32 फीसदी को ही लगी है पहली खुराक, यूपी-बिहार सहित 14 राज्य में इससे भी कम
- 30 राज्यों में युवाओं को दे रहे हैं वैक्सीन, 13 दिन में आठ राज्य 100 को भी नहीं दे पाए खुराक
- 11 राज्यों में सबसे ज्यादा युवाओं को वैक्सीन , यहां 45 वर्ष से अधिक आयु वाले दूसरी खुराक से पिछड़े
- 50 फीसदी को लग रही दूसरी खुराक, महाराष्ट्र-राजस्थान सहित 19 राज्यों में इससे भी कम है।